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रेवाड़ी। किसान गोष्ठी में जानकारी देते कृषि महाविद्यालय के पदाधिकारी। स्रोत: कालेज
संवाद न्यूज एजेंसी
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बावल। स्थानीय कृषि महाविद्यालय में हरियाणा किसान कल्याण प्राधिकरण पंचकुला की ओर से किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता प्राधिकरण के सीईओ डॉ. रवींद्र सिंह चौहान ने की।
कृषि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. नरेश कौशिक ने कहा कि रेवाड़ी जिले में 70-80 हजार एकड़ में सरसों की खेती की जाती है। पूरे देश में सरसों उत्पादन में रेवाड़ी प्रथम स्थान पर है। क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र बावल के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. धर्मबीर यादव ने रेवाड़ी जिले में सरसों की खेती में उत्पादन से संबंधित समस्याओं के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरसों की प्रसंस्करण इकाई लगाई जाएं और किसान हित का निर्धारण किया जाना चाहिए।
मुख्य अतिथि डॉ. रवींद्र चौहान ने बताया कि पिछले वर्ष उत्तर भारत में सरसों के क्षेत्र में लगभग 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने किसानों से सरसों का क्षेत्रफल एवं उत्पादन को बढ़ाने बारें में अपने विचार सांझा किए। डॉ. चौहान ने बताया कि सरकार द्वारा स्कीमों व सब्सिडी जैसे कि भावांतर भरपाई योजना, मेरा पानी मेरी विरासत, ड्रिप इरीगेशन इत्यादि का उपयोग करके किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं और कृषि विश्वविद्यालय द्वारा सिफारिश कि गई उर्वरक कि मात्रा का प्रयोग करके संसाधनों के दोहन को कम किया जा सकता है।
कृषि विज्ञान केंद्र, बावल के समन्वयक डॉ बलबीर सिंह ने सरसों में आने वाले कीड़ों कि पहचान एवं समाधान के उपाय सुझाए। उन्होंने बताया कि सरसों की बीजाई अनुकूल वातावरण के अनुसार ही करनी चाहिए और बीज की मात्रा ज्यादा रखने से कीटों का प्रकोप कम रहता है। सहायक वैज्ञानिक डॉ. नरेश यादव ने सरसों में आने वाली बीमारियों एवं उनकी रोकथाम के लिए कृषि पद्धति में बदलावों के बारे में चर्चा की। डॉ. अमरजीत ने किसानों को सरसों का उत्पादन बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक विधि से खेती करने पर जोर दिया एवं इससे संबंधित विभिन्न सस्य क्रियाओं पर प्रकाश डाला। डॉ. अशोक डहीनवाल ने सरसों की उत्तम किस्मों के बारे में किसानों को अवगत कराया।
कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. प्रशांत चौहान व डॉ. महेंद्र सिंह ने किसान दिवस के महत्व एवं उद्देश्य के बारे में अपने विचार साझा किए। इस गोष्ठी में 50 से अधिक किसानों ने भाग लिया और खेती के दौरान आने वाली समस्याओं एवं उनके समाधान पर वैज्ञानिकों से चर्चा की। कार्यक्रम के दौरान डॉ. सुनीता श्योराण, डॉ. रूमी रावल व डॉ. राकेश कुमार का सहयोग रहा।
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सरसों उत्पादन में रेवाड़ी देश में प्रथम स्थान पर : डॉ. कौशिक