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मैं एक वॉट्सएप ग्रुप का हिस्सा हूं, जिसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुछ छात्रों को मार्गदर्शन मिलता है। मेरा काम दुनिया की दिलचस्प हलचलों और वैश्विक समाचारों को साझा करना और उनकी पोस्ट पर नजर रखना है। यानी मैं निरीक्षक जैसा हूं। जब छात्र ग्रुप में पोस्ट करते, तो उम्र के हिसाब से उनकी अंग्रेजी कुछ ज्यादा ही अच्छी लगती थी। मतलब उनके मैसेज में ऐसे शब्द भी थे, जो वे रोजमर्रा में इस्तेमाल नहीं करते होंगे। लेकिन जब मैंने उनसे बात की, तो पाया कि उनकी छवि ग्रुप से कुछ अलग थी, खासकर तब, जब वे मेरे सामने खड़े होकर गहराई से खुद को व्यक्त करते थे। मुझे हैरानी होती थी कि कैसे उनकी पोस्ट के शब्द, खूबसूरती से पिरोई गई माला जैसे लगते थे, लेकिन जैसे ही वे मुंह खोलकर राय देते, वे शब्द थोक बाजार के अस्त-व्यस्त फूलों जैसे लगने लगते। मैंने ईरान-अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध पर उनके मौलिक विचार लिखने के लिए छोटा-सा टेस्ट लिया। कई लोगों ने एआई की मदद ली और ऐसी बातें कहीं, जो आमतौर पर राजनयिक कहते हैं, न कि छात्र। जब मैंने उन्हें मौलिक विचार लिखने कहा, तो उन्होंने जोर दिया कि वे शब्द उनके ही हैं। मैं दबाव डालकर उन्हें हतोत्साहित करना नहीं चाहता था। इस अंतर की ओर मेरा ध्यान कुछ कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया में हुए हालिया बदलावों के कारण गया, जिनके एचआर हेड को मैं जानता हूं। उन्होंने कहा कि बहुत से आवेदक अपना सीवी और एप्लिकेशन लिखने के लिए भी एआई इस्तेमाल कर रहे हैं। दिलचस्प यह है कि जो शब्द उन्होंने कागजी आवेदन में बार-बार इस्तेमाल किए, व्यक्तिगत साक्षात्कार में वे शब्द कभी नहीं बोले। इससे उम्मीदवार पर संदेह हुआ। वे सीवी में तो प्रभावित करते हैं, लेकिन अकसर व्यक्तिगत साक्षात्कार में, आत्मविश्वास की कमी के कारण सीवी से उलट छवि दिखती है। चूंकि नियोक्ताओं को सैकड़ों आवेदनों में से कमजोर सीवी छांटने में परेशानी हो रही है, इसलिए उन्होंने पहले ही इंटरव्यू में फेस-टु-फेस मिलना शुरू कर दिया है। लॉरियल, अर्न्स्ट एंड यंग, वर्जिन ग्रुप, बोस्टन कंसल्टिंग और दुनिया की सबसे बड़ी अकाउंटिंग संस्था एसीसीए जैसी कंपनियों ने ऑनलाइन परीक्षाएं बंद कर दी हैं। अब वे असल आवेदक को सुनना चाहते हैं कि वे कैसे सोचते हैं, निर्णय लेते हैं और टकराव संभालते हैं। वे ऐसे सवाल पूछते हैं, जिनसे एआई द्वारा सिखाए गए रटे-रटाए जवाब पहचाने जा सकें। वे दिन गए जब उम्मीदवार कवर लेटर या पर्पज लेटर के आधार पर शॉर्टलिस्ट होते थे। अब बड़ी कंपनियां नौकरी या प्रवेश देने से पहले व्यक्तिगत मुलाकात जरूर करती हैं। वर्जिन ग्रुप जैसी कुछ कंपनियां उम्मीदवारों को विज़ी जैसे टूल का इस्तेमाल करने को कह रही हैं ताकि वे ऐसी प्रोफाइल बना सकें जो उनकी पेशेवर उपलब्धियों के साथ-साथ साइकोमेट्रिक टेस्ट स्कोर और पोर्टफोलियो जैसे विवरण भी दिखा सकें। ऐसे टूल वास्तविक दुनिया की सोच और मूल्यों पर ज्यादा जोर देते हैं। चाहे आप इसे पसंद करें या नहीं, लेकिन नियोक्ता अब लोगों को नौकरी पर रखने के लिए फिर से व्यक्तिगत और व्यावहारिक मूल्यांकन पर लौट रहे हैं। उम्मीदवार छांटने के लिए कंपनियां वीडियो सीवी चुन रही हैं। वे वीडियो में आपकी आंखें देखकर पहचान सकती हैं कि आप असल व्यवहार कर रहे हैं या एआई द्वारा प्रशिक्षित। वैश्विक स्तर पर, कई स्टार्टअप ने वर्चुअल जॉब सिमुलेशन देना शुरू कर दिया है, जहां आवेदक रोल-प्ले का अभ्यास करते हैं कि बड़ी कंपनियों में काम करना कैसा हो सकता है। फंडा यह है कि एप्लिकेशन फॉर्म भरते समय या साक्षात्कार में शामिल होते समय यह सुनिश्चित करें कि आप वही रहें, जो आप हैं। यदि आप अपना असल व्यवहार नहीं करेंगे और एआई की कठपुतली बनकर रहेंगे, तो बड़ी कंपनियों की दौड़ में पीछे छूट जाएंगे।
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एन. रघुरामन का कॉलम: क्या आपके सीवी वाला इंसान और आप अलग-अलग हैं?


