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बुजुर्गों के खिलाफ शारीरिक अपराध अब कम हो रहे हैं, लेकिन आर्थिक अपराध नहीं। एक ओर जहां सीबीआई ने पिछले साल हुए बड़ी रकम की हेराफेरी संबंधी ‘डिजिटल अरेस्ट’ के दो मामलों की जांच इसी गुरुवार को हाथों में ली है, वहीं ‘डिजिटल अरेस्ट’ का खतरा खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। बल्कि गुरुवार को ही बेंगलुरु में सामने आए एक मामले में दिखा कि यह डरावने तरीके से वापस लौट आया है। ठगी का शिकार बने 74 वर्षीय एक रिटायर्ड व्यक्ति को 5 मार्च को दोपहर करीब 3.30 बजे एक व्यक्ति का कॉल आया। उसने खुद को टेलीकॉम अधिकारी बताया और कहा कि आपके मोबाइल का दुरुपयोग एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुआ है, इसकी जांच होनी है। इसके तुरंत बाद ठगों ने वीडियो कॉल किया और चेतावनी दी कि इस कॉल के बारे में किसी को न बताएं। कॉलर ने उन्हें ‘सुप्रीम कोर्ट’ के लेटरहेड पर दस्तावेज भेजे, जिस पर ‘फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन कमेटी ऑर्डर’ लिखा था। पीड़ित ने खुद को बेगुनाह बताया तो ठगों ने कहा कि वे संदिग्ध हैं और सहयोग करने पर ही इससे छूट सकते हैं। ठगों ने उन्हें एक ‘स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल’ फॉलो करने को कहा, जिसमें अगले 72 घंटों तक किसी से संपर्क नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी दावा किया कि नवी मुंबई से सीबीआई अधिकारी निगरानी कर रहे हैं और उनके घर के पास फील्ड अधिकारी उनकी गतिविधि ट्रैक कर रहे हैं। 7 मार्च की सुबह 8.30 बजे पीड़ित ने कॉलर से कहा कि उन्हें ब्लड प्रेशर की दवा लेने पास के मेडिकल स्टोर पर जाना है तो चौंकाने वाले घटनाक्रम में ठगों ने कहा कि उनका ही आदमी दवा पहुंचा देगा। हैरतअंगेज तरीके से 10 मिनट में ही एक अजनबी व्यक्ति दवा लेकर घर पहुंच गया। इससे ठगों का दावा और मजबूत हो गया कि वे नजर रख रहे हैं। अंतत: उन्होंने ‘कोर्ट ऑर्डर’ के अनुसार 50 लाख रुपए जमा कराने के लिए बुजुर्ग पर दबाव बनाया। सीबीआई द्वारा हाथ में लिए अन्य मामले में भी पीड़िता गांधीनगर निवासी 74 साल की एक रिटायर्ड डॉक्टर हैं। उनसे भी 19.2 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी की गई। ठगों ने राशि ट्रांसफर को वैध ठहराने के लिए ईडी के फर्जी लेटरहेड पर ‘फाइनेंशियल सुपरविजन’ सर्टिफिकेट भी दिए। जाहिर है, ठग तो बिना उम्र देखे किसी को भी डराने की कोशिश करते हैं। लेकिन खासकर बुजुर्ग उनके निशाने पर होते हैं, क्योंकि अकसर उनके पास जमा-पूंजी होती है। वे जीवन में कभी थाने नहीं गए होते और किसी भी कानूनी एजेंसी का सामना करने से डरते हैं, भले ही वह स्क्रीन पर ही क्यों न हो। फिर वे अकेले भी रहते हैं। ठग खुद को ग्रैंड चिल्ड्रन, पुलिस अधिकारी या मेडिकेयर कर्मचारी बता सकते हैं। कभी आपका कंप्यूटर ठीक करने, आपको अमीर बनाने या आपकी गाढ़ी कमाई सुरक्षित रखने का वादा करते हैं। यहां स्वयं आपको या किसी बुजुर्ग रिश्तेदार को सुरक्षित रखने के कुछ तरीके बताए गए हैं। लिमिट तय करें : बैंकों में वित्तीय ट्रांसफर की लिमिट तय करें। अनजान कॉल्स को वॉइसमेल पर जाने दें। अनजान लिंक्स पर कभी क्लिक न करें। वेबसाइट जांचने के लिए सीधे वेब एड्रेस टाइप करें और कोई पॉप-अप मैसेज दिखे तो लॉग आउट करें। रुकें और सोचें : जल्दी प्रतिक्रिया देने से खुद को रोक पाना ठगी से बचने की सबसे प्रभावी रणनीतियों में से है। कुछ बुरा होने से पहले जल्दबाजी में कदम उठाने का प्रेशर सावधानी नहीं, बल्कि एक कमजोरी है। यह आपकी तार्किक क्षमता रोक देता है। दो भरोसेमंद लोग रखें : जीवन में कम से कम ऐसे दो लोग जरूर होने चाहिए, जिनसे आप हर बात कर सकें। जब आपसे कहा जाए कि किसी से बात न करें तो स्पष्ट कहें कि ‘मैं इन दो लोगों से संपर्क किए बिना कुछ नहीं कर सकता, चाहे गिरफ्तार ही क्यों न कर लिया जाऊं।’ ठग गायब हो जाएंगे। कार्रवाई करें : तत्काल ठगी की रिपोर्ट करना कई बार पैसे उड़ाए जाने से पहले ही स्कैम को रोक सकता है। फंडा यह है कि अगर आपके आसपास ऐसे बुजुर्ग हैं, जिनके पास ठीक-ठाक पैसा है तो उनकी सुरक्षा के लिए उनके चारों ओर एक फायरवॉल बना दीजिए।
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एन. रघुरामन का कॉलम: बुजुर्गों को स्कैम से बचाने का समय आ गया है

