Jind News: शहरवासियों को बंदर और कुत्तों से मिलेगी निजात, नगर परिषद ने लगाया टेंडर, 16 को खुलेगी बिड haryanacircle.com

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जींद। शहरवासियों को बंदरों और कुत्तों से अब राहत मिलने की उम्मीद जगी है। नगर परिषद ने इन्हें पकड़ने के लिए नया टेंडर जारी कर दिया है। टेंडर की 16 तारीख को बिड खुलेगी। इसके बाद चयनित एजेंसी को यह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

शहर में बंदरों और कुत्तों को पकड़ने के लिए नगर परिषद ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब जल्द ही टेंडर मिलने के बाद बंदर और कुत्ते पकड़ने का काम शुरू हो जाएगा। शहर में पिछले काफी समय से बंदरों और आवारा कुत्तों का आतंक बना हुआ है। बंदर जहां घरों में घुसकर खाने-पीने का सामान उठा ले जाते हैं, वहीं कुत्तों के झुंड राहगीरों पर हमला करने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।

कई लोग इन घटनाओं में घायल भी हुए हैं जिसके चलते नगर परिषद पर लगातार कार्रवाई का दबाव बन रहा था। हालांकि पिछले साल बंदरों को पकड़ने के अभियान में भारी अनियमितताएं सामने आई थी। करीब छह हजार बंदरों को पकड़ने के नाम पर लगभग एक करोड़ रुपये खर्च किए गए लेकिन इसके बावजूद शहर में बंदरों की संख्या में कोई खास कमी नहीं आई थी। इस मामले को लेकर लोगों ने परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।

बंदर पकड़ने के मामले की चल रही विजिलेंस जांच

पिछले साल नगर परिषद के अधीन शहरी क्षेत्र में बंदर पकड़ने के मामले की जांच अब विजिलेंस कर रही है। डिप्टी स्पीकर डॉ. कृष्ण मिड्ढा ने बंदर पकड़ने के मामले की जांच के लिए चीफ सेक्रेटरी को पत्र लिखा था। संज्ञान लेते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो के एडीजीपी ने जांच के आदेश जारी किए थे। मामले में आरोप लगे थे कि बंदर पकड़ने में एक करोड़ रुपये के करीब गड़बड़ी की गई है। शहर में बंदरों को पकड़ने के लिए नगर परिषद ने प्रति बंदर 1700 रुपए का भुगतान किया था। नगर परिषद ने शहर से छह हजार बंदरों को पकड़ने का दावा किया गया था लेकिन इतने बंदर पकड़ने के बाद भी शहरवासियों को राहत नहीं मिल पाई थी।

फरवरी माह में कुत्ते मारकर फेंकने का आया था मामला सामने

नगर परिषद ने करीब दो वर्ष पहले नैन फाउंडेशन को बधियाकरण का ठेका दिया था। प्रत्येक कुत्ते पर लगभग 1170 रुपये खर्च निर्धारित था। आरोप था कि एजेंसी की लापरवाही के कारण 100 से ज्यादा कुत्तों की मौत हो गई थी। कुत्तों को भोजन भी नाममात्र दिया गया था। शेल्टर होम में तकरीबन 200 कुत्ते थे जो भूख के कारण मर रहे थे। इसके बाद नगर परिषद ने नैन फाउंडेशन का ठेका रद्द कर दिया था।

वर्जन

कुत्तों और बंदरों को पकड़ने के लिए टेंडर निकाला गया है। इसको लेकर 16 अप्रैल को बिड खोली जाएगी। टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखी जाएगी। चयनित एजेंसी पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता न हो। -ऋषिकेश चौधरी, ईओ, नगर परिषद जींद

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