नोएडा में सैलेरी को लेकर बवाल: देश के किस राज्‍य में कितना मिलता है वेतन? Haryana News & Updates

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Noida Workers Protest News: उत्‍तर प्रदेश के नोएडा में मजदूर और श्रमिकों ने सैलेरी को लेकर हंगामा कर दिया है. इस श्रमिकों का कहना है कि कई राज्‍यों में मजदूरों की सैलरी बढ गई है लेकिन नोएडा में हालात अभी भी पुराने हैं. कामगार दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन तनख्वाह इतनी कम कि परिवार चलाना मुश्किल हो जाता है. ओवरटाइम नहीं मिलता, सुविधाएं नाम की हैं.दरअसल हाल ही में हरियाणा सरकार ने एक अप्रैल से न्यूनतम मजदूरी 35 प्रतिशत बढ़ा दी है. मजदूर देख रहे हैं कि पड़ोसी राज्य में सैलरी इतनी ऊपर चली गई, तो क्यों हम यहां कम पैसे पर काम करें? यही वजह है कि नोएडा में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया. तो आइए समझते हैं कि न्यूनतम मजदूरी क्या है, सरकार ने कितनी तय की, वेज कोड क्या कहता है, 2024-2025 के नए नियम क्या हैं, हर राज्य में कितनी सैलरी मिलती है, और हरियाणा ने अभी क्या किया?

क्‍या है पूरा मामला?

नोएडा में होजरी कॉम्प्लेक्स, मदरसन फैक्ट्री के आसपास, सेक्टर 60 मेट्रो स्टेशन, सेक्टर 62 गोल चक्कर और सेक्टर 63 की एक फैक्ट्री में सैकड़ों कामगार सड़क पर उतर आए. वह अपनी सैलेरी बढ़ाने की मांग कर रहे थे लेकिन देखते ही देखते यह प्रदर्शन हिंसक हो गया. मजदूरों ने पुलिस की गाड़ी में तोड़फोड़ कर दी, आग लगा दी और पुलिसवालों पर पत्थर भी फेंके. पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और भारी फोर्स तैनात करना पड़ा. नतीजा सेक्टर-62 से NH-9 तक भीषण जाम लग गया. दफ्तर जाने वाले लोग घंटों फंस गए, गाड़ियां रेंग-रेंगकर चल रही थीं. शहर की सड़कें पूरी तरह ठप हो गईं.

हरियाणा में न्यूनतम मजदूरी बढ़ी, अब कितना मिलेगा?

हरियाणा की सरकार ने मजदूरों के लिए कमाल कर दिया है. यहां 1 अप्रैल 2026 से नई न्यूनतम मजदूरी लागू हो गई है. पहले जहां अकुशल मजदूर को महज 11,274 रुपये महीना मिलता था, वो अब बढ़कर 15,220 रुपये हो गया है. मतलब 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी. ये फैसला मानेसर और गुरुग्राम की फैक्टरियों में ठेका मजदूरों की हड़ताल के बाद लिया गया. सरकार ने कहा कि अब हर कैटेगरी के कामगार को कम से कम इतना ही वेतन मिलेगा, चाहे वो फैक्ट्री हो, निर्माण साइट हो या कोई और काम. सरकार की अधिसूचना के मुताबिक अकुशल मजदूर यानी जो बिना किसी खास स्किल के सिर्फ शारीरिक मेहनत करता है उसे 15,220 रुपये महीना या 585 रुपये रोजाना वेतन मिलेगा. वहीं अर्ध-कुशल यानी सेमी-स्किल्ड श्रमिकों को जो थोड़ा-बहुत ट्रेनिंग वाला काम करते हैं उन्‍हें 16,780 रुपये महीना या 645 रुपये रोजाना मिलेगा.कुशल यानी स्किल्ड श्रमिक जो अपना काम अच्छे से जानते हैं और फैसला ले सकते हैं उन्‍हें 18,500 रुपये महीना या 711 रुपये रोजाना मिलेगा. इसी तरह हाईली स्किल्ड मजदूर जो टेक्नोलॉजी या जटिल काम करते हैं तो उन्‍हें कम से कम 19,425 रुपये महीना या 747 रुपये रोजाना मिलेगा.

किसी में कोई भेदभाव नहीं

इसके लिए महिलाओं और पुरुषों के बीच कोई भेदभाव नहीं होगा.दोनों को बराबर पैसे मिलेंगे. ट्रेनी या प्रशिक्षु कर्मचारियों को भी संबंधित कैटेगरी का 75 प्रतिशत मिलेगा, लेकिन वो अकुशल के न्यूनतम वेतन से कम नहीं होगा और ट्रेनिंग ज्यादा से ज्यादा एक साल की ही होगी. सरकार ने ये भी साफ कर दिया कि महंगाई बढ़े तो CPI (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) के हिसाब से वेतन में और बढ़ोतरी होगी. मतलब भविष्य में ये रकम और घटाई नहीं जा सकेगी. ठेका मजदूरों के लिए मुख्य कंपनी जिम्मेदार होगी कि उन्हें ये न्यूनतम वेतन मिले.जिसके बाद उम्‍मीद की जा रही है कि ये बदलाव मजदूरों की जिंदगी में राहत लाएंगे.

वेज कोड 2019 क्या कहता है?

अब आते हैं असली बात पर. भारत में मजदूरी का पूरा सिस्टम अब Code on Wages, 2019 यानी वेज कोड 2019 से चलता है. पहले अलग-अलग कानून थे-मिनिमम वेजेस एक्ट, बोनस एक्ट, सब अलग-अलग. 2019 में मोदी सरकार ने चारों को एक कोड में समेट दिया. इसका मतलब? पूरे देश में मजदूरी की एक समान परिभाषा. अब न्यूनतम मजदूरी सिर्फ राज्य नहीं, बल्कि केंद्र भी तय कर सकता है. एक राष्ट्रीय फ्लोर वेज है यानी कोई राज्य इससे नीचे मजदूरी नहीं तय कर सकता.

  • वेज कोड क्या-क्या कहता है?
  • हर तरह के कामगार फैक्ट्री, ठेका, निर्माण, सर्विस सेक्टर सब इसके दायरे में आते हैं.
  • कौशल के हिसाब से चार कैटेगरी अनस्किल्ड, सेमी-स्किल्ड, स्किल्ड, हाईली स्किल्ड बनाई गईं हैं.
  • ओवरटाइम, बोनस, EPF सब इससे जुड़े हैं.
  • पुरुष-महिला भेदभाव बिल्कुल नहीं.
  • कंपनियों को बजट प्लानिंग आसान हो गई क्योंकि नियम साफ हैं.
    इस कोड का सबसे बड़ा फायदा ये है कि मजदूरों को सुरक्षा मिली. पहले कई जगह न्यूनतम मजदूरी से भी कम देते थे, अब कानून सख्त है लेकिन प्रॉब्लम ये है कि हर राज्य अपने हिसाब से इसे लागू कर रहे हैं. यही वजह है कि नोएडा (यूपी) और हरियाणा के बीच इतना फर्क दिख रहा है.

2024 और 2025 के नए नियम: क्या बदला और क्यों?

2024-2025 में वेज कोड को और मजबूत किया गया. कई राज्यों ने अपनी न्यूनतम मजदूरी अपडेट की. उदाहरण के लिए दिल्ली ने एक अप्रैल 2025 से अनस्किल्ड के लिए 18,456 रुपये महीना कर दिया.हरियाणा ने जुलाई 2025 में पहले 11,274 रुपये किया,लेकिन अब अप्रैल 2026 में और बढ़ाकर 15,220 कर दिया.उत्तर प्रदेश ने 1 अक्टूबर 2025 से अनस्किल्ड के लिए 11,021 रुपये तय किया.राजस्थान,मध्य प्रदेश,बिहार सबने अपने हिसाब से बढ़ाया. ये बदलाव इसलिए क्योंकि महंगाई बढ़ी, CPI ऊपर गया. वेज कोड कहता है कि हर साल या दो साल में रिव्यू होना चाहिए. 2025 में केंद्र ने भी कुछ गाइडलाइंस जारी कीं कि जोन A, B, C कैटेगरी वाले शहरों के हिसाब से वेतन अलग-अलग होने चाहिए. नोएडा जैसे औद्योगिक इलाके में जोन A में आता है, इसलिए यहां वेतन ज्यादा होनी चाहिए.यही वजह है कि नोएडा के मजदूर सोच रहे हैं कि पड़ोसी हरियाणा में न्‍यूनतम वेतन 15 हजार हो गया है तो हमारी सैलरी भी बढनी चाहिए.

अलग-अलग राज्यों में न्यूनतम मजदूरी

भारत बड़ा देश है यहां की मजदूरी हर जगह अलग अलग है.अगर दिल्‍ली की बात करें तो यहां अनस्किल्ड वर्कर्स का वेतन 18,456, सेमी-स्किल्ड को 20,371, स्किल्ड को 22,411 रुपये मिलता है. यहां महंगाई ज्यादा है इसलिए वेतन ज्यादा है इसी तरह हरियाणा में अब अप्रैल 2026 से अनस्‍किल्‍ड श्रमिकों को न्‍यूनतम वेतन 15,220 मिलेगा पहले यह 11,274 था.उत्तर प्रदेश की बात करें तो अनस्किल्ड मजदूरों का न्‍यूनतम वेतन 11,021 है वहीं अक्‍टूबर 2025 से स्किल्ड श्रमिकों को 13,580 तय की गई है. नोएडा इसी में आता है.मध्य प्रदेश में अनस्किल्ड मजदूरों को न्‍यूनतम वेतन 12,150 रुपये और हाईली स्किल्ड वर्कर्स को 16,494 रुपये मिलता है इसी तरह बिहार के अनस्किल्ड वर्कर्स को 11,128, हाईली स्किल्ड वर्कर्स को 17,160 रुपये मिलता है.इस तरह देखा जाए तो हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों में न्‍यूनतम वेतन 15-18 हजार है जबकि यूपी-बिहार जैसे राज्यों में 11-12 हजार. यही फर्क नोएडा के मजदूरों को चुभ रहा है. वे कह रहे हैं कि हम भी NCR में काम करते हैं, दिल्ली-हरियाणा जितना क्यों नहीं?

EPF और ट्रेनी का क्या कनेक्शन?

वेज कोड के साथ EPF भी जुड़ा है. न्यूनतम वेतन के आधार पर नियोक्ता को 12 प्रतिशत EPF में जमा करना पड़ता है. अगर सैलरी 15,000 तक है तो ये अनिवार्य है. इससे मजदूर को रिटायरमेंट के लिए बचत मिलती है. ट्रेनी को 75 प्रतिशत वेतन, लेकिन अकुशल से कम नहीं मिलेगा. ये सब नियम मजदूरों को लंबे समय का सुरक्षा कवच देते हैं.

नोएडा-एनसीआर में मजदूरों की असल हालत: क्यों हो रहा है विरोध?

नोएडा, ग्रेटर नोएडा, दिल्ली-NCR में फैक्ट्री, निर्माण, सर्विस सेक्टर के मजदूर अक्सर न्यूनतम से भी कम पर काम करते हैं. ओवरटाइम पेमेंट नहीं मिलती.आवास-स्वास्थ्य सुविधाएं जीरो हैं. विदेशी कंपनियां यहां आती हैं तो राज्य-वार नियम समझने में परेशान हो जाती हैं. वेज कोड ने uniformity लाने की कोशिश की, लेकिन अभी भी गैप है. नोएडा के मजदूर हरियाणा का 35 प्रतिशत बढ़ोतरी देखकर सोच रहे हैं हमारा भी हक है. यही वजह है कि यहां का प्रदर्शन इतना बड़ा हो गया.

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