[ad_1]
स्मार्टफोन यूजर्स के लिए बैटरी हमेशा सबसे बड़ी चिंता रही है। रोज चार्ज करना एक आदत बन चुकी है। लेकिन अब यह स्थिति बदल रही है। कंपनियां एक नई बैटरी टेक्नोलॉजी पर काम कर रही हैं, जो बिना फोन का साइज बढ़ाए ज्यादा बैटरी देने का वादा करती है। इस टेक्नोलॉजी को सिलिकॉन-कार्बन बैटरी कहा जाता है। यह नए स्मार्टफोन्स में आ रही है। हाल ही में वनप्लस के नॉर्ड-6 में पहली बार 9 हजार mAH बैटरी दी गई है। सैमसंग ने भी पुष्टि की है कि उसके आने वाले स्मार्टफोन में सिलिकॉन बैटरी लाने की योजना है।
कैसे अलग है यह बैटरी? लिथियम-आयन बैटरी में ग्रेफाइट का इस्तेमाल होता है, जहां लिथियम आयन मूव करते हैं और बिजली पैदा होती है। सिलिकॉन-कार्बन बैटरी में ग्रेफाइट की जगह सिलिकॉन का इस्तेमाल होता है। सिलिकॉन ग्रेफाइट के मुकाबले कई गुना ज्यादा लिथियम आयन स्टोर कर सकता है। इसे आसान भाषा में समझें तो जैसे एक कमरे में ज्यादा लोगों को जगह मिल जाए, वैसे ही इस बैटरी में ज्यादा ऊर्जा स्टोर हो सकती है। यूजर्स को ये तीन फायदे – इस टेक्नोलॉजी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि फोन का साइज बढ़ाए बिना बैटरी क्षमता बढ़ाई जा सकती है। यानी जहां पहले 5,000mAh की बैटरी मिलती थी, अब उसी साइज में 6,500mAh या उससे ज्यादा बैटरी दी जा रही है। – नई तकनीक से कंपनियाें के पास विकल्प है। वे दो तरीकेअपना सकती हैं या तो ज्यादा बैटरी देकर फोन का बैकअप बढ़ाएं या फिर वही बैटरी रखकर फोन को और पतला और हल्का बनाएं। – यह बैटरियां अलग-अलग मौसम में भी बेहतर काम करती हैं। ठंड या ज्यादा गर्मी में भी इनकी परफॉर्मेंस ज्यादा स्थिर रहती है। फोन गर्म होने पर चार्जिंग स्पीड पर कम असर पड़ता है।
वनप्लस-ओपो ने अपनाया वनप्लस 15 7,300mAh
वनप्लस नॉर्ड 6 9,000mAh
रियलमी P4 पावर 10,001mAh
शाओमी 17 प्रो मैक्स 7,500mAh
ओपो फाइंड X9 प्रो 7,500mAh एपल-गूगल में कब आएगी? कुछ रिपोर्ट के अनुसार एपल-सैमसंग दोनों इस तकनीक पर काम कर रहे हैं। सैमसंग ने कार्बन सिलिकॉन बैटरी टेस्ट भी की है। वहीं, एपल अभी इस तकनीक पर काम करने से बच रहा है।
[ad_2]
फोन में बड़ी बैटरी का ट्रेंड: नए स्मार्टफोन में सिलिकॉन कार्बन बैटरी का इस्तेमाल; वनप्लस-ओपो ने अपनाया, सैमसंग भी रेस में



पोस्ट के बाद भी बदल सकते हैं कमेंट! Instagram का नया फीचर यूजर्स को देगा पूरा कंट्रोल, जानिए तर Today Tech News