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Memory Shortage Impact: मेमोरी चिप्स की शॉर्टेज ने स्मार्टफोन कंपनियों के साथ-साथ ग्राहकों पर असर डालना शुरू कर दिया है. यही कारण है कि पिछले कुछ दिनों में मोबाइल महंगे हुए हैं. ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाई-एंड रैम और स्टोरेज कॉन्फिगरेशन की कीमतें प्रोसेसर की कीमतों को भी पार कर गई हैं. इस कारण कंपनियों को या तो कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं या रैम और स्टोरेज को कम करना पड़ रहा है. इस नई प्रॉब्लम के बीच कंपनियां अब सालों पुराने समाधान को वापस ला सकती हैं.
क्या फिर लौटेगा एक्सपैंडेबल स्टोरेज का दौर?
एक रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियां हर साल अपने फोन में ज्यादा इंटरनल स्टोरेज देने के बजाय एक पुराने और भरोसेमंद सॉल्यूशन की तरफ रूख कर सकती हैं. नए फोन में microSD कार्ड के जरिए एक्सपैंडेबल स्टोरेज का ऑप्शन दिया जा सकता है. हाइब्रिड सिम स्लॉट के जरिए ऐसा किया जा सकता है. हाइब्रिड सिम स्लॉट में यूजर अपनी जरूरत के हिसाब से दूसरा सिम कार्ड या microSD कार्ड डाल सकता है.
एक्सपैंडेबल स्टोरेज क्यों कर रही कमबैक?
एक्सपैंडेबल स्टोरेज की मदद से कंपनियां एक बड़ी चुनौती का सामना आसानी से कर सकती हैं. अब कंपनियां अपने फोन में महंगी 512GB या 1TB स्टोरेज देने की बजाय इन्हें 128GB या 256GB इंटरनल स्टोरेज के साथ लॉन्च कर सकती हैं और एक्सपैंडेबल स्टोरेज के जरिए यूजर्स को स्टोरेज बढ़ाने का ऑप्शन भी मिल जाएगा. इससे कंपनियां फोन की कीमतों को अपने कंट्रोल में रख सकती हैं.
इसका एक नुकसान भी है
यह बदलाव दिखने में जितना आसान लग रहा है, उतना ही मुश्किल है. दरअसल, एक्सटर्नल स्टोरेज कार्ड की एक दिक्कत है. इंटरनल स्टोरेज के मुकाबले इसकी स्पीड कम होती है, जिससे परफॉर्मेंस कंसिस्टेंसी कम हो जाती है. इसी वजह से कंपनियों ने एक्सपैंडेबल स्टोरेज के फीचर को बंद किया था, लेकिन अब बदले हालात में इस फीचर का कमबैक होता दिख रहा है.
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