ईरान-इजराइल तनाव से चीन को झटका: मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग; चीन के 8 लाख करोड़ दांव पर, डिसेलिनेशन से लेकर टेक प्रोजेक्ट्स तक सब खतरे में Today World News

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मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध चीन के लिए‎ खतरनाक साबित हो सकता है। दरअसल चीन ने‎ मिडिल ईस्ट में भारी निवेश किया हुआ है। साथ ‎ही ये क्षेत्र उसके इस्पात, इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर पैनलों के लिए बड़ा बाजार है।‎ ईरान के रूप में चीन को तेल का सस्ता स्रोत‎ मिला था। पूरे क्षेत्र में उसे ऐसी सरकारें भी मिलीं,‎जो नवीकरणीय ऊर्जा और प्रौद्योगिकी में चीन से‎ सीखने के लिए उत्सुक थीं। इन्हीं सब के बीच‎ चीन तेल और गैस‎ के लिए मध्य पूर्व की आपूर्ति‎ पर निर्भर हो गया। जब ‎पिछले साल अमेरिका से ‎चीन की व्यापारिक प्रतिद्वंद्विता बढ़ी तो वह अमेरिकी‎ बाजार में अपने कई सामान बेचने में असमर्थ रहा,‎ जो कभी चीन का सबसे बड़ा बाजार था। इसके‎ बाद चीन के लिए मिडिल ईस्ट का महत्व और भी‎ अधिक स्पष्ट हो गया था।‎ संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) चीनी कारों के‎ लिए सबसे तेजी से बढ़ता बाजार बन गया।‎ सऊदी अरब और उसके पड़ोसी देशों की ओर से ‎चीनी स्टील की मांग दोगुनी हो गई। 2025 में‎ मिडिल ईस्ट को चीन का निर्यात बाकी दुनिया के ‎‎निर्यात की तुलना में लगभग दोगुनी तेजी से बढ़ा ‎है। लेकिन अब ये खतरे में है।‎ मध्य पूर्व में चीन के गहरे वित्तीय संबंधों के ‎‎बावजूद उसे जोखिमों का सामना करना पड़ रहा‎ है। चीन ने जल्द लड़ाई बंद करने का आह्वान किया ‎है। ईरानी धमकियों के कारण होर्मुज स्ट्रेट से ‎‎आवाजाही कम हो गई है। चीनी शिपिंग कोस्को ने ‎इस क्षेत्र के माध्यम से बुकिंग बंद कर दी है।‎ चीनी निवेश मिडिल ईस्ट में दुनिया में कहीं‎ और की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है। यूरेसिया ग्रुप‎ में चीन की निदेशक डैन वांग कहा कि 2019 से ‎‎2024 तक चीन ने मध्य पूर्व में सीधे 89‎ बिलियन डॉलर यानी करीब 8 लाख करोड़ रुपए‎ का निवेश किया। ये व्यापारिक संबंध अब निशाने‎ पर हैं क्योंकि अमेरिकी और इजरायली सेनाएं ईरान‎ पर हमला कर रही हैं और ईरान पूरे क्षेत्र में‎ बंदरगाहों, जहाजों, पाइपलाइनों, डिसेलिनेशन ‎संयंत्रों, डेटा केंद्रों पर जवाबी हमला कर रहा है।‎ विलियम एंड मैरी रिसर्च इंस्टीट्यूट एडडेटा के‎ अनुसार 2023 में मिडिल ईस्ट में चीन का ऋण‎ और अनुदान दोगुना होकर वैश्विक पोर्टफोलियो‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎ का 10% हो गया। चीन ईरानी तेल का मुख्य‎ खरीदार है। वह तीन प्रमुख कच्चे तेल की ‎पाइपलाइनों का भी संचालन करता है, जिनमें से‎ दो रूस और कजाकिस्तान से तेल का परिवहन‎ करती हैं। फिर भी ईरानी आपूर्ति के नुकसान से‎ चीन को अन्य स्रोत खोजने के लिए मजबूर होना‎ पड़ेगा। खोज पूरी हो भी जाएगी लेकिन कीमत‎ तेहरान से खरीदे गए रियायती तेल की तुलना में‎ बहुत अधिक होगी। तनाव से कंपनियों का काम थमा‎
मिडिल ईस्ट में कई चीनी कंपनियों ने‎ कर्मचारियों को घर से काम करने को कहा।‎ 1 मार्च को दिग्गज टेक कंपनी बाइडू ने‎यूएई में रोबोटैक्सी सेवाओं को रोकने की‎ बात कही। चीनी फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म ‎कीटा ने भी संकेत दिया है कि क्षेत्र में‎ सेवाएं निलंबित या सीमित हो सकती हैं।‎ इजराइल और यूएई में पोर्ट‎संचालित कर रहा है चीन कतर में चीनी बैंक तरलीकृत प्राकृतिक गैस‎(LNG) उत्पादन सुविधा के बड़े विस्तार को फंड ‎दे रहे हैं। चीनी सरकारी तेल कंपनी सिनोपेक की‎ इसके नॉर्थ फील्ड ईस्ट विस्तार प्रोजेक्ट में‎ हिस्सेदारी है। चीनी निवेशकों ने इजराइल के हाइफा‎पोर्ट और अमीरात के खलीफा पोर्ट को भी फंडिंग‎दी है। कई टर्मिनल चीनी कंपनियों के स्वामित्व में हैं‎ और उनके द्वारा संचालित हैं।‎‎ क्षेत्र में डिसेलिनेशन प्लांट में ‎चीन सबसे बड़ा निवेशक‎ ईरान में चीनी कंपनियों ने इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रिक‎ग्रिड और पेट्रोकेमिकल संयंत्र बनाए हैं‎। चीन क्षेत्र में ‎डिसेलिनेशन में सबसे बड़ा निवेशक भी है। पावर‎ कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन ऑफ चाइना ने सऊदी‎ अरब, यूएई, ओमान और इराक में परियोजनाएं‎‎ बनाई हैं। हुआवे, अलीबाबा, टेनसेंट जैसी प्रमुख‎ चीनी टेक कंपनियों के दुबई में ऑफिस हैं।‎

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