जेल से बाहर आया रामपाल: 11 साल पांच महीने हिसार जेल में काटे, लेने पहुंचा परिवार, डिफेंडर से सोनीपत रवाना Latest Haryana News

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सतलोक आश्रम संचालक रामपाल को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद शुक्रवार को जेल से बाहर आ गया। रापमाल के परिवार के लोग उनको लेने के लिए हिसार जेल परिसर पहुंचे थे। सफेद रंग की डिफेंडर गाड़ी में सवार होकर रामपाल हिसार से सोनीपत के धनाना के लिए रवाना हुए। पुलिस ने व्यवस्था बनाए रखने जेल परिसर के सामने बैरिकेडिंग की थी। उनके वकील सचिन दास ने हिसार जेल में दोपहर के समय एक एक लाख रुपये के जेल बांड भरे थे। शाम 5 बजकर 5 मिनट पर रामपाल जेल से बाहर आया।

12 जुलाई 2006 को रोहतक के करोंथा गांव स्थित उनके आश्रम में विरोध के दौरान हिंसा हुई थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। इसके बाद पुलिस ने उन्हें आश्रम से बाहर कर दिया, हत्या का मामला दर्ज किया। करीब 22 महीने जेल में रहे। अप्रैल 2008 में जमानत मिलने के बाद हिसार के बरवाला में शिफ्ट हो गए। हिसार अदालत में ही उनके मामले की सुनवाई होने लगी थी। वर्ष 2014 में उनको हिसार की अदालत में पेश होना था। इस दौरान उनके समर्थकों का अदालत परिसर के अंदर रास्ता रोकने को लेकर वकीलों के साथ टकराव हो गया। 

इस मामले में वकीलों ने हाईकोर्ट में याचिका डाली। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने रामपाल को हाईकोर्ट में पेश होने के आदेश दिए। आदेश के बाद रामपाल पेश नहीं हुए तो हाईकोर्ट ने हरियाणा पुलिस को उनको गिरफ्तार कर पेश करने के आदेश दिए। पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए रामपाल ने आश्रम के चारों ओर मानव श्रृंखला बनवा दी। रामपाल समर्थक आश्रम के चारों ओर बैठ गए। यहां से पुलिस के साथ टकराव शुरू होने लगा। नवंबर माह में करीब 10 दिन तक आश्रम के बाहर हरियाणा पुलिस डटी रही। मौके पर भारी संख्या में फायर ब्रिगेड, कमांडो ,एंबुलेंस तैनात किए गए थे। पुलिस प्रशासन ने बातचीत के लिए कई अवसर दिए लेकिन सहमति नहीं बनी। करीब 10 दिन बाद पुलिस ने आश्रम के अंदर प्रदेश करने की कोशिश की तो टकराव हुआ। इस दौरान आश्रम के अंदर छह लोगों की मौत हो गई थी। जिसके बाद 19 नवंबर 2014 को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। उनकी गिरफ्तारी के बाद आश्रम से हजारों लोगों को आश्रम से बाहर निकाला गया था। 

इंजीनियर से संत बनने तक रामपाल का सफर 

78 वर्षीय संत रामपाल मूल रूप से सोनीपत जिले के धनाना गांव के निवासी है। हरियाणा सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। धार्मिक कारण के चलते उन्होंने नौकरी छोड़ दी। वर्ष 1995 में रोहतक जिले के करोंथा गांव में सतलोक आश्रम की स्थापना कर ‘नामदान’ देना शुरू किया। कबीर पंथी संप्रदाय के प्रमुख बनकर उभरे। 

विवादों में रहा रामपाल

रामपाल अक्सर आर्य समाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के कारण विवादों में रहे। रोहतक के करोंथा आश्रम में आर्य समाजियों के साथ उनके समर्थकों का टकराव हुआ था। हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और नेपाल तक उनके अनुयायी हैं। 

पांच महिलाओं और एक बच्चे की हुई थी मौत

14 दिन चला गतिरोध, पुलिस कार्रवाई में गईं छह जानें बाद में उन्होंने कोर्ट में पेश होने से इनकार कर दिया, जिसके चलते उनकी जमानत रद्द हो गई और अवमानना की कार्यवाही शुरू हुई। नवंबर 2014 में बरवाला स्थित सतलोक आश्रम में 14 दिन तक गतिरोध बना रहा, जहां वे हजारों अनुयायियों, महिलाओं, बच्चों और निजी सुरक्षा घेरे के साथ छिपे रहे। 5 नवंबर 2014 को हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए थे। 18 नवंबर को पुलिस ने आश्रम में घुसकर कार्रवाई की, जिसमें पांच महिलाओं और एक बच्चे की मौत हो गई। पुलिस ने करीब 900 अनुयायियों को गिरफ्तार किया था। हत्या व देशद्रोह सहित 14 एफआईआर 20 नवंबर 2014 को बरवाला थाना में रामपाल और उनके अनुयायियों के खिलाफ हत्या, देशद्रोह सहित अन्य धाराओं में पांच एफआईआर (नंबर 426, 427, 428, 429 और 430) दर्ज की गई थीं। एफआईआर नंबर 429 और 430 में उन्हें हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, जिसे हाईकोर्ट ने स्थगित कर दिया है। एफआईआर नंबर 426 और 427 में उन्हें हाईकोर्ट से बरी किया जा चुका है। एफआईआर नंबर 428 (देशद्रोह) में उन्हें फिलहाल जमानत मिली है। कुल 14 में से 11 केस में रिहा हो चुके हैं। 

देशभर में करीब 15 आश्रम

देशभर में आश्रम और अनुयायी रामपाल के देशभर में करीब 15 आश्रम हैं। जिनमें से पांच हरियाणा में स्थित हैं। इनमें भिवानी, जींद के धनाना, रोहतक के करोंथा, हिसार के बरवाला स्थित आश्रम मुख्य हैं। बरवाला स्थित आश्रम अभी कोर्ट केस में अटैच संपति है। पुलिस की गार्द 11 साल से इसकी निगरानी कर रही है। 

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