एन. रघुरामन कॉलम: ‘क्विक सर्विस’ एक नशा है, जो रिटेलर्स मुफ्त में देकर आदत लगा रहे हैं Politics & News

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34 मिनट पहले

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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

‘क्या आप देख सकते हैं कि दरवाजे पर कौन है?’ वॉशरूम से पत्नी का यह फरमान सुन कर मैं अपने कंप्यूटर से उठा और फ्रंट डोर की ओर चल पड़ा। डिलीवरी बॉय ने दरवाजा खुलने का भी इंतजार नहीं किया। उसने बैग ताले पर टांगा और निकल गया।

मैंने पेपर बैग उठाया तो यह अमेजन डिलीवरी थी, जिसमें ताजा ब्रेड और कुछ किराना सामान था। उन्हें किचन में रखते हुए मैंने यूं ही कहा, ‘अगर आप मुझे बता देतीं कि ऑर्डर करने वाली हो तो मैं शेविंग रेजर भी मंगा लेता। इस बार मुझे उसके बिना ही यात्रा करनी पड़ी।’

उन्होंने कहा, ‘शेविंग रेजर तो हर दुकान में मिलते हैं, वहां से क्यों नहीं खरीदते?’ मुझे उन्हें बताना पड़ा कि ये इलेक्ट्रिक रेजर के ब्लेड हैं और ज्यादातर बड़े इलेक्ट्रॉनिक स्टोर्स में ही मिलते हैं। एक ब्लेड की कीमत 799 रुपए है और दो ब्लेड ऑर्डर करूं तो 1399 रुपए में मिलते हैं।

उन्होंने अमेजन पर दो ब्लेड ऑर्डर कर दिए और हमें हैरान करने वाली दो बातें हुईं। खरीद 1300 रुपए से अधिक थी तो 200 रुपए का डिस्काउंट मिला और डिलीवरी का वादा था ‘आठ मिनट में।’ मैं जूते पहन पाता, इससे पहले अमेजन का डिलीवरीकर्मी बड़े बैग के साथ फिर से दरवाजे पर था, जिसमें एक छोटे से पैकेज के भीतर ‘फिलिप्स वन ब्लेड’ के वे दो ब्लेड थे। पत्नी ने कहा, ‘याद रखो, कुछ एजेंसियां सचमुच ‘क्विक सर्विस’ के वादे पर खरी उतरती हैं।’

यात्रा के दौरान मैंने यह अनुभव अपनी अमेरिका में रहने वाली बेटी को सुनाया। उसने तुरंत कहा, ‘वे आपको जाल में फंसा रहे हैं।’ फिर उसने मुझे पूरी तरह समझाया कि कैसे विकसित देशों में अब ‘क्विक सर्विस’ पेड सर्विस बन चुकी है। वहां फ्री डिलीवरी तभी मिलती है, जब आप नौ वर्किंग डेज तक इंतजार को तैयार हों। हां, सही पढ़ा- नौ वर्किंग डेज।

ग्राहक जुटाने की जंग में कई वर्षों तक ऑनलाइन रिटेलर्स फास्ट शिपिंग का खर्च खुद उठाते रहे। लेकिन समय के साथ शिपिंग लागत बढ़ी, खासकर होम डिलीवरी की, तो कई कंपनियों के लिए ऑनलाइन ऑर्डर पर तुरंत संतुष्टि दे पाना बेहतर बिजनेस स्ट्रेटजी नहीं रहा।

जब कंपनियों ने यह समझा तो उन्हें एक और हैरतअंगेज सीक्रेट पता चला कि जो ग्राहक सामान के लिए कई दिन इंतजार करते हैं, उनके ऑर्डर रिटर्न करने की संभावना कम होती है। आज ये कंपनियां ‘सबसे तेज पहुंचाने’ से ज्यादा ‘सबसे सस्ते तरीके से पहुंचाने’ के रास्ते तलाश रही हैं।

अमेजन, फेडएक्स और यूनाइटेड पार्सल सर्विस (यूपीएस) जैसे सर्विस प्रोवाइडर्स इस्तेमाल करने वाले रिटेलर्स अब उन्हें शिपमेंट की चीजों के आधार पर वर्गीकृत कर रहे हैं। मसलन, अगर भेजने वाली चीज टी-शर्ट है तो फेडएक्स उपयुक्त नहीं, लेकिन यदि ऑरा रिंग्स है तो फिर यह सही है।

इसके अलावा, उपभोक्ताओं की प्राथमिकता भी बदल रही है। दो साल पहले जो लोग डिलीवरी कॉस्ट से ज्यादा स्पीडी डिलीवरी पसंद करते थे, वे अब किफायती ग्राउंड ट्रांसपोर्टर चुन रहे हैं। अगर बचाए गए पैसे से उनका एक समय का भोजन आ सकता है तो वे इंतजार करने को तैयार हैं। अमेरिका में एक सर्वे में शामिल आबादी के 95% लोग फ्री डिलीवरी को प्राथमिकता देते हैं, भले ही 7-9 वर्किंग डेज लगें।

वहां होम डिलीवरी ने अब एक नया रूप ले लिया है। अगर आप सर्विस प्रोवाइडर के लिए कम व्यस्त दिन चुनते हैं, तो आपसे कम शुल्क लिया जाता है। कंपनियां अब ‘नो-रश’ डिलीवरी ऑप्शन की मार्केटिंग कर रही हैं, जिसमें डिस्काउंट मिलता है और इसे पर्यावरण अनुकूल भी बताया जाता है।

फंडा यह है कि सर्विस प्रोवाइडर्स द्वारा मुफ्त में दी गई ‘क्विक सर्विस’ शराब से कम नहीं, जो हमें धीरे-धीरे आलसी बना रही है। जब वे जान जाते हैं कि हम आलस्य के आदी हो चुके हैं तो वे हमसे प्रीमियम चार्ज वसूलने लगती हैं। यह एक सफल वैश्विक बिजनेस मॉडल है।

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