पंचकूला SC वार्डबंदी में सरकार की रिव्यू पिटीशन पर फैसला: हाईकोर्ट के आदेश- नई अधिसूचना पर कोई आपत्ति नहीं, FIDR डेटा पर उठे सवाल – Panchkula News Chandigarh News Updates

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हरियाणा नगर निगम चुनाव को लेकर SC वार्ड रिजर्व की संख्या पर हाईकोर्ट के अधिसूचना रद्द करने वाले फैसले के खिलाफ हरियाणा सरकार ने रिव्यू पिटीशन दायर की। रिव्यू पिटीशन पर सुनवाई करते हुए शुक्रवार को हाईकोर्ट ने आदेश जारी किया कि नई अधिसूचना हरियाणा सरकार जारी कर सकती है। वहीं EVM के साथ VVPAT जोड़ने की याचिका पर 20 अप्रैल को सुनवाई होगी। हाईकोर्ट से नया आदेश मिलते ही शहरी स्थानीय निकाय ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। शुक्रवार देर रात या फिर सोमवार को नई अधिसूचना जारी हो सकती है। उसके बाद स्थिति स्पष्ट होगी कि सरकार इस बार वार्ड की संख्या को 3 ही रखती है या फिर जनगणना के आंकड़ों अनुसार नया फैसला आएगा। हालांकि जिस प्रकार से हरियाणा सरकार रिव्यू में गई है, उससे मंशा जाहिर हो रही है कि सरकार फिर से एससी वार्डों को रिजर्व करने करने की संख्या 3 ही रख सकती है। अब जानिए कोर्ट में दोनों पक्षों के तर्क… कांग्रेस ने कोर्ट में दिया यह तर्क : कांग्रेस नेता एडवोकेट रविंद्र रावल ने बताया कि उषा रानी और अन्य याचिकाकर्ताओं ने 4 सितंबर, 2025 की अधिसूचना के खिलाफ रिट याचिका दायर की थी। इसमें मुख्य तर्क दिए गए थे कि पिछले चुनाव में पंचकूला के 20 वार्डों में से 4 सीटें अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित थी, इस बार इन्हें घटाकर 3 कर दिया गया। सीटों की संख्या में यह बदलाव 2011 की जनगणना के बजाय फैमिली इंफॉर्मेशन डेटा रिपॉजिटरी (FIDR) के ‘ऑन-द-स्पॉट’ सर्वे के आधार पर किया गया है। याचिका में कहा गया था कि FIDR एक स्वैच्छिक योजना है जिसे जनगणना के विकल्प के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। जनगणना के अनुसार पंचकूला में SC जनसंख्या 18.1% थी, जिससे सीटों की संख्या 3.62 यानी 4 बनती है। सरकार का दावा-बनती हैं SC की 3 सीटें: हरियाणा सरकार के महाधिवक्ता (AG) ने सरकार की तरफ से तर्क दिया कि पंचकूला नगर निगम की सीमाओं में बदलाव किया गया है, जिससे कालका और पिंजौर क्षेत्रों को बाहर कर दिया गया। हरियाणा नगर निगम अधिनियम की धारा 6 और परिसीमन नियमों में 2023 में संशोधन किया गया था। इसके तहत सीटों का निर्धारण FIDR डेटा के आधार पर करने का प्रावधान जोड़ा गया है। सरकार के अनुसार, 2011 की जनगणना के आधार पर मौजूदा सीमाओं के भीतर SC जनसंख्या केवल 15.51% (41,467) है, जिससे आरक्षित सीटों की संख्या 3.10 यानी 3 बनती है। गहन विश्लेषण के बाद यह आया फैसला : कोर्ट ने संविधान और राज्य के कानूनों के बीच टकराव पर गौर किया कि संविधान का अनुच्छेद 243P(g) और 243T स्पष्ट करते हैं कि “जनसंख्या” का अर्थ पिछली प्रकाशित जनगणना के आंकड़े ही हैं। कोर्ट ने नोट किया कि राज्य एक तरफ कुल सीटों के लिए जनगणना की बात कर रहा है, लेकिन SC आरक्षण को कम करने के लिए केवल 2011 के पुराने आंकड़ों या FIDR का सहारा ले रहा है। न्यायालय ने कहा कि हरियाणा परिवार पहचान अधिनियम, 2021 का उपयोग अनुसूचित जाति की जनसंख्या निर्धारित करने के लिए नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह संवैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन है। कोर्ट ने फैसले में लिखा कि पंचकूला नगर निगम से संबंधित 4 सितंबर, 2025 की अधिसूचना और उससे जुड़ी अनुसूची को रद्द कर दिया गया है।

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