Kurukshetra News: गीता संदेश के साथ दुनिया में फैलेगा महात्मा बुद्ध का जीवन दर्शन, कुरुक्षेत्र से जुड़ाव पर मंथन करेंगे देश-विदेश के स्कॉलर Latest Haryana News

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कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान इस बार धर्मनगरी से गीता संदेश के साथ-साथ महात्मा बुद्ध के जीवन दर्शन व कुरुक्षेत्र के तीर्थाटन से उनके जुड़ाव का संदेश देश-दुनिया में फैलेगा। इस पर देश-विदेशों के स्कॉलर मंथन करेंगे। इसमें विदेश मंत्रालय की पहल पर बिहार स्थित दुनिया के पहले आवासीय नालंदा विश्वविद्यालय की भी अहम भागीदारी रहेगी।

अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में पिछले वर्ष की तर्ज पर इस बार भी अनेक देशों के स्कॉलर महोत्सव में पहुंचेंगे। यहां वे अंतरराष्ट्रीय गीता सेमिनार में गीता संदेश के मर्म व इसकी मानवता के कल्याण के मर्म पर मंथन करेंगे। पिछले वर्ष पहला मौका था जब गीता पर ही 19 सेमिनार कराए गए थे। इनमें एक सेमिनार आयुष व एक नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (एनआईडी) कुरुक्षेत्र की ओर से भी शामिल किया गया था। इसी तरह इस बार होने वाले इस आयोजन में खास तौर से महात्मा बुद्ध के जीवन दर्शन के साथ कुरुक्षेत्र की धरा से उनके जुड़ाव व संदेश पर भी गहन मंथन होगा। नालंदा विश्वविद्यालय के स्कॉलर भी सेमिनार में अहम भागीदारी करेंगे। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड व प्रदेश सरकार ने इस पर न केवल निर्णय ले लिया है बल्कि अभी से ही स्कॉलर से संपर्क भी साधा जाने लगा है।

केडीबी नालंदा विश्वविद्यालय से एमओयू करने की भी तैयारी में

केडीबी मानद सचिव उपेंद्र सिंघल ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय पहली बार अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में अहम भागीदारी करने जा रहा है। वहीं कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड नालंदा विश्वविद्यालय से एमओयू करने की भी तैयारी में है। इससे भविष्य में विश्वविद्यालय की भागीदारी और बढ़ेगी। पहले कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड व कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की ओर से ही गीता पर यह खास सेमिनार किया जाता रहा लेकिन पिछले वर्ष विदेश मंत्रालय न केवल महोत्सव का भागीदार बना बल्कि 25 देशों के स्कॉलर भी इस सेमिनार में मंथन करने पहुंचे थे। नालंदा विश्वविद्यालय एक सार्वजनिक केंद्रीय/संघ विश्वविद्यालय है। इसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान (आईएनआई) और उत्कृष्टता के रूप में नामित किया हुआ है। बौद्धिक, दार्शनिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक अध्ययन के लिए यह एक अंतरराष्ट्रीय संस्थान है।

2600 ईसा पूर्व पड़े थे बुद्ध के चरण

इतिहासकारों के मुताबिक 2600 ईसा पूर्व महात्मा बुद्ध के पवित्र चरण कुरुभूमि पर भी पड़े। उन्होंने यहां अनोत्ता झील (कमल के फूलों के कुंड) पर दीक्षा ग्रहण की। वर्तमान में अनोत्ता झील कुरुक्षेत्र में कहां है, ये शोध का विषय है। धर्मनगरी स्थित पवित्र ब्रह्मसरोवर के शेरों वाले घाट के सामने वर्तमान में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की परिधि में प्राचीन बौद्ध स्तूप है। कुछ साल पहले तक लुप्त प्राय हो चुके इस स्तूप का जीर्णोद्धार किया गया। वहीं प्रदेश में दूसरा स्तूप यमुनानगर के चनोती में है।

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Kurukshetra News: गीता संदेश के साथ दुनिया में फैलेगा महात्मा बुद्ध का जीवन दर्शन, कुरुक्षेत्र से जुड़ाव पर मंथन करेंगे देश-विदेश के स्कॉलर