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फतेहपुर बिल्लौच फरीदाबाद का सदियों पुराना बतासों का स्वाद आज भी जिंदा है. 64 साल के भूप सिंह पिछले 50 साल से पारंपरिक तरीके से लकड़ी की भट्टी पर बतासे बना रहे हैं. मशीनों के दौर में भी ये दुकान गांव की पहचान और विरासत को संभाले हुए है.
फरीदाबाद: फतेहपुर बिल्लौच गांव फरीदाबाद में खुद का इतिहास रखता है काफी पुराना. हजारों साल पहले बसा था और जब बात पहचान की आती है, तो गांव के बतासे सबसे आगे रहते हैं. पहले बतासे बनाना यहां का सबसे बड़ा रोजगार था, लेकिन समय के साथ बाकी दुकानें बंद हो गईं. फिर भी गांव में आज भी एक दुकान है जो बतासे की परंपरा संभाले हुए है. वहीं दुकान जो गांव की पहचान है इतिहास का हिस्सा है और यहां के लोग इसे बंद नहीं होने देते. आसपास के गांवों से भी लोग यहीं बतासे लेने आते हैं सिर्फ स्वाद के लिए नहीं बल्कि इसी गांव की सबसे पुरानी दुकान देखने भी. इस दुकान की शुरुआत इनके पूर्वजों ने की थी और आज की पीढ़ी उसी परंपरा को निभा रही है.
मशीन से बनाए बतासे में वो स्वाद नहीं
Local18 से बातचीत में भूप सिंह ने बताया मैं इसी गांव का निवासी हूं. मेरे पास जो काम है वो बतासे का ही है. ये गांव का सबसे पुराना काम है और 50 साल से मैं खुद इसे चला रहा हूं. उससे पहले मेरे पूर्वज करते थे. 14 साल की उम्र से मैंने बतासे बनाना शुरू किया था और आज 64 साल का हूं. बतासे वैसे ही बनाता हूं जैसे पहले बनते थे पुराने तरीके से. आजकल मशीनें आ गई हैं लेकिन मैं उनका इस्तेमाल नहीं करता.
पुराने ढंग से ही बतासे बनाता हूं. मशीन से बनाए बतासे में वो स्वाद नहीं है और हम गैस नहीं लकड़ी ही इस्तेमाल करते हैं. कढ़ाई में लकड़ी का बेल्ट लगा होता है जिससे उठाने में आसानी रहती है. आसपास के गांवों से लोग ऑर्डर लेकर आते हैं यही मेरी पहचान है.
कैसे बनते हैं बतासे
भूप सिंह ने बताया बतासे बनाने में सिर्फ चीनी और पानी लगता है. पहले पानी में चीनी घोलते हैं फिर उसका बताशा बनाते हैं और भट्टी पर गर्म करते हैं. एक दिन में करीब एक क्विंटल बताशा तैयार हो जाता है. ऑर्डर भी लोग खुद लेते हैं. एक कढ़ाई में डेढ़ किलो माल आता है. हमने कोई कारीगर नहीं रखा पूरा काम परिवार के लोग ही संभालते हैं.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें
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