Bengal election 2026:वोट देने लौट रहे प्रवासी मजदूर, टिएमसी का बीजेपी से सवाल- मजदूर या मतदाता? Politics & News

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Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में एक दिलचस्प ट्रेंड उभरकर सामने आ रहा है. बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर वोट डालने के लिए अपने गृह जिलों में लौट रहे हैं. ग्राउंड रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य के अलग-अलग हिस्सों से बाहर काम करने वाले श्रमिक अब मतदान में हिस्सा लेने के लिए वापस आ रहे हैं.

मतदान के लिए बंगाल लौट रहे प्रवासी मजदूर 

पश्चिम बंगाल के मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर जैसे जिलों से बड़ी संख्या में लोग रोज़गार के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं. चुनाव के समय इनका वापस लौटना नया नहीं है, लेकिन इस बार संख्या और संगठित वापसी ने राजनीतिक दलों का ध्यान खींचा है. पहले चरण के मतदान से ठीक पहले, 16 जिलों की 152 सीटों पर वोटिंग से पहले बड़ी संख्या में प्रवासी घर लौट रहे हैं. दिल्ली, बिहार, सिक्किम समेत कई राज्यों से ट्रेनें सिलीगुड़ी पहुंच रही हैं. वहां से लोग बसों के जरिए उत्तर बंगाल के अलग-अलग जिलों में जा रहे हैं.

इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्या ने कहा, “71 ट्रेनें आ रही हैं. प्रवासी मजदूर उनमें सवार होकर कोलकाता पहुंच रहे हैं… सभी आ रहे हैं.’

प्रवासी मजदूर हैं या दूसरे राज्यों के मतदाता?

जहां भाजपा इस वापसी को लेकर उत्साहित है, वहीं तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अरूप रॉय ने इस पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, ‘ये प्रवासी मजदूर हैं या दूसरे राज्यों के मतदाता?’

कुछ महीने पहले बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान यही तस्वीर देखने को मिली थी. देश के अलग-अलग हिस्सों में काम करने वाले प्रवासी मजदूर भरी ट्रेनों से वापस लौट रहे थे. मतदान खत्म होते ही वे फिर रोज़गार के लिए निकल गए. अब वही पैटर्न पश्चिम बंगाल में भी दिख रहा है.

रेलवे सूत्रों का दावा है कि चुनाव से पहले प्रवासी मजदूरों को घर लाने के लिए केंद्र सरकार ने विशेष ट्रेनों की व्यवस्था की है. इन ट्रेनों को ‘समर स्पेशल’ के रूप में चलाया जा रहा है. लौट रहे अधिकांश लोगों का कहना है कि वे सिर्फ मतदान करने आए हैं और वोट डालने के बाद फिर अपने काम पर वापस लौट जाएंगे.

रोजगार के अवसरों के लिए मजदूरों की नाराजगी 

हालांकि, कई प्रवासी मजदूरों ने राज्य में रोजगार के अवसरों की कमी को लेकर नाराजगी भी जताई है. उनका कहना है कि काम के अभाव में उन्हें बाहर जाना पड़ता है, लेकिन वोट के समय वे अपने अधिकार का इस्तेमाल करने जरूर लौटते हैं.

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में कराए जा रहे हैं. पहला चरण 23 अप्रैल को होगा, जिसमें 16 जिलों की 152 सीटों पर मतदान होगा. दूसरा चरण 29 अप्रैल को निर्धारित है, जब बाकी 7 जिलों की 142 सीटों पर वोट डाले जाएंगे.

राज्य में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं और मतगणना 4 मई को होगी. स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने पूरे राज्य में केंद्रीय बलों की व्यापक तैनाती की है. इसके साथ ही आचार संहिता और सुरक्षा से जुड़े सख्त नियम लागू किए गए हैं, ताकि चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से पूरी हो सके.

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