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भूना। खजूरी जाटी गांव की मीनाक्षी पूनिया बिश्नोई (34) ने मेहनत, दूरदृष्टि और आत्मविश्वास के बल पर ग्रामीण जीवन में सफलता की नई मिसाल कायम की है। उन्होंने पारंपरिक खेती के साथ मधुमक्खी पालन को आधुनिक तरीके से अपनाकर इसे लाभदायक व्यवसाय में बदल दिया। आज उनकी पहचान केवल किसान परिवार की बहू तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे एक प्रेरणादायक महिला उद्यमी बन चुकी हैं।
मीनाक्षी के ससुर जगदीश चंद्र पूनिया ने लगभग 20 वर्ष पहले 10 बॉक्स के साथ मधुमक्खी पालन शुरू किया था। शुरुआती समय में यह कार्य सफल रहा लेकिन धीरे-धीरे इसकी गति धीमी पड़ गई। सीमित कृषि भूमि के बावजूद मीनाक्षी ने इस क्षेत्र में नई संभावनाएं देखीं। बाजार में शुद्ध और प्राकृतिक शहद की बढ़ती मांग ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
पति प्रवीण पूनिया के सहयोग से उन्होंने इस काम को नए सिरे से शुरू किया और आधुनिक तकनीकों को अपनाया। मेहनत और सही रणनीति के चलते आज उनके पास 200 से अधिक बॉक्स हैं जिनमें लाखों मधुमक्खियां सक्रिय हैं। हर सीजन में 200 से ज्यादा बाल्टियों में शुद्ध शहद का उत्पादन हो रहा है। संवाद
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से बढ़ी पहुंच
मीनाक्षी ने समय के साथ तकनीक को भी अपनाया। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने शहद की ऑनलाइन बिक्री शुरू की। इसका सकारात्मक परिणाम सामने आया और उनके उत्पाद की मांग आसपास के जिलों से निकलकर दूर-दराज के शहरों तक पहुंच गई। उनका तैयार किया हुआ शुद्ध शहद 500 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है। इसके अलावा, कई स्थानों पर व्यापारी उनसे शहद खरीदकर आगे सप्लाई भी कर रहे हैं। शुद्धता और प्राकृतिक तरीके से तैयार उत्पाद ही उनकी सबसे बड़ी पहचान है।
ईमानदारी बनी सफलता की कुंजी
मीनाक्षी का मानना है कि आज के समय में लोग मिलावटी उत्पादों से परेशान हैं। उनकी मांग रहती है कि चीज शुद्ध मिले चाहे कीमत ज्यादा ही क्यों न हो। यही कारण है कि उनके शहद को ग्राहकों का भरोसा मिला है। उनका दावा है कि उनके उत्पाद में एक बूंद भी मिलावट नहीं होती और यही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। पिछले एक साल में उन्होंने लाखों रुपये का मुनाफा कमाया है। उनकी सालाना आय 10 लाख रुपये से अधिक हो चुकी है। उनका लक्ष्य आने वाले समय में इस व्यवसाय को और विस्तार देने का है।
महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा
महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी स्नेहलता के अनुसार, आज महिलाएं केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं। मीनाक्षी की सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी यह कहानी संदेश देती है कि यदि पारंपरिक कार्यों में आधुनिक सोच और तकनीक का समावेश किया जाए तो गांव में रहकर भी बड़े स्तर पर रोजगार और आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है।
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