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How MethylScan Blood Test Detects Cancer Early: मेडिकल साइंस तेजी से ऐसे दौर में पहुंच रही है, जहां एक साधारण ब्लड टेस्ट कई बड़ी बीमारियों का संकेत दे सकता है. इसी दिशा में एक अहम कदम कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, लॉस एंजिल्स के रिसर्चर ने उठाया है, जिन्होंने एक नया टेस्ट विकसित किया है, जो कैंसर समेत कई बीमारियों का शुरुआती स्तर पर पता लगाने में मदद कर सकता है. चलिए आपको बताते हैं कि रिसर्च में क्या निकला है.
क्या निकला रिसर्च में?
यह रिसर्च प्रतिष्ठित जर्नल प्रोसीडिंग्स ऑफ नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस में प्रकाशित हुई है, जिसमें बताया गया है कि सिर्फ एक ब्लड सैंपल के जरिए शरीर के पूरे सेहत का आकलन किया जा सकता है. मेडिकल फील्ड में शुरुआती पहचान सबसे बड़ी चुनौती रही है. कैंसर जैसी बीमारियां अगर समय रहते पकड़ में आ जाएं, तो उनका इलाज काफी आसान हो जाता है. लेकिन अभी तक जो टेस्ट मौजूद हैं, वे अक्सर किसी एक बीमारी पर फोकस करते हैं और कई बार महंगे या असुविधाजनक भी होते हैं.
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इस तकनीक को क्या नाम दिया गया?
इस नई तकनीक को “MethylScan” नाम दिया गया है. यह टेस्ट खून में मौजूद डीएनए के छोटे-छोटे टुकड़ों का एनालिसिस करता है. ये डीएनए शरीर की अलग-अलग सेल्स से आते हैं और जब सेल्स नष्ट होती हैं, तो वे अपनी जानकारी खून में छोड़ देती हैं. इस टेस्ट की खासियत यह है कि यह डीएनए में मौजूद मिथाइलेशन पैटर्न को पढ़ता है. ये ऐसे केमिकल मार्कर होते हैं, जो सेल्स की स्थिति के हिसाब से बदलते रहते हैं. यानी स्वस्थ और बीमार सेल्स के मिथाइलेशन पैटर्न अलग होते हैं, जिन्हें पहचानकर बीमारी का संकेत मिल सकता है.
मुश्किलों से निपटने के लिए क्या किया गया?
ब्लड-बेस्ड टेस्टिंग में एक बड़ी समस्या यह होती है कि खून में ज्यादातर डीएनए सामान्य सेल्स का होता है, जिससे असली बीमारी के संकेत ढूंढना मुश्किल हो जाता है. इसे बैकग्राउंड नॉइज कहा जाता है. इस चुनौती से निपटने के लिए शोधकर्ताओं ने एक नई तकनीक अपनाई, जिससे अनावश्यक डीएनए को हटाकर केवल जरूरी और जानकारी देने वाले डीएनए पर फोकस किया गया. इससे टेस्ट की सटीकता बढ़ी और लागत भी कम हुई. इस स्टडी में 1000 से ज्यादा लोगों पर परीक्षण किया गया, जिनमें कैंसर मरीज, लिवर डिजीज से पीड़ित लोग और स्वस्थ व्यक्ति शामिल थे. एडवांस कंप्यूटर एनालिसिस की मदद से डेटा को समझा गया.
क्या निकला रिजल्ट?
परिणाम काफी उत्साहजनक रहे. टेस्ट ने कुल मिलाकर लगभग 63 प्रतिशत कैंसर मामलों की पहचान की और शुरुआती स्टेज के आधे से ज्यादा मामलों को भी पकड़ लिया. खासकर लिवर कैंसर के मामलों में, हाई-रिस्क ग्रुप में इसकी पहचान दर करीब 80 प्रतिशत तक रही. इसकी एक और बड़ी खासियत यह है कि यह टेस्ट यह भी बता सकता है कि शरीर का कौन सा अंग प्रभावित है. इससे डॉक्टरों को सही दिशा में आगे की जांच करने में मदद मिलती है. हालांकि, अभी यह तकनीक शुरुआती चरण में है और इसे आम इस्तेमाल में लाने से पहले बड़े स्तर पर और परीक्षण की जरूरत है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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इस छोटे-से ब्लड टेस्ट से ही पता लग जाएंगे कई कैंसर, बीमार होने से पहले ही करा सकेंगे इलाज




