एन. रघुरामन का कॉलम: मॉर्निंग वॉक को प्रेरणा पाने की जगह बनाएं Politics & News

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यदि आप हैदराबाद के कोंडापुर में हाईटेक सिटी के पास गाचीबौली रोड पर चल रहे हैं तो दाईं ओर आपको ‘कोटला विजय भास्कर रेड्डी बॉटनिकल गार्डन’ दिखेगा। मेरे और आपके जैसे बाहरी लोगों को यह अपने शहर के किसी खूबसूरत गार्डन जैसा ही लगता है, जहां लोग मॉर्निंग वॉक के लिए आते हैं। लेकिन उन मॉर्निंग वॉक्स और यहां की वीकेंड मॉर्निंग वॉक में फर्क है। यहां लोग एंट्रेंस गेट पर छोटे समूहों में इकट्ठा होते हैं। कुछ रनिंग शूज में तो दूसरे बैकपैक के साथ आते हैं। किसी भी अन्य जगह की तरह ही मुस्करा कर या हाथ मिला कर एक-दूसरे का स्वागत करते हैं, लेकिन एक छोटा-सा फर्क है। कुछ ही मिनटों में भीड़ बढ़ जाती है और वहां फाउंडर्स, मार्केटिंग प्रोफेशनल्स, टेक्नोलॉजी के शौकीन, आंत्रप्रेन्योर्स और मेंटर्स आसानी से देखे जा सकते हैं, जो समाज को कुछ वापस लौटाना चाहते हैं।
फिर वॉक शुरू होने से पहले कुछ अलग होता है। लोग एक-दूसरे की उम्र और लुक्स के आधार पर नहीं, बल्कि जरूरतों के आधार पर जोड़ी बनाते हैं और पार्क के 3.5 किमी. लंबे सर्कुलर ट्रैक पर वॉक शुरू करते हैं, जहां फिटनेस के साथ आंत्रप्रेन्योरशिप पर भी बातें होती हैं। कोई प्रोडक्ट आइडिया पर चर्चा करता है, कोई अपने स्टार्टअप की स्टेज समझाता है तो बहुत-से लोग गाइडेंस मांगते हैं। कॉन्सेप्ट बहुत सीधा है- साथ चलो, आइडिया पर बात करो और साथ में आगे बढ़ो। जूनियर्स सवाल पूछते हैं, सीनियर्स जवाब देते हैं और नॉलेज ट्रांसफर होता है। कई लोग खुलकर कहते हैं कि उन्हें क्या चाहिए। मसलन, इन्वेस्टर्स, को-फाउंडर्स, पार्टनर्स या शुरुआती यूजर्स। कुछ लोग वैलिडेशन चाहते हैं, तो कुछ ईमानदारी भरा फीडबैक। अकसर साथ चल रहे लोग, मेंटर्स और आयोजक तत्काल सुझाव भी देते हैं। हर शनिवार, रविवार सुबह 6.30 से 8.30 बजे तक हैदराबाद के कई युवाओं के लिए यह सिर्फ फिट रहने का जरिया नहीं, बल्कि बिजनेस, प्रोडक्ट और स्टार्टअप की चुनौतियों पर चर्चा का अवसर होता है। पार्क में 3500 कदम चलने के बाद अब अधिक संरचित चर्चा शुरू होती है। लोग एंट्रेंस के पास ग्राउंड जीरो पर लौटते हैं। फाउंडर्स ग्रुप के सामने आइडिया रखते हैं। कभी शुरुआती कॉन्सेप्ट, तो कभी विकसित हो रहे उत्पादों के बारे में बताते हैं। इन्वेस्टर्स इसमें अवसर देखते हैं और वर्किंग-डे पर मिलने को कहते हैं। अपॉइंटमेंट्स तय होते हैं और प्लान तैयार होता है। आयोजक जानते हैं कि किसी भी स्टार्टअप के लिए शुरुआत सबसे मुश्किल चरण होता है। अगर यह शुरुआत गार्डन जैसे किसी अनौपचारिक सेटअप में हो जाए तो आइडिया सामने आते ही बिजनेस को आगे बढ़ाना आसान हो जाता है। आयोजकों का दावा है कि ‘फिटनेस और आंत्रप्रेन्योरशिप को साथ लाने के लिए पार्क सबसे सही जगह हैं।’ हर रविवार यहां फाउंडर, इन्वेस्टर या इंडस्ट्री विशेषज्ञ जैसा कोई गेस्ट स्पीकर भी आता है और आंत्रप्रेन्योरशिप, लीडरशिप और ग्रोथ के बारे में बताता है। कई लोगों के लिए यह पूरी तरह मूल्यों और नॉलेज का आदान-प्रदान है। कुछ मानते हैं कि नियमित लोगों से मिलते रहने पर क्या पता किसी दिन कोई साझेदार या ग्राहक मिल जाए। दिलचस्प यह है कि इस मीट में अब दूसरे शहरों के लोग भी आने लगे हैं। इस पहल के पीछे रहे व्यक्ति चेनप्पा नायडू का मानना है कि उद्यम संबंधी नॉलेज को मुफ्त में अधिक सुगम बनाने के लिए यही उनका योगदान है। क्योंकि बहुत से लोग कुछ शुरू करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें समझ नहीं आता कि शुरुआत कहां से करें। फंडा यह है कि जल्दी उठें, बातचीत के लिए इकट्‌ठा हों और आइडिया शेयर करें। कौन जानता है गार्डन के ब्लॉक्स पर चलते हुए आपका स्टार्टअप आइडिया बूटस्ट्रैप (बिना किसी बाहरी फंडिंग के अपने पैसों से शुरू उद्यम) से निकलकर भावी पीढ़ी की टी-शर्ट का स्लोगन बन जाए।

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एन. रघुरामन का कॉलम: मॉर्निंग वॉक को प्रेरणा पाने की जगह बनाएं