[ad_1]
एआई की मदद से काम पूरा कर रहे लोगों से पूछिए कि वे इससे कितना समय बचा लेते हैं? वे आपको यह कह कर चौंका सकते हैं कि ‘एआई ने हमारा काम बेहतर नहीं, बदतर कर दिया है।’ महज कर्मचारियों ही नहीं, बल्कि सबसे बड़े एआई समर्थकों को भी इससे सबसे बड़ी उम्मीद यही थी कि यह काम का बोझ घटाएगा और लोगों को उच्चस्तरीय रचनात्मक कार्यों के लिए अधिक समय देगा। बिल गेट्स और जेपी मॉर्गन चेज के जेमी डाइमोन जैसे टेक और बिजनेस लीडर्स ने भी कहा कि ‘एआई अंततः लोगों को अधिक नहीं, बल्कि कम कामकाज की ओर ले जा सकता है और इससे वर्कवीक छोटा हो सकता है।’ इलॉन मस्क ने कहा कि अगले दो दशकों में एआई और रोबोट्स की तरक्की से कामकाज वैकल्पिक तक बन सकता है। लेकिन अभी तक सब उल्टा हो रहा है। मौजूदा रिसर्च तो यही कहती है। ऐसा क्यों? ऐसा नहीं है कि एआई दक्षता नहीं बढ़ाता। दरअसल, जो क्षमता एआई बचाता है, उसे तत्काल दूसरे काम में लगा देता है। इसी से काम का बोझ बढ़ने लगता है। मसलन, अगर कोई एआई से कोई प्रोजेक्ट कर रहा है तो शुरुआती रिपोर्ट चंद सेकंड में आ जाती है। लेकिन साथ ही ऐसे सुझाव भी आते हैं कि ‘क्या मैं इस चीज पर भी विचार करूं?’ या ‘मैं आपकी कंपनी की जरूरत के अनुसार इम्प्लीमेंटेशन प्लान जोड़ सकता हूं।’ या फिर ‘चूंकि मुझे आपकी क्लाइंट्स लिस्ट पता है तो मैं इसे आपके रेगुलर क्लाइंट्स की रुचि के हिसाब से ढाल सकता हूं।’ ऐसे एआई 7-8 लेयर्स तक नई चीजें जोड़ता जाता है, जिन पर कर्मचारी ने सोचा तक नहीं होता या जो जरूरी होती ही नहीं। एआई की इसी आदत से यूजर एक ही काम की गहराई में डूबता जाता है और थक जाता है। प्रोडक्टिविटी ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर कंपनी ‘एक्टिवट्रैक’ ने हाल ही में वर्किंग हैबिट्स पर एआई के असर काे लेकर अब तक के सबसे बड़े अध्ययनों में से एक पूरा किया। इसमें 1,111 नियोक्ताओं के 1.64 लाख कर्मचारियों की 443 मिलियन घंटे से ज्यादा की डिजिटल एक्टिविटी का अध्ययन कर कुछ दिलचस्प तथ्यों का खुलासा किया गया। अध्ययन में एआई टूल्स इस्तेमाल करने से पहले और बाद के 180 दिनों में कर्मचारियों की डिजिटल एक्टिविटी को देखा गया। सामने आया कि एआई से लगभग हर क्षेत्र में गतिविधि बढ़ गई। ईमेल, मैसेजिंग और चैट ऐप्स पर समय दोगुने से ज्यादा हो गया। वहीं, फोकस्ड और बिना व्यवधान वाले काम को दिया जाने वाला समय 9% तक घट गया। वो एकाग्रता वाला समय, जो अकसर जटिलताएं समझने और हल करने, फॉर्मूला बनाने, नए आइडिया बनाने और लागू करने के लिए जरूरी होता है। वे कंपनियां भी प्रभावित हो रही हैं, जिन्होंने प्रशासनिक काम ऑटोमेट करने के लिए एआई विकसित किया, ताकि अतिरिक्त कार्मिकों को अन्य कामों में लगा सकें। ऐसा इसलिए, क्योंकि खुद ऑटोमेशन वाला काम ही पूरा नहीं हो रहा। कर्मचारी काम को बार-बार करने, सुधारने और फिर एआई सुझावों को जोड़ने में उलझे रहते हैं। इसमें ज्यादा समय खपता है। लोग अकसर कम नहीं, बल्कि ज्यादा काम करते हैं। बर्कले स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के हास स्कूल ऑफ बिजनेस में एसोसिएट प्रोफेसर अरुणा रंगनाथन ने बीते सप्ताह मीडिया से कहा कि ‘एआई हमें अतिरिक्त काम में उलझा देता है, और चूंकि उन्हें कुछ हद तक आसान भी बनाता है, लेकिन इसमें हम उलझे रहते हैं, जिससे गति बने रहने का भाव महसूस होता है।’ रंगनाथन के अध्ययन के शुरुआती निष्कर्ष हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू में प्रकाशित हुए हैं। चूंकि एआई टूल्स के साथ काम करने का औसत समय आठ गुना बढ़ गया है तो सवाल यह है कि एआई का इस्तेमाल ऐसे कैसे करें कि ऊर्जा और उच्च उत्पादकता, दोनों बनी रहें? विशेषज्ञ सुझाते हैं कि जो लोग काम के कुल घंटों का 7 से 10% समय एआई टूल्स पर खर्च करते हैं, उनकी उत्पादकता सर्वाधिक होती है। फंडा यह है कि एआई दोधारी तलवार है। यह आपको तेजी से आगे ले जा सकता है, लेकिन गहरा जाने के लिए लुभा भी सकता है। अगर आप गहराई में जाते रहे तो अगला काम करने के लिए सतह पर लौट ही नहीं पाएंगे। तो फिलहाल इसे संयम के साथ इस्तेमाल करें।
[ad_2]
एन. रघुरामन का कॉलम: अब तक एआई काम के बोझ से राहत नहीं दे पा रहा


