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कहा-आरबीआई के निर्देश के अनुसार तीन दिन में सूचना देने पर ग्राहक की नहीं होती जिम्मेदारी
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। एक कंपनी के बैंक खाते से अनधिकृत रूप से 17.60 लाख रुपये निकाल जाने पर बैंक को ब्याज समेत रुपये वापस करने होंगे। उपभोक्ता आयोग ने आरबीआई बैंक के निदेश का हवाला देते हुए माना कि इसके लिए खाताधारक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। यह गलती बैंक की है और उसे भुगतान करना होगा। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल की अदालत ने दिया है।
सेक्टर-16 निवासी पटेल ने कार्स कंपनी की तरफ से आयोग में दायर की गई याचिका में बताया कि तीन सितंबर 2019 को उनके फर्म के बैंक खाते से 17.60 लाख रुपये किसी ने निकाल लिए। अगले दिन चार सितंबर को उन्होंने इसकी शिकायत सेक्टर-43 स्थित बैंक कार्यालय के साथ ही साइबर थाने पुलिस को भी दी। इस मामले में बैंक तरफ से आयोग में कहा गया कि शिकायतकर्ता की लापरवाही की वजह से खाते से रुपये गए हैं। ऐसे में वह उत्तरदायी नहीं है।
आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरबीआई के 16 जुलाई 2017 के निर्देश का हवाला देते हुए कहा कि अगर पीड़ित अनधिकृत रूप से रुपये निकलने के तीन कार्य दिवसों के अंदर बैंक को सूचना देता है तो ग्राहक की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। उसी निर्देश में यह भी है कि यदि धोखाधड़ी होने वाले दिन से तीन दिनों के अंदर बैंक को सूचना मिल गई तो ग्राहक की देयता शून्य होगी। आयोग ने एचडीएफसी बैंक को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को 17.60 लाख रुपये नौ प्रतिशत से दें। इस दौरान उन्हें हुई मानसिक परेशानी पर 75 हजार रुपये का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पर खर्च के लिए 55 हजार रुपये भी देने होंगे।
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Gurugram News: अनधिकृत रूप से खाते से निकले थे 17.60 लाख, बैंक करेगा ब्याज समेत वापस




