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- AI ने स्वीडिश शोधकर्ताओं को मेलानोमा का खतरा पहचाना।
- AI मॉडल ने 60 लाख लोगों के डेटा का विश्लेषण किया।
- 73% मामलों में AI ने सटीक भविष्यवाणी की।
- AI अब दिल की बीमारियों का भी पहले पता लगा सकती है।
AI Can Detect Skin Cancer: एआई के कारण हेल्थकेयर सेक्टर में क्रांति की उम्मीद जताई जा रही है. यह टेक्नोलॉजी कई बीमारियों का पहले ही पता लगा सकती है, जिससे मरीजों को समय रहते इलाज मिल सकता है. अब एक ऐसे ही मामले में स्वीडिश रिसर्चर ने एआई का इस्तेमाल उन लोगों की पहचान कर ली, जिन्हें अगले पांच सालों में मेलानोमा (सबसे खतरनाक तरह का स्किन कैंसर) होने का खतरा है. एआई की मदद से उन्होंने पहले से मौजूद मेडिकल रिकॉर्ड को एनालाइज किया और यह पता कर लिया कि किन लोगों को अगले कुछ सालों में स्किन कैंसर होने का ज्यादा खतरा है.
AI से चल सकता है खतरे का पता
स्वीडन की University of Gothenburg के रिसर्चर ने यह कामयाबी हासिल की है. रिसर्च टीम ने स्वीडन के करीब 60 लाख लोगों का क्लीनिकल डेटा एनालाइज किया. उन्होंने लोगों मेडिकल हिस्ट्री और दूसरे इलाज की जानकारी अपने एआई मॉडल को दी. करीब 73 प्रतिशत मामलों में एआई ने यह पता लगा लिया कि किन लोगों को मेलानोमा होने का ज्यादा खतरा है. डायग्नोसिस, मेडिकेशन और सोशियोडेमोग्राफिक डेटा यूज कर रिसर्चर उन लोगों की पहचान कर पाए, जिन्हें अगले पांच सालों में मेलानोमा होने का खतरा 33 प्रतिशत था.
UV लाइट के कारण होता है मेलानोमा
मेलानोमा होने का सबसे बड़ा कारण अल्ट्रावॉयलेट लाइट होती है, जो सीधे सूरज से आती है. यह शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैल सकती है. एक बार शरीर में फैलने के बाद मरीज का बचना काफी मुश्किल हो जाता है. इसलिए इस बीमारी को जल्दी डिटेक्ट कर लेना जरूरी होता है. यह छठा सबसे तेजी से होने वाला कैंसर है और इसके कारण बड़ी संख्या में लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है. ऐसे में एआई के जरिए इस बीमारी की पहचान कर लोगों की जान बचाई जा सकती है. एक बार अधिक जोखिम का सामना कर रहे लोगों की पहचान होने के बाद उनका फॉलो-अप और इलाज करना आसान हो जाता है.
दिल की बीमारियों का भी पहले पता लगा सकती है एआई
स्किन कैंसर की तरह एआई दिल की बीमारियां का भी सालों पहले पता लगा सकती है. मायो क्लीनिक की एक स्टडी में रिसर्चर ने एआई की मदद से दिल की बीमारियों का पता लगाने का तरीका निकाला है. रिसर्चर ने मरीजों के रेगुलर स्कैन को एआई की मदद से नए तरीके से एनालाइज कर यह पता लगाया कि दिल के चारों ओर कितना फैट जमा है. यह फैट आगे चलकर सूजन और दूसरी बीमारियों का कारण बन सकता है. एआई के बिना इसका पता लगा पाना असंभव है.
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