[ad_1]
स्टील की कीमतों में बढ़ोतरी
फोरम के सदस्यों के अनुसार, स्टील की कीमतों में करीब आठ हजार रुपये प्रति टन तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। साइकिल निर्माण में इस्तेमाल होने वाले स्टील पाइप के दाम 65 हजार रुपये प्रति टन से बढ़कर 73 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच गए हैं। इसके अलावा ब्रास की कीमत 500 रुपये से बढ़कर 800 रुपये प्रति किलो हो गई है, जबकि निकल के दाम 1400 रुपये से उछलकर 1700 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुके हैं। सिर्फ धातुओं तक ही नहीं, बल्कि प्लास्टिक उत्पादों की कीमतों में भी 50 से 60 फीसदी तक का उछाल आया है। वहीं केमिकल्स और पेंट के दामों में करीब 40 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। इन सभी कारणों से उद्योग की इनपुट कॉस्ट लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
ऊर्जा के मोर्चे पर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। कमर्शियल एलपीजी गैस की आपूर्ति में लगातार बाधा आ रही है, जिससे उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। उद्योगों को समय पर गैस नहीं मिल पाने के कारण उत्पादन शेड्यूल भी गड़बड़ा रहा है। उद्योग जगत इसके विकल्प भी तलाश रहा है, लेकिन यह लंबी प्रक्रिया है।
बढ़ती लागत से उद्योगों को नुकसान
जी-13 बाइसाइकिल फोरम के अध्यक्ष राजिंदर जिंदल ने कहा कि युद्ध के बाद से कच्चे माल की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। बढ़ती लागत के कारण उद्योग को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सभी निर्माताओं ने मिलकर यह फैसला लिया है कि अब कीमतों में इजाफा करना जरूरी हो गया है।
फोरम के महासचिव एवं नोवा साइकिल्स के एमडी रोहित पाहवा ने कहा कि स्टील निर्माता कंपनियां मनमाने तरीके से कीमतें बढ़ा रही हैं, जिससे उद्योग के लिए योजना बनाना मुश्किल हो गया है।
उद्यमियों ने सरकार से मांग की है कि मौजूदा संकट को देखते हुए एमएसएमई सेक्टर को राहत दी जाए। खास तौर पर नियंत्रित कीमतों पर स्टील और अन्य कच्चा माल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही हालात नहीं सुधरे, तो इसका असर न केवल साइकिल उद्योग बल्कि अन्य छोटे और मध्यम उद्योगों पर भी पड़ेगा, जिससे राज्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
[ad_2]
साइकिल पर युद्ध की मार: एक अप्रैल से 225 रुपये महंगी होगी गरीब की सवारी, कच्चे माल की महंगाई से उद्योग बेहाल


