फेफड़ों में क्यों फैलता है ब्रेस्ट कैंसर? रिसर्च में हुआ ट्यूमर के ‘सपोर्ट सिस्टम’ का खुलासा Health Updates

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Why Breast Cancer Spreads To Lungs: महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर भारत और दुनिया भर में कैंसर से होने वाली मौतों और मामलों में टॉप पर है.  जब ब्रेस्ट कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल जाता है, तो यह और ज्यादा खतरनाक हो जाता है. फेफड़े उन अंगों में शामिल हैं, जहां यह कैंसर सबसे ज्यादा फैलता है. लंबे समय से डॉक्टर जानते हैं कि फेफड़ों में पहुंचने के बाद कैंसर का इलाज मुश्किल हो जाता है, लेकिन अब तक यह पूरी तरह साफ नहीं था कि वहां ट्यूमर इतनी तेजी से क्यों बढ़ते हैं.

क्या निकला रिसर्च में?

हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो कैंसर सेंटर के रिसर्च ने इस पर एक अहम खोज की है. कैंसर रिसर्च कम्युनिटी में प्रकाशित इस स्टडी के मुताबिक, ब्रेस्ट कैंसर की सेल्स लंग्स के प्राकृतिक रिपेयर सिस्टम का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करने लगती हैं. दरअसल, फेफड़ों में एक खास क्षमता होती है कि वे खुद को जल्दी ठीक कर सकें. जब एयर सैक्स यानी एल्वियोलाई को नुकसान पहुंचता है, तो शरीर तुरंत उसे रिपेयर करने की प्रक्रिया शुरू कर देता है. यह प्रक्रिया सांस लेने और लंग्स को स्वस्थ रखने के लिए बेहद जरूरी होती है.

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क्यों आसानी से फैलता है ट्यूमर?

लेकिन जब कैंसर सेल्स लंग्स में पहुंचती हैं, तो वे इस हीलिंग सिस्टम को बाधित कर देती हैं. सामान्य तौर पर जो प्रक्रिया कुछ समय के लिए चलती है, वह कैंसर की मौजूदगी में लगातार सक्रिय रहती है. इससे सूजन बनी रहती है और ऐसा माहौल तैयार होता है, जिसमें ट्यूमर आसानी से बढ़ने लगते हैं. रिसर्च में यह भी सामने आया कि एल्वियोलर टाइप-2 सेल्स इस पूरी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाती हैं. ये सेल्स आमतौर पर फेफड़ों की मरम्मत में मदद करती हैं, लेकिन कैंसर की मौजूदगी में ये ऐसे सिग्नल छोड़ने लगती हैं, जो ट्यूमर को बढ़ावा देते हैं. वहीं कैंसर सेल्स भी इनसे संपर्क बनाए रखती हैं, जिससे यह चक्र लगातार चलता रहता है.

क्या है बचने का उपाय?

इस समस्या के समाधान के लिए वैज्ञानिकों ने एक दवा रोफ्लुमिलास्ट का परीक्षण किया, जो पहले से ही क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज के इलाज में इस्तेमाल होती है. प्रयोगों में पाया गया कि यह दवा फेफड़ों में ट्यूमर की वृद्धि को धीमा कर सकती है, क्योंकि यह कैंसर के लिए अनुकूल माहौल को बदल देती है. यह तरीका पारंपरिक इलाज से अलग है, जहां सीधे कैंसर सेल्स को खत्म करने की कोशिश की जाती है. यहां फोकस उस सपोर्ट सिस्टम को रोकने पर है, जो कैंसर को बढ़ने में मदद करता है. फिलहाल यह रिसर्च शुरुआती चरण में है और इसे इंसानों पर लागू करने के लिए और टेस्ट जरूरी हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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