चेस्ट इंफेक्शन के बाद अस्पताल में भर्ती हुईं आशा भोसले, जानें इस उम्र में कैसे रखें अपना ख्याल? Health Updates

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हाल ही में ताजा जानकारी के मुताबिक बॉलीवुड की दिग्गज गायिका आशा भोसले के चेस्ट में इंफेक्शन हुआ है और उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. ऐसे में दिग्गज गायिका Asha Bhosle की तबीयत बिगड़ने और चेस्ट इंफेक्शन की खबर ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बढ़ती उम्र में सेहत का ख्याल रखना कितना जरूरी हो जाता है. 91 साल की उम्र में शरीर पहले जैसा मजबूत नहीं रहता, इम्युनिटी कमजोर हो जाती है और छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी बीमारी का रूप ले सकती है. खासकर छाती और सांस से जुड़ी समस्याएं बुजुर्गों के लिए गंभीर हो सकती हैं. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि चेस्ट इंफेक्शन आखिर होता कैसे है, कितना खतरनाक हो सकता है और इस उम्र में इससे बचाव कैसे किया जा सकता है.

कैसे होता है चेस्ट इंफेक्शन

चेस्ट इंफेक्शन आमतौर पर वायरस, बैक्टीरिया या कभी-कभी फंगल इंफेक्शन की वजह से होता है, जो फेफड़ों और सांस की नलियों को प्रभावित करता है. सर्दी-खांसी को नजरअंदाज करना, ठंडी हवा में ज्यादा रहना, प्रदूषण, धूल या कमजोर इम्युनिटी इसके बड़े कारण होते हैं. बुजुर्गों में यह खतरा इसलिए ज्यादा होता है क्योंकि उनका शरीर संक्रमण से लड़ने में उतना सक्षम नहीं रहता. कई बार साधारण जुकाम भी धीरे-धीरे चेस्ट इंफेक्शन में बदल जाता है.

91 की उम्र में क्यों ज्यादा खतरनाक है चेस्ट इंफेक्शन

91 साल जैसी उम्र में चेस्ट इंफेक्शन को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है. यह निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी में बदल सकता है, जिससे सांस लेने में दिक्कत, ऑक्सीजन लेवल गिरना और अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ सकती है. अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह जानलेवा भी हो सकता है. यही वजह है कि डॉक्टर बुजुर्गों में खांसी, बुखार या सीने में जकड़न जैसे लक्षण दिखते ही तुरंत जांच कराने की सलाह देते हैं.

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बढ़ती उम्र में कैसे रखें चेस्ट का ख्याल

इस उम्र में सबसे जरूरी है सावधानी और नियमित देखभाल. ठंड और धूल से बचाव करना चाहिए, जरूरत पड़ने पर मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए. हल्की एक्सरसाइज और ब्रीदिंग एक्सरसाइज फेफड़ों को मजबूत रखने में मदद करती है. गर्म पानी, सूप और भाप लेना भी फायदेमंद होता है. साथ ही, समय-समय पर डॉक्टर से चेकअप और जरूरी वैक्सीनेशन करवाना बेहद जरूरी है. सबसे अहम बात—खांसी, बुखार या सांस लेने में तकलीफ को कभी नजरअंदाज न करें. ध्यान रहे कि इस उम्र में ठंडी चीजों को खाने और पीने से परहेज ही करें, जिससे गले और चेस्ट में कफ जमा ना हो.

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