एलपीजी की कमी पर कटाक्ष का तड़का: सोशल मीडिया पर सिलिंडर बना हीरो, लोग जमकर बना रहे रील Latest Haryana News

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टटीरी गाने में आपत्तिजनक शब्दों के प्रयोग से गुस्से से उबल रही सोशल मीडिया के लिए गैस सिलिंडरों की किल्लत ठंडी हवा का झोंका लाई है। डीडीएलजे, कभी खुशी कभी गम, गदर, बॉर्डर,  जिद्दी, जुदाई, जोधा अकबर, विजयपथ, दीवार और कारवां जैसी फिल्मों के गानों-संवादों से हंसी और परेशानी बयां की जा रही हैं। सिंलिडर खत्म होने पर मातम का माहौल दर्शाकर व्यथा के दौर को कटाक्ष का तड़का लगाकर पेश किया जा रहा है। 


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कोई प्रेस पर रोटी सेंक रहा है तो कहीं ब्रीफकेस उठाकर महिलाएं मायके की राह पकड़ रही हैं। कंधों पर सिलिंडर लेकर पहुंच रहे घर के सदस्य या डिलीवरी बॉय के स्वागत में  बैंड-बाजा और ढोल बज रहे हैं। फूल बरस रहे हैं। तिलक लगाया जा रहा है। आरती की जा रही है। ऐसे माहौल में लगभग भूला दिए गए उपलों को अनमोल धरोहर के रूप में पेश किया जा रहा है। एक रील में तो उपले बेच रही महिला गैस एजेंसी संचालक को हड़काते हुए खुले पैसे लेकर आने और केवाईसी कराने के लिए कह रही है।

सुनो, सुनो, सुनो…दहेज में पांच सिलिंडर दिए जाएंगे

एक युवक रिक्शा पर सिलिंडर लादकर लाउड स्पीकर पर यह कहते हुए आगे बढ़ रहा है कि सुनो, सुनो, सुनो…जो भी मेरी बहन से शादी करेगा उसको दहेज में पांच सिलिंडर दिए जाएंगे। एक अन्य रील में दूल्हा शादी के बाद दुल्हन को साथ ले जाने से मना करता है। परिजन कहते हैं- दामाद जी, सब तो दे दिया आपको। पांच लाख रुपये, सोने की अंगूठी, सोने की चेन और स्पलेंडर। दूल्हा बना युवक तपाक से कहता है- स्पलेंडर नहीं सिलिंडर चाहिए। एक और रील में सिलिंडर पर बैठा युवक कह रहा है- भरो सिलिंडर पड़ो है आपणै घरा। रिश्ता आला की लाइन लाग री है। 

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एलपीजी की कमी पर कटाक्ष का तड़का: सोशल मीडिया पर सिलिंडर बना हीरो, लोग जमकर बना रहे रील