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करनाल। नगर निगम के शहर के विकास के दावे तो बुलंद हैं लेकिन धरातल पर नतीजे नाकाफी हैं। लक्ष्य बड़े तय किए गए। बजट भी था लेकिन उसे खर्च ही नहीं किया जा सका। पिछले वित्तीय वर्ष में विकास कार्यों पर सवा सौ करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करने की योजना बनाई गई थी। साल भर में निगम कुल बजट का महज 24.6 प्रतिशत उपयोग कर सका।
नगर निगम ने बीते साल शहर में मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए 137 करोड़ रुपये खर्च करने का रोडमैप तैयार किया था। इसमें सड़कों, जल निकासी, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट और अन्य विकास परियोजनाएं शामिल थीं। तय किए गए बजट में से सिर्फ 33.75 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए। कारण टेंडर प्रक्रिया में देरी, एजेंसियों की उदासीनता और योजनाओं में बार-बार बदलाव बताया जा रहा है। अधिकांश प्रोजेक्ट फाइलों तक ही सीमित रह गए। नए वित्तीय वर्ष में नगर निगम ने 117 करोड़ रुपये विकास कार्यों पर खर्च करने का लक्ष्य तय किया है।
टी फ्लाईओवर और बड़े प्रोजेक्ट बने रुकावट
शहर के बहुप्रतीक्षित टी फ्लाईओवर प्रोजेक्ट की वजह से कई बड़े काम अटके रहे। ठेकेदार एजेंसियों के रुचि न दिखाने, बार-बार टेंडर रद्द (रिकॉल) होने और तकनीकी खामियों के चलते भी परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पाईं। दिव्य नगर योजना के तहत प्रस्तावित दो सबसे बड़े प्रोजेक्ट शुरू ही नहीं हो पाए हैं।
टेंडरिंग सिस्टम और प्लानिंग पर उठे सवाल :
बार-बार टेंडर रद्द होने से न केवल समय की बर्बादी हुई बल्कि विकास कार्यों की लागत भी बढ़ने की आशंका है। ऐसे में निविदा जारी करने की प्रक्रिया और योजना बनाने पर भी सवाल उठ रहे हैं।
वर्जन
कई कारणों से विकास कार्य पूरे नहीं हो पाते। निगम अधिकारियों को इनमें सुधार के निर्देश दिए हैं। अबकी बार विकास पर फिर अच्छा और सकारात्मक बजट तैयार किया गया है। अधिकारियों को मजबूत योजना बनाने के निर्देश दिए हैं। -रेणु बाला गुप्ता, मेयर, करनाल
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Karnal News: बड़े लक्ष्य, नाकाफी नतीजे… सालभर में सिर्फ 24.6 फीसदी बजट ही खर्च कर पाया निगम



