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चंडीगढ़। औद्योगिक क्षेत्रों (फेज-1 और 2) के उद्यमी इन दिनों एक बड़े प्रशासनिक सुधार की उम्मीद लगाए बैठे हैं। वर्षों से जटिल नियमों और इंस्पेक्टर राज से जूझ रहे कारोबारी मानते हैं कि प्रस्तावित ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट ही उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान बन सकता है। उनका कहना है कि पंजाब और हरियाणा के मुकाबले चंडीगढ़ में व्यापार करना अब भी कठिन बना हुआ है।
उद्यमियों के अनुसार यदि प्रशासन इस एक्ट को लागू करता है तो बिजनेस इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव आएगा। फिलहाल फायर, लेबर, पॉल्यूशन और बिल्डिंग प्लान जैसी स्वीकृतियों के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। एक्ट के तहत एक डिजिटल पोर्टल के माध्यम से सभी मंजूरियां एक ही स्थान पर मिल सकेंगी।
उद्यमी जरनैल सिंह के मुताबिक, तय समय में फाइल क्लियर न होने पर उसे स्वत: मंजूर मानने का प्रावधान बाबूशाही पर अंकुश लगाएगा। साथ ही सेल्फ-डिक्लेरेशन की व्यवस्था से बार-बार होने वाली जांच और भ्रष्टाचार की संभावना भी कम होगी।
उद्यमियों की पुरानी मांग लीजहोल्ड संपत्तियों को फ्रीहोल्ड करने की भी है। इससे बैंकों से ऋण लेना और संपत्ति का हस्तांतरण आसान होगा। छोटे कारोबारियों को फिलहाल जटिल कागजी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है, जिसे यह एक्ट सरल बना सकता है।
लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष अवि भसीन ने बताया कि कई एमएसएमई इकाइयां अब मोहाली और पंचकूला की ओर रुख कर रही हैं। व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजीव चड्ढा ने कहा कि चंडीगढ़ को अब कागजी नहीं, जमीन पर बिजनेस फ्रेंडली नीति की जरूरत है, जिससे नए निवेश आकर्षित हो सकें।
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Chandigarh News: इंस्पेक्टर राज से आजादी की आस, कारोबारियों की नजर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट एक्ट पर

