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कुरुक्षेत्र। चतुर्वेद पारायण महायज्ञ में आहुति डालते आर्य परिवार। संवाद – फोटो : संगठन
कुरुक्षेत्र। ब्रह्मसरोवर स्थित योग भवन परिसर में चल रहे 12 दिवसीय चतुर्वेद पारायण महायज्ञ में देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचकर आहुति डाल रहे हैं। सोमवार को नेपाल से कृष्ण प्रसाद आर्य और मय प्रसाद आर्य के नेतृत्व में आर्य परिवारों ने यज्ञ में भाग लिया और वैदिक मंत्रों के साथ आहुतियां अर्पित कीं। इस दौरान नेपाल से आए शिष्टमंडल ने महर्षि दयानंद सरस्वती को सत्य, सनातन और वैदिक धर्म का रक्षक बताया।
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सोमवार को रिटायर्ड आईएएस और पंचायत विभाग के महानिदेशक बीएस मलिक भी महायज्ञ में शामिल हुए। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने सत्य की खोज में अपना घर-परिवार छोड़कर वेदों का ज्ञान प्राप्त किया और जीवन को मानव कल्याण के लिए समर्पित कर दिया।
उन्होंने समाज में फैले अंधविश्वास और कुरीतियों को दूर करने का कार्य किया और युवाओं को क्रांतिकारी बनने की प्रेरणा दी, जिससे आजादी की लड़ाई में अहम योगदान मिला। बीएस मलिक ने कहा कि महर्षि के वेद चिंतन और विचार को हमें अपने दैनिक जीवन में अपनाना चाहिए, जिससे समाज का कल्याण हो सके।
महायज्ञ में आचार्य संदीपन, आचार्य प्रदीप, हिमाचल प्रदेश से रविंद्र तंवर महाराज, देशराज आर्य, श्रद्धानंद अनाथालय करनाल से बलदेव राज, दीपक फरीदाबाद, आर्य दिलबाग लाठर, रोहित आर्य, योगेश आर्य, नरेंद्र आर्य, स्वामी विजयवेश गुरुग्राम सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
गुरुकुल शिक्षा से बनता है राष्ट्रवादी और संस्कारी समाज : स्वामी संपूर्णानंद
कार्यक्रम संयोजक स्वामी संपूर्णानंद सरस्वती ने गुरुकुलीय शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि आर्य समाज के पुरोधा स्वामी श्रद्धानंद जी ने इस शिक्षा प्रणाली को पुनर्जीवित किया था। यह शिक्षा बच्चों को अच्छा स्वास्थ्य, ईश्वर की सच्ची भक्ति और राष्ट्रभक्ति की भावना प्रदान करती है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे गुरुकुलों का भ्रमण करें और वहां की शिक्षा प्रणाली को नजदीक से समझें। इससे उन्हें महसूस होगा कि गुरुकुल शिक्षा किस तरह से बच्चों के जीवन को संवार सकती है और उनका सर्वांगीण विकास कर सकती है।
कुरुक्षेत्र। चतुर्वेद पारायण महायज्ञ में आहुति डालते आर्य परिवार। संवाद– फोटो : संगठन
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Kurukshetra News: नेपाल से पहुंचे आर्य परिवारों ने डाली आहुति