हरियाणा सरकार से खफा हुए किसान, शिमला जाने वाला हाईवे किया जाम Haryana News & Updates

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चंडीगढ़: हरियाणा में एक बार किसानों ने सड़कों को जाम करने का फैसला ले लिया है. किसान संगठनों ने संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले आज यानी 11 अप्रैल को बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी दी थी. साथ ही प्रदेश के हर जिले में एक नेशनल हाईवे जाम करने का ऐलान किया था. अब इसका असर दिखने लगा है. किसानों ने धरना शुरू कर शिमला जाने वाला स्टेट हाईवे पर जाम लगा दिया है. विरोध प्रदर्शन से जुड़ा हर एक अपडेट जानने के लिए पढ़ते रहिए न्यूज18 की यह लाइव कॉपी…

राजनीतिक संगठन भी दे रहे साथ

किसानों का साथ अबकी बार राजनीतिक संगठन भी दे रहे हैं. आज सोनीपत से गुजरने वाले और गोहाना जींद को जोड़ने वाले स्टेट हाईवे पर गांव रतनगढ़ के पास संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसानों ने अपना विरोध जताया और स्टेट हाईवे को जाम कर दिया. इस दौरान किसानों के इस विरोध प्रदर्शन को देखते हुए सोनीपत पुलिस के आला अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर तैनात रहे ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके.

हमारे बच्चों को हमारे सामने ही…

किसानों ने कहा कि जब सरकार किसानों से डरती है तो पुलिस को आगे करती है. यह भी हमारे बच्चे हैं इसलिए हमारे सामने हमारे ही बच्चों को लाकर सरकार खड़ा कर रही है. सरकार किसानों को जानबूझकर परेशान कर रही है. बायोमेट्रिक और ट्रैक्टर ट्राली का नंबर हर किसान के लिए दे पाना संभव नहीं है. किसान वैसे तो एसपी पर फसल खरीदने का दावा कर रही है, लेकिन किसानों को बेवजह दुखी किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि हमने सरकार को काफी बार इस मामले में चिट्ठी भी लिखी है. सरकार की तरफ से कोई भी सकारात्मक बातचीत का न्योता नहीं दिया गया है और आज हमने अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए सोनीपत गोहाना जींद स्टेट हाईवे पर जाम लगाया है. अगर सरकार ने हमारी मांगे नहीं मानी तो सरकार के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा.

हर पांचवें महीने होता है टकराव

हरियाणा में किसान और सरकार के बीच टकराव की स्थिति हर 5 महीने में देखने को मिल जाती है. इस बार तो हरियाणा सरकार के खिलाफ किसानों का हल्ला बोल यह दर्शा रहा है कि एक बार फिर सरकार के समक्ष एक बड़ा आंदोलन करने की तैयारी में लगे हुए हैं और संयुक्त किसान मोर्चा व अन्य संगठन अलग-अलग तरीके से सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए नजर आ रहे हैं.

सोनीपत गोहाना जींद स्टेट हाईवे पर किसानों के इस प्रदर्शन को देखते हुए भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है. पुलिस के आला अधिकारी किसानों को समझने में लगे हुए हैं. वहीं किसान भी सरकार और पुलिस के सामने डटे हुए हैं. किसानों का कहना है कि हम 3:00 बजे तक यह जाम रखेंगे. अगर सरकार ने हमारी बातें और हमारी मांगे नहीं मानी तो आगामी आंदोलन बड़ा होगा.

हाईवे पर लंबी लाइन

फसल खरीद की मांग को लेकर किसानों ने सिरसा-दिल्ली रोड पर मय्यड़ टोल प्लाजा पर जाम लगा दिया है. इससे हाईवे पर वाहनों की लंबी लाइनें लग गई हैं.

यह है मामला
किसान रबी के सीजन में फसलों की खरीब के नए नियमों का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि सरकार ने मनमर्जी से नए नियम लागू कर दिए हैं. अधिकारी धान खरीद में गड़बड़ी कर रहे हैं, लेकिन उसका बोझ किसानों पर डाल दिया गया. साथ ह किसानों का सबसे बड़ा विरोध सरकार द्वारा शुरू की गई बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली को लेकर है. उनका कहना है कि यह प्रक्रिया तकनीकी रूप से जटिल है और अक्सर काम नहीं करती. इसके कारण मंडियों में फसल बेचने में कई‑कई दिनों की देरी हो रही है. किसानों का आरोप है कि बायोमेट्रिक सिस्टम के कारण गेट पास जारी नहीं हो पा रहे और उन्हें मंडियों के बाहर घंटों इंतजार करना पड़ रहा है. नए नियमों को वापस लेने के लिए किसान संगठनों ने सरकार को 10 अप्रैल तक का समय दिया था, लेकिन अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया, जिसके बाद संगठनों ने प्रदर्शन करने का फैसला लिया है. किसानों ने सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक मंडियों में तौल बंद करने का भी फैसला लिया है.

सोनीपत से लेकर पंचकूला तक प्रदर्शन
सोनीपत के रतनगढ़ गांव के पास सोनीपत-गोहना हाईवे पर किसानों ने धरना शुरू किया. संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर स्टेट हाईवे पर लगाया जाम. बता दें, संयुक्त किसान मोर्चा के बुलावे पर नेशनल हाईवे को सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक जाम करने के लिए किसान जमा हुए हैं. वहीं, यमुनानगर में भी किसानों ने रोड जाम कर दिया है. जिला सचिवालय के बाहर सड़क पर किसान बैठ गए हैं और बायोमेट्रिक प्रणाली को तुरंत प्रभाव से बंद करने की मांग कर रहे हैं. इधर, संयुक्त किसान मोर्चा के आवाहन पर पंचकूला के कालका में स्टेट हाईवे पर भी जाम लगाया गया है. 11 से 3 बजे तक करेंगे ये लोग जमकर विरोध जताएंगे.

किसान और आढ़ती दोनों उलझन में
किसान ट्रैक्टर‑ट्रॉलियों पर अनिवार्य नंबर प्लेट और अन्य वाहन ट्रैकिंग नियमों को भी परेशान करने वाला बता रहे हैं. उनका कहना है कि इन नियमों के कारण किसान और आढ़ती दोनों उलझन में हैं. कई पुराने या नए ट्रॉलियों के पास स्पष्ट नंबर न होने से गेट पास में दिक्कत आ रही है, जिससे फसल की ढुलाई प्रभावित हो रही है. आरोप है कि ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल ठीक से काम नहीं कर रहा. कई किसानों का पोर्टल पर पंजीकरण ही नहीं हो पाया है, जबकि कुछ का डेटा गलत दिख रहा है. किसानों का कहना है कि बिना पोर्टल रजिस्ट्रेशन के सरकारी एजेंसियां फसल खरीद नहीं कर रहीं, जिससे उन्हें निजी व्यापारियों पर निर्भर होना पड़ रहा है.

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