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आज एक समस्या तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है- नींद टूटना या नींद पूरी न होना। बहुत लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं और सोचते हैं यह केवल तनाव या थकान की वजह से है। लेकिन नींद से जुड़ी समस्याएं अब बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही हैं। समय रहते इसके कारणों को समझकर इलाज न किया जाए, तो यह गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। नींद न आना एक समस्या है, लेकिन नींद का बार-बार टूटना उससे भी अधिक गंभीर स्थिति हो सकती है। कई लोग मानते हैं कि उनकी नींद तनाव या चिंता के कारण टूटती है, लेकिन अकसर इसके पीछे शारीरिक कारण भी होते हैं। बड़ी संख्या में लोगों की नाक में किसी न किसी प्रकार का ब्लॉकेज पाया जाता है। यह ब्लॉकेज एलर्जी, साइनस की समस्या या नाक की हड्डी के टेढ़े होने की वजह से हो सकता है। जब नाक पूरी तरह खुली नहीं होती, तो सांस सामान्य रूप से नहीं चलती और इसका असर नींद पर पड़ता है। ऐसे में नींद बार-बार टूटती है। अकसर लोग इस समस्या को समझ नहीं पाते और बार-बार नोज ड्रॉप या स्प्रे का इस्तेमाल करते रहते हैं। इससे कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है, लेकिन असली कारण का इलाज नहीं हो पाता। इसलिए अगर नाक लंबे समय तक बंद रहती है या बार-बार सर्दी-जुकाम होता है, तो इसकी सही जांच कराना जरूरी है। नींद टूटने की समस्या का एक कारण स्लीप एपनिया भी है। एक अध्ययन के अनुसार लगभग 32.5% लोगों में मॉडरेट से गंभीर स्लीप एपनिया पाया गया है। इस स्थिति में सोते समय व्यक्ति की सांस एक घंटे में 15 से अधिक बार रुक सकती है। यानी लगभग हर चार मिनट में एक बार सांस 10 सेकंड से अधिक समय के लिए रुक जाती है और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम होने लगता है। लंबे समय तक ऐसा होने से हृदय रोग, हाई बीपी और हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ सकता है। स्लीप एपनिया और नींद टूटने के कई कारण हो सकते हैं। इनमें बढ़ता हुआ मोटापा, खान-पान की आदतें, देर रात तक जागना, काम का तनाव और लंबा ट्रैवलिंग समय शामिल हैं। कुछ लोगों में अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी नींद में बाधा बनती हैं। कई पुरुषों में प्रोस्टेट की समस्या या एसिडिटी के कारण भी रात में बार-बार उठना पड़ता है, जिससे उनकी नींद बार-बार टूटती है। नाक और गले की संरचना से जुड़ी समस्याएं भी स्लीप एपनिया का कारण बन सकती हैं। अगर नाक की हड्डी टेढ़ी है या अंदर की संरचना में समस्या है, तो यह केवल दवाइयों से ठीक नहीं होती और कई मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। स्लीप एपनिया बेहद खतरनाक है- दिन में अत्यधिक नींद आने के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं से लेकर तलाक और गर्भधारण में दिक्कतों तक, स्लीप एपनिया कई समस्याएं पैदा करता है। इसलिए आवश्यक है कि बीमा में स्लीप एपनिया की सभी प्रकार की सर्जरी शामिल हो। अच्छी बात यह है कि आजकल नाक और साइनस की अधिकांश सर्जरी एंडोस्कोपिक यानी मिनिमली इनवेसिव तकनीक से की जाती हैं। इसमें मरीज को कम तकलीफ होती है। नींद से जुड़ी समस्याओं को समय रहते पहचानना और उनका इलाज कराना बहुत महत्वपूर्ण है। अकसर देखा जाता है कि लोग वर्षों तक इस समस्या को टालते रहते हैं और इलाज तब करवाते हैं, जब उम्र काफी बढ़ चुकी होती है। 60-70 वर्ष की उम्र के बाद शरीर में अन्य बीमारियां भी जुड़ जाती हैं, जिससे सर्जरी या उपचार अपेक्षाकृत जटिल हो सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमें नींद को उतना ही महत्व देना चाहिए, जितना हम भोजन और काम को देते हैं। (ये लेखक के अपने विचार हैं)
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डॉ. विकास अग्रवाल का कॉलम: नींद न आना समस्या है, नींद का बार-बार टूटना और बड़ी समस्या


