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नारायणगढ़ में हरडा-वाला/महादेव वाला मंदिर और साईं धाम सेवा समिति के बीच जमीन का चल रहा विवाद
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। नारायणगढ़ के बहुचर्चित मंदिर विवाद में साईं धाम सेवा समिति को अदालत से झटका लगा है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश डॉ. अशोक कुमार की अदालत ने अपील दायर करने में हुए 1339 दिनों के विलंब को माफ करने से इन्कार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल कोरोना काल की आड़ लेकर इतनी देरी को जायज नहीं ठहराया जा सकता।
नारायणगढ़ स्थित मूर्ति शिवजी (हरडा-वाला/महादेव वाला मंदिर) और साईं धाम सेवा समिति के बीच जमीन को लेकर कानूनी विवाद चल रहा था। इस मामले में 29 फरवरी 2020 को सिविल जज (जूनियर डिवीजन) मनमीत कौर घुम्मन की अदालत ने मूर्ति शिवजी के पक्ष में फैसला सुनाया था। इस फैसले के खिलाफ साईं धाम सेवा समिति ने करीब पौने चार साल बाद (1339 दिन की देरी से) अपील दायर की थी।
साईं धाम सेवा समिति की ओर से दलील दी गई कि निचली अदालत के फैसले के तुरंत बाद देश में कोरोना का दौर शुरू हो गया था। साथ ही समिति का कहना था कि चूंकि जमीन पर मंदिर का निर्माण हो चुका था, इसलिए वे शुरू में अपील दायर करने में हिचकिचा रहे थे। उन्होंने दावा किया कि जब अदालत ने मंदिर के कब्जे के लिए वारंट जारी किया, तब उन्हें अपील दायर करने की आवश्यकता महसूस हुई।
अधिकार के प्रति सजग रहना जरूरी : अदालत
प्रतिवादी (मूर्ति शिवजी मंदिर) के वकील ने देरी का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि समिति ने तथ्यों को छिपाया है। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कोरोना काल (15 मार्च 2020 से 28 फरवरी 2022) की छूट देने के बावजूद, अपील दायर करने में बहुत अधिक समय लिया गया। अदालत ने माना कि समिति अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं थी और इतनी लंबी देरी के लिए कोई ठोस या संतोषजनक कारण नहीं बताया गया। इसके साथ ही अदालत ने देरी माफी की अर्जी को खारिज कर दिया।
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