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भिवानी। ईरान-इस्राइल युद्ध के असर से सरसों के दामों में उछाल आ गया है। सरकार जहां किसानों को 6200 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी दे रही है वहीं खुली मार्केट में सरसों 6800 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक में बिक रही है। यही वजह है कि किसान सरकारी खरीद से दूरी बनाकर निजी खरीदारों को फसल बेचने में अधिक रुचि दिखा रहे हैं।
युद्ध के चलते पेट्रोलियम पदार्थों के साथ खाद्य तेलों की विदेशों से आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर सरसों तेल की मांग पर पड़ा है जिससे सरसों के भाव बढ़ गए हैं। किसानों को प्रति क्विंटल करीब 800 रुपये तक अधिक मिल रहे हैं। शनिवार से मंडियों में सरसों की सरकारी खरीद की तैयारी पूरी हो चुकी है लेकिन बढ़े हुए बाजार भाव के चलते किसान सरकारी खरीद से बच रहे हैं।
आढ़ती अब किसानों के खेतों में ही फसल की कटाई के बाद सौदा कर रहे हैं जिससे किसानों को मंडी आने की जरूरत भी नहीं पड़ रही। वहीं राजस्थान के सीमावर्ती गांवों से व्यापारी सरसों लाकर भिवानी मंडी में बेच रहे हैं क्योंकि यहां भाव अधिक मिल रहे हैं। राजस्थान में भी एमएसपी 6200 रुपये है लेकिन भिवानी मंडी में बाजार भाव ज्यादा है। जिले की 10 मंडियों को सरकारी खरीद के लिए अधिकृत किया गया है जहां पहले नैफेड खरीद करेगी। जिला मुख्यालय की मंडी में रोजाना पांच हजार क्विंटल से अधिक सरसों की आवक हो रही है जो खुली बोली में तुरंत बिक रही है। सरकारी खरीद में नमी, सफाई और तेल की मात्रा की जांच के नाम पर देरी और भुगतान में समय लगने के कारण किसान इससे बच रहे हैं। इसके विपरीत निजी खरीद में उन्हें तुरंत नकद भुगतान मिल रहा है।
इस बार सरकारी खरीद में बायोमीट्रिक सत्यापन, फसल के साथ फोटो और गेट पर सीसीटीवी निगरानी जैसी सख्ती बढ़ा दी गई है। इसके बावजूद पंजीकृत किसान भी निजी बोली में सरसों बेचना पसंद कर रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार पिछली बार जिले के 14,870 किसानों ने 2, 38,667 मीट्रिक टन सरसों की खरीद दर्ज कराई थी जबकि इस बार पिछले साल से अधिक उत्पादन हुआ है। भिवानी जिले में ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर अब तक 58,846 किसान पंजीकृत हैं।
विदेशों से आते हैं खाद्य तेल
दी ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन के प्रधान नरेश उर्फ भूरू ने बताया कि पाम आयल सहित कई खाद्य तेल विदेशों से आयात किए जाते हैं। युद्ध की वजह से हालात असामान्य हैं जिससे इनकी आपूर्ति प्रभावित हुई है। इससे सरसों तेल की मांग बढ़ी है और तेल मिलर मंडियों में सरसों की खरीद में अधिक रुचि दिखा रहे हैं। सरकारी खरीद के बावजूद निजी बोली में सरसों एमएसपी से ऊपर बिकती रहेगी।
मंडियों में मौसम की मार से बचाव के नहीं प्रबंध
भिवानी की चारा मंडी सहित ग्रामीण मंडियों में फसल खरीद के दौरान शेड की व्यवस्था नहीं है। किसानों को खुले में ही सरसों डालनी पड़ेगी। मौसम में बार-बार बदलाव हो रहा है और कटाई के दौरान भी फसल पर बारिश का असर पड़ा है। यदि मंडी में पहुंचने के बाद बारिश होती है तो अधिक नमी बताकर सरकारी खरीद से इनकार किया जा सकता है। मंडियों में तिरपाल तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
मात्र 10 रुपये में किसानों को अटल कैंटीन में मिलेगा भरपेट भोजन
अनाज मंडी में आने वाले किसानों के लिए अटल कैंटीन के माध्यम से 10 रुपये में भरपेट भोजन की सुविधा दी जा रही है। साथ ही मार्केट कमेटी ने पीने के पानी के लिए वाटर कूलर भी लगाए हैं जिससे किसान अपनी फसल बेचने के दौरान आराम और भोजन की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं।
शनिवार से मंडियों में किसानों की सरसों और एक अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद का शेड्यूल है। सभी खरीद एजेंसियों को सरकार के मानकों पर आधारित खरीद कराने के निर्देश दिए जा चुके हैं। संबंधित खरीद एजेंसियाें के पास पर्याप्त बारदाना पहुंच चुका है और फसल खरीद के मानकों के हिसाब से किसानों की सरसों खरीद कराई जाएगी। -अपार तिवारी, जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक, भिवानी।
सरसों की खरीद को लेकर मंडी में व्यापक व्यवस्था की गई है। इसके लिए चार शेड बनाए गए है। इसके अलावा तिरपाल की अतिरिक्त व्यवस्था के निर्देश दिए है। भिवानी अनाज मंडी में 300 क्विंटल के लगभग सरसों की आवक हो चुकी है। अकेले भिवानी में सरसों के लिए तीन खरीद केंद्र, एक सब यार्ड बनाए हैं। इस बार सरकार के आदेशों पर गेट पास बनने के बाद ही सरसों की ट्राली मंडी में प्रवेश कर पाएगी। इसके लिए किसान की बायोमीट्रिक सत्यापन होगा जिन किसानों ने मेरी फसल-मेरा ब्योरा पर अपना रिकॉर्ड दर्ज कराया है वे किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली की फोटो को पोर्टल पर अपलोड करेंगे जिसके बाद ही गेट पास जारी होगा। सरसों में आठ और गेहूं में 12 प्रतिशत नमी की सीमा तय की गई है। -देवेंद्र ढूल, कार्यकारी अधिकारी एवं सचिव, हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड भिवानी।
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Bhiwani News: युद्ध के असर से उछले सरसों के दाम, एमएसपी 6200 तो मार्केट भाव 6800 के पार



