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फरीदाबाद में गेहूं कटाई के बीच बारिश ने बढ़ाई किसानों की मुश्किलें. मशीनों के दौर में भी कई किसान हाथ से कटाई को बेहतर मान रहे हैं. ज्यादा मेहनत और खर्च के बावजूद साफ फसल, महंगा भूस और मजदूरों को रोजगार..यही उनकी असली कमाई है.
फरीदाबाद: अब गेहूं की कटाई का समय आ गया है खेतों में हलचल शुरू हो चुकी है. बारिश ने थोड़ी दिक्कत जरूर दी कई जगह फसल भीग गई और काम थोड़ा लटक गया. वैसे अब तो कटाई के लिए बड़ी-बड़ी मशीनें मैदान में उतर चुकी हैं. एक मशीन एक एकड़, और आधे घंटे में काम खत्म. फिर भी फरीदाबाद ऐसे किसान हैं जो अभी भी हाथों से ही कटाई करवाते हैं. ये काम ज्यादा मेहनत का है खर्च भी बढ़ जाता है, लेकिन उनका कहना है इसमें असली फायदा है.
Local18 से बातचीत में किसान अमित गुप्ता बताया मेरे पास 25 एकड़ खेती है. मैं पट्टे पर खेत लेकर खेती करता हूं कहीं 25000 रूपये एकड़, तो कहीं 35000 रूपये एकड़ लिया है. कटाई कल से शुरू की थी, लेकिन बारिश और आंधी ने करीब एक लाख रुपए का नुकसान कर दिया. पहले मजदूर 6 से 7 मन अनाज में खेत काट रहे थे अब 12 से 15 मन मांग रहे हैं. ऊपर से फसल गिर गई गेहूं का रंग भी खराब हो गया.
हाथ से कटाई बेहतर
बारिश के बाद अमित गुप्ता हाथों से कटाई करने के अपने फायदे बताते हैं हाथ की कटाई में खेत एकदम साफ हो जाता है लंजरा तक साफ रहता है. भूस फसल का अवशेष 2 रूपये महंगा बिकता है. कंबाइंड मशीन की कटाई में खेत में गंदगी रह जाती है भूस भी कम और उसकी कोई खास डिमांड नहीं होती. मशीन से कटाई के बाद खेत में बाले रह जाती हैं, लेकिन हाथ की कटाई में सब कुछ साफ-सुथरा निकलता है. जिस तरीके से बारिश हुई है और बारिश के बाद मशीन से आप कटाई करते हैं, तो कहीं ना कहीं मशीन उतना अच्छा नहीं काट पाएगी जितनी अच्छी हाथ से कटाई होती है.
मशीन से फायदा नहीं
अमित ने बताया मजदूर काटने का ठेका लेते हैं, अनाज देकर खेत काटवाते हैं एकड़ के हिसाब से 7 से 8 मन अनाज देते हैं. मजदूर यूपी से आते हैं 10 से 12 बाहर के होते हैं बाकी अपने गांव के. एक एकड़ काटने में 5 से 6 मजदूर लगते हैं और 4 से 5 दिन लग जाते हैं. मशीन से तो यह काम मिनटों में हो जाता है मगर इतना फायदा नहीं. अमित ने बताया हाथ की कटाई का भूस 2 रुपये महंगा बिकता है 250 से 350 रुपये मन तक यानि सीधा फायदा. गेहूं सरकारी एमएसपी पर मंडी में जाता ही है.
बारिश के चलते थोड़े नुकसान की बात तो है फसल गिर गई रंग खराब हुआ खर्च बढ़ गया. मगर बारिश के बाद अमित का मानना है कि हाथों से कटाई में फायदा ही ज्यादा है फसल साफ, भूस महंगा और मजदूरों को भी रोजगार मिलता है.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें
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