भोजपुरी रंग में सजा पारो का संघर्ष सराहनीय है – Chandigarh News Chandigarh News Updates

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निर्देशक की मेहनत सेट में नजर आ जाती है। कलाकारों के मंच से चढ़ने से पहले सेट पर कितना काम हुआ है ये आसानी से देखा जा सकता है। रंगीन लाइट के बीच चमकता सेट। इसमें गांव का दृश्य शानदार रूप से दिखाया गया है। बैकग्राउंड म्यूजिक के लिए भी लाइव गायन की टीम बैठी हुई है। ये दोनों चीजें जब आंखों के सामने होती हैं तो समझ आता है कि नाटक में निर्देशक ने केवल अभिनय नहीं, थिएटर के अन्य एलिमेंट्स पर भी मेहनत की है। शनिवार को टैगोर थिएटर-18 में नाट्य उत्सव के तहत नाटक पारो का मंचन किया गया। इसे पटना के प्रस्तुति ग्रुप ने मंचित किया, जिसका निर्देशन शारदा सिंह ने किया। नागार्जुन की मैथिली भाषा में लिखे नाटक पारो को हिंदी में प्रस्तुत किया गया। नाटक पारो के जीवन को दर्शाता है, जो कुछ दशक पूर्व ले जाता है। पारो जो 14 साल की मासूम और सपने देखने वाली बच्ची है, जिसके लिए पढ़ना अहम है, अपनी उम्र की लड़कियों के साथ खेलना, आम तोड़ना पसंद है। उसकी शादी एक बूढ़े आदमी से करने का फैसला होता है, जो पारो के लिए उसके कई सपने तोड़ देने का काम करता है। गहरे रंग की पारो पहले अपने रूप को लेकर हास्य का शिकार होती थी, फिर बेमानी शादी को लेकर। नाटक में रिश्ते में लगता उसका भाई ब्रजकांत उसे समझता है, मगर कभी आवाज नहीं उठा पाता। दोनों के बीच एक अलग रिश्ता पनपता है, मगर वो इसे कोई नाम नहीं दे सकते। नाटक में नौटंकी शैली दिखी, जिसमें गीत-संगीत इसकी ऊर्जा बनाए रखते हैं। हारमोनियम, सारंगी और अन्य वाद्य यंत्रों के साथ भोजपुरी गीत भी गाए गए। सेट के लिए बांस की लकड़ी का प्रयोग किया गया। गांव की झोपड़ी, खेतों में लगाए जाने वाले मचान को खूबसूरती से दिखाया गया और दृश्यों के अनुसार उन पर लाइट्स का बेहतर प्रयोग भी देखने को मिला। नाटक में रूबी, अभिषेक, बिनीता सिंह, स्पर्श मिश्रा, साधना, शारदा, अभिषेक आदि ने अभिनय किया। टैगोर थिएटर-18 में शनिवार को नाट्य समारोह उत्सव के तहत नाटक पारो का मंचन हुआ। इसे पटना के ग्रुप ने पेश किया। आज होगा ‘उजबक राजा तीन डकैत’ का मंचन नाट्य उत्सव के तहत रविवार शाम नाटक उजबक राजा तीन डकैत का मंचन किया जाएगा। जबलपुर की टीम इसे निर्देशक संजय गर्ग के निर्देशन में मंचित करेगी। नाटक शाम 6.30 बजे टैगोर थिएटर-18 में मंचित किया जाएगा, जिसमें एंट्री फ्री रहेगी। नाटक को वर्ष 2022 में निर्देशित किया गया था। बेशक ये प्रथाएं पुरानी हो गई हैं, जहां छोटी बेटियों को बूढ़े बुजुर्गों से ब्याह दिया जाता था, मगर इसकी छाप अभी भी देखने को मिल जाती है। बिहार के गांव से ऐसी कहानियों को शहरों में दिखाया जाना जरूरी है, ऐसे में इस नाटक को निर्देशित करने का सोचा। पटना जैसे शहर से चंडीगढ़ में प्रस्तुति देना विशेष है। नाटक के लिए सेट से लेकर अभिनय तक सभी में मेहनत की गई। इसमें हर उम्र के कलाकार हैं, जिसे ट्रेन करना शुरुआती चुनौती होती है, मगर अच्छा है टीम साथ रहती है तो ऐसे तैयार नाटक वर्षों तक कर सकते हैं। – शारदा सिंह, निर्देशक

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