Karnal News: चोट को पुरानी बीमारी बता दावा रोका, कंपनी को देने होंगे 1.17 लाख रुपये Latest Haryana News

[ad_1]

करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाते हुए बीमा क्लेम खारिज करने को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार करार दिया है। बीमा कंपनी ने साइकिल से गिरकर लगी चोट को पुरानी बीमारी बताकर उपभोक्ता हिमांशु बजाज का क्लेम खारिज कर दिया था। आयोग ने आदेश दिया कि कंपनी शिकायतकर्ता को चिकित्सा बिलों की 81,530 रुपये की राशि के साथ मानसिक पीड़ा और कानूनी खर्च के लिए 36 हजार रुपये मुआवजा भी भुगतान करे। इस तरह कंपनी उपभोक्ता को 1.17 लाख रुपये देने होंगे।

आयोग के फैसले के अनुसार हांसी रोड के जीवन नगर निवासी शिकायतकर्ता हिमांशु बजाज ने 16 मई, 2024 को स्टार हेल्थ कंपनी से एक स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदी थी। पॉलिसी लेने के मात्र चार दिन बाद 20 मई, 2024 को सुबह साइकिल चलाते समय संतुलन बिगड़ने से वह गिर गए थे। इससे उनके दाहिने कंधे पर गंभीर चोटें आई। उन्हें करनाल के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनके कंधे का ऑपरेशन हुआ और प्लेट/रॉड डाली गई। इलाज पर कुल 81,530 रुपये का खर्च आया।

हिमांशु ने दावा किया तो कंपनी ने खारिज कर दिया। कहा कि यह चोट पुरानी और पहले से लगी थी। कंपनी का दावा था कि चोट पॉलिसी लेने से पहले की है, इसलिए वे भुगतान के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्यों ने मामले की सुनवाई के दौरान सबूतों का अभाव पाया। बीमा कंपनी यह साबित करने में पूरी तरह विफल रही कि शिकायतकर्ता को पहले से कोई फ्रैक्चर था। इसके अलावा अस्पताल की डिस्चार्ज समरी और मेडिकल कागजात में कहीं भी पुरानी चोट का जिक्र नहीं था।

देना होगा नौ फीसदी ब्याज

आयोग ने शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए स्टार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिए कि वह उपभोक्ता को इलाज पर हुए वास्तविक खर्च के लिए 81,530 रुपये क्लेम खारिज होने की तारीख से नाै प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ दे। इसके अलावा उपभोक्ता को हुई मानसिक उत्पीड़न व परेशानी के मुआवजे के रूप में 25 हजार रुपये और कानूनी कार्रवाई पर आए खर्च के ताैर पर 11 हजार रुपये का मुआवजा दे।


क्लेम के समय टालमटोल

मामले में सुनवाई करते हुए आयोग ने टिप्पणी की कि बीमा कंपनियां प्रीमियम लेने में तो बहुत उत्सुक रहती हैं, लेकिन क्लेम देने के समय टालमटोल करती हैं। इसके अलावा तकनीकी बारीकियों के आधार पर जायज क्लेम भी खारिज कर देती हैं।

[ad_2]
Karnal News: चोट को पुरानी बीमारी बता दावा रोका, कंपनी को देने होंगे 1.17 लाख रुपये