[ad_1]
संत और भगवंत का तालमेल निराला है। एक के माध्यम से दूसरा मिल जाता है और दूसरे के माध्यम से पहला प्राप्त हो जाता है। भगवंत कृपा करते हैं तो जीवन में संत आते हैं और संत वो रास्ता बताते हैं कि हम भगवान तक पहुंच सकते हैं। रामकथा सुनकर पक्षीराज गरुड़ अभिभूत थे तो उन्होंने कहा- संत बिसुद्ध मिलहिं परि तेही, चितवहिं राम कृपा करि जेही। सच्चे संत उसी को मिलते हैं, जिसे राम जी कृपा करके देखते हैं। इसलिए जीवन में संत और भगवंत, दोनों का मान बनाए रखिए। आजकल लगातार संत, महात्मा, बाबाओं पर सीरियल बन रहे हैं। और कुछ सीरियल देखकर तो ऐसा लगता है जैसे बाबाओं को बदनाम करने की योजनाबद्ध साजिश की जा रही है। एक पीढ़ी तो यही समझेगी कि भगवा वस्त्र ओढ़कर आदमी सब कर सकता है- खासतौर पर गलत। जबकि इस पीढ़ी को हमें ये समझाना पड़ेगा कि भगवंत की कृपा होती है तो जीवन में संत आते हैं। कुछ महात्माओं के गलत आचरण से समूची संत परंपरा का अपमान नहीं किया जाना चाहिए।
[ad_2]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: भगवंत की कृपा होती है तो जीवन में संत आते हैं


