चंडीगढ़ प्रशासक कटारिया बोले- खत्म हो बाबा साहब वाला सिस्टम: पब्लिक ट्रांसपोर्ट मजबूत होना चाहिए, प्लानिंग अगले 25 सालों को लेकर हो – Chandigarh News Chandigarh News Updates

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अर्बन प्लानिंग इस तरह की होनी चाहिए कि वहां रहने वाले लोगों को कम से कम सारी सुविधाएं आसानी से मिल सकें। अगर ये सुविधाएं सबको न मिल पाएं तो ऐसी प्लानिंग बेकार है। यह बात चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने अर्बन इनोवेशन समिट 2026 में कही। कहा कि, चंडीगढ़ में एक दिन ऐसा होना चाहिए जब कोई भी व्यक्ति निजी वाहन न निकाले, ताकि पाल्यूशन को बचाया जा सके। पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मजबूत किया। उसे सस्ता किया जाए, भले ही उसमें घाटा उठाना पड़े, लेकिन लोगों को इंतजार न करना पड़े। प्रशासक कटारिया ने कहा कि, आज चंडीगढ़ में इतनी गाड़ियां हैं कि जितनी जनसंख्या नहीं है। गाड़ियां खड़ी करने के लिए गैराज नहीं हैं, इसलिए लोग सड़क पर ही वाहन पार्क कर रहे हैं। रात को 12 बजे शहर घूमकर आओ तो सड़कों पर गाड़ियां ही गाड़ियां दिखाई देती हैं। ऐसे में उनके लिए अलग गैराज बनाए जाने चाहिए। अगर लोग सड़क पर गाड़ी खड़ी करेंगे तो उनसे शुल्क लिया जाना चाहिए। कुछ चीजों को सुधारने के लिए प्रयास करने होंगे, तभी समस्याओं का हल निकलेगा। उन्होंने कहा कि “साहब-साहब” का सिस्टम खत्म होना चाहिए और सभी लोगों को समान समझा जाना चाहिए। यह पर्ची दो तो अंदर आओ। यार तुम्हारा मालिक बाहर खड़ा है। तुम उसकी नौकरी कर रहे हो। कुछ ख्याल नहीं है। सिसटम तो हा सकता है। लेकिन सिस्टम ऐसा नहीं होना चाहिए जो व्यक्ति के मन को छोटा बना दे। अगर व्यक्ति के मन आ गया कि मैं छोटा आदमी तो वह कैसे खड़ा होगा। यह अहसास हमें व्यवस्था से करना पड़ता है। तभी असली परिवर्तन आ सकता है। भी व्यक्ति हमारे पास आए, वह संतुष्ट होकर जाए। शहरों की प्लानिंग 20–25 साल आगे की सोचकर करनी चाहिए। एआई से शहर का विकास होगा प्रशासक ने कहा कि चंडीगढ़ ऐसा शहर है जहां हर साल मेयर बदल जाता है। सामान्यत: बहुत कम शहरों में ऐसा होता है। उन्होंने नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार के काम की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी शहर के कमिश्नर का काम सबसे मुश्किल होता है, क्योंकि उन्हें जनता को भी संभालना पड़ता है और नियमों का पालन भी करवाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि शहरों के विकास में एआई का इस्तेमाल भी तेजी से हो रहा है और इससे योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकता है। प्राइवेट डलवपर बिगाड़ते है प्लानिंग प्रशासक ने कहा कि कई बार प्राइवेट डवलपर्स मनमर्जी से इमारतें बना देते हैं, जिससे शहर की प्लानिंग बिगड़ जाती है। इसलिए बिना सही प्लान के किसी भी प्राइवेट बिल्डर को मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए। किसी भी शहर में सबसे बड़ी समस्या पानी की निकासी की होती है। अगर ड्रेनेज सिस्टम सही नहीं होगा तो वहां रहने वाले लोगों को भी परेशानी होगी और बाहर से आने वाले लोगों को भी अच्छा नहीं लगेगा। ड्रेनेज सिस्टम ऐसा होना चाहिए कि पानी और गंदगी कहीं भी जमा न हो। स्मार्ट सिटी में खुली नालियां नहीं रखी गई हैं, इसलिए इस पर भी विचार करना चाहिए कि खुली नालियों को कैसे बंद किया जाए। नाली केवल पानी की निकासी के लिए होनी चाहिए, गंदगी के लिए नहीं। कम्युनिटी सेंटर पर्यटकों के लिए खोले उन्होंने कहा कि, शहरों की प्लानिंग पहले स्थानीय लोगों को ध्यान में रखकर की गई थी, लेकिन बाहर से आने वाले लोगों की जरूरतों को ध्यान में नहीं रखा गया। आज पर्यटन बढ़ रहा है, इसलिए पर्यटकों के लिए भी सुविधाएं होनी चाहिए। अभी ज्यादातर जगहों पर केवल थ्री-स्टार, फाइव-स्टार या उससे बड़े होटल ही हैं। ऐसे में गरीब व्यक्ति के लिए भी ठहरने की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके लिए सामुदायिक केंद्रों में कम खर्च में ठहरने की सुविधा दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि, शहर में आने वाले लोगों को एआई के माध्यम से सारी जानकारी आसानी से मिलनी चाहिए, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। साथ ही टैंपो या ऑटो में किराये को लेकर धोखाधड़ी न हो, इसके लिए भी व्यवस्था करनी चाहिए। शहर में लगाए गए संकेतक ऐसे होने चाहिए कि बाहर से आने वाला व्यक्ति भी आसानी से अपनी मंजिल तक पहुंच सके। छोटे-छोटे इनोवेशन भी शहर को बेहतर बनाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। शहरों की प्लानिंग पर ध्यान दिया प्रशासक ने कहा – शहरी बसावट लगातार बढ़ रही है। पहले किसी ने नहीं सोचा था कि शहर इतने बढ़ जाएंगे, लेकिन अब लोग शिक्षा और रोजगार के लिए शहरों में आ रहे हैं। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था में सरकारी और निजी संस्थानों के बीच अंतर कम करना होगा। अगर सरकारी स्कूल अच्छे होंगे तो सभी को समान अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि नगर पालिकाओं को शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर के हिसाब से विकास की योजना बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि, नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई स्मार्ट सिटी मिशन के तहत देश के 100 शहर चुने गए थे, जिनमें बेहतर शहरी विकास की कोशिश की गई। कई बार योजनाओं में बदलाव भी करने पड़ते हैं, ताकि शहरों को बेहतर बनाया जा सके।

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