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फतेहाबाद। आशियाना बनाने का सपना देख रहे लोगों के लिए निर्माण सामग्री की बढ़ती सामग्री उनका बजट बिगाड़ रही है। पिछले कुछ समय से ईंटों के दामों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने अतिरिक्त खर्चा बढ़ा दिया है। एक मास पहले 5500 से 6000 रुपये प्रति हजार मिलने वाली ईंटों का भाव अब 7 हजार रुपये के करीब पहुंच गया है।
ईंटों की कीमतें बढ़ने का कारण कोयले की कीमतों में हो रहे भारी उछाल और उत्पादन लागत बढ़ने बताया जा रहा है। ईंट भट्ठा उद्योग पूरी तरह से कोयले पर निर्भर हैं। भट्ठा संचालकों के अनुसार जो कोयला पहले 12 हजार रुपये प्रति टन के हिसाब से मिलता था उसकी कीमत अब बढ़कर करीब 20 हजार रुपये प्रति टन के पार पहुंच गई हैं। इसके अलावा कोयले पर जीएसटी और ट्रांसपोर्टेशन के खर्च भी बढ़े हैं।
फसल अवशेष से बनी ईंटें भी हुई महंगी
आमतौर पर माना जाता था कि फसल अवशेष (जैसे पराली या तूड़ी) से पकने वाली ईंटें सस्ती होती हैं लेकिन अब उनके दाम भी आम आदमी की पहुंच से बाहर हो रहे हैं। जिले में पिछले एक मास में ही फसल अवशेष से पकने वाली ईंटों के दाम 1500 से 2000 रुपये प्रति हजार बढ़ गए हैं। अच्छी गुणवत्ता वाली अव्वल ईंट के दाम इससे भी अधिक हैं।
खर्च की लागत अधिक होने से बढ़े ईंटें के रेट
ईंट भट्ठा संचालक रमेश कुमार, पवन कुमार व सुरेंद्र कुमार का कहना है कि पिछले साल के मुकाबले इस बार मजदूरी, कोयले आदि खर्च की लागत में अधिक हो गई हैं। जिसके कारण ईंटों के रेट बढ़ रहे हैं। पिछले साल के मुकाबले ईंटों के रेट 1500 से 2000 रुपये प्रति हजार ईंट बढ़ गए है। ईंट भट्ठा संचालकों का कहना है कि सरकार को कोयले के रेट कम करवाने चाहिए ताकि ईंटों के रेट कम हो सके।
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