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रोहतक। गढ़ी बोहर निवासी राहुल नांदल और अंशु नांदल ने लुप्त होती हरियाणवी संस्कृति को संजोने का बीड़ा उठाया है। एक समय था जब यह दोनों खुद पुरखों की विरासत को नहीं पहचान पाए। अब इन्होंने कृषि, घरेलू उपयोग और पारंपरिक पहनावे से जुड़े करीब 150 दुर्लभ सामान का संग्रह कर लोगों को जागरूक करना शुरू कर दिया है।
बोहर के राहुल व अंशु ने पिछले कुछ सालों में रोहतक समेत आसपास के 30-35 गांवों में घूमकर पुराने बर्तन, खेती के औजार, चारपाई, चरखा, गहने और पहनावे जैसी चीजें इकट्ठा की हैं। इनमें कई सामान 18वीं सदी तक के हैं।
दोनों युवाओं ने गांव के एक खाली प्लॉट में इस पूरे संग्रह को संग्रहालय की तरह सजाया है। साथ ही, जिलास्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में अपनी विरासत की प्रदर्शनियां लगा रहे हैं।
बोहर निवासी अंशु नांदल ने बताया कि आज की पीढ़ी चरखा, पुराने बर्तन, खेती के औजार, गहने और पहनावे जैसी चीजों को भूलती जा रही है। इसी को देखते हुए उन्होंने राहुल के साथ मिलकर यह संग्रह शुरू किया। उनका उद्देश्य नई पीढ़ी को हरियाणा की असली संस्कृति, रहन-सहन और परंपराओं से रूबरू कराना है।
उन्होंने बताया कि करीब 2018-19 में राहुल ने दुर्लभ सामान की पहचान न होने के बाद उनको जानना शुरू किया और संग्रह करना शुरू किया। शुरुआत में देशी खाने की स्टॉल लगाई तो हरियाणवी संस्कृति से जुड़े सामान का भी संग्रह कर प्रदर्शनी लगाना शुरू किया।
इन लोगों ने प्रदर्शनी को सराहा
बोहर के राहुल व अंशु की प्रदर्शनियों को गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा, आईआईबीईआर के चेयरमैन भूपेंद्र मलिक, वी-2 के ऑनर रामचंद्र अग्रवाल, राज्यसभा सदस्य सुभाष बराला, बाबा मस्तनाथ मठ के मठाधीश एवं तिजारा विधायक महंत बालकनाथ, जीआई टैग के रिटायर्ड ज्वाइंट सेक्रेटरी डॉ. जीराज सहित अनेक लोगों ने सराहा है।
18 किलो वजनी पीतल के टोकने को सराह रहे दर्शक
अंशु नांदल ने बताया कि 18 किलो से अधिक वजनदार पीतल के टोकने को दर्शक अधिक पसंद कर सराहा रहे हैं। संग्रह में खेत मापने की 55 फीट की जरी, अनाज को मापने के लिए मिट्टी के माप, गन्ने के कोल्हू में बनाए जाने वाले सीरा रखने का पात्र माट, घी स्टोर करने के लिए रखी जाने वाली बारी, तख्ती, बैलों के पुराने घुंघरू और घंटाल, फूटी कोड़ी की मालाएं, लानटेन, ऊंट को चोरी होने से बचाने के लिए पैर में बांधी जानी न्यौल, 1970 के दशक विभागीय सरकारी पत्र, बही-खाते, कासी, पीतल, तांबे के पुराने बर्तनों सहित 150 से अधिक प्रकार का समान है। महाराजाओं के समय का बड़ा पंखा और पुराने समय के रेडियो व कैमरे भी शामिल हैं।
22-रोहतक के गढ़ी बोहर में राहुल नांदल व अंशु नांदल ने खाली प्लॉट में बनाया हरियाणवी व भारतीय सं– फोटो : Archive

22-रोहतक के गढ़ी बोहर में राहुल नांदल व अंशु नांदल ने खाली प्लॉट में बनाया हरियाणवी व भारतीय सं– फोटो : Archive
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Rohtak News: 35 गांवों से 18वीं सदी तक का सामान इकट्ठा कर हरियाणवी संस्कृति संजो रहे राहुल व अंशु




