सिर्फ इंडस्ट्रियल सिटी नहीं है फरीदाबाद, महाभारत के पांडवों से जुड़ा है नाता Haryana News & Updates

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फरीदाबाद को लोग अक्सर सिर्फ इंडस्ट्रियल सिटी के रूप में जानते हैं, लेकिन इसकी पहचान इससे कहीं ज्यादा गहरी है. महाभारत काल के तिलप्रस्थ से लेकर तोमर वंश, सम्राट हर्षवर्धन और मुगल काल तक यह शहर इतिहास के कई दौरों का गवाह रहा है. बाबा फरीद के नाम पर बसा यह शहर आज विकास और विरासत दोनों की मिसाल बन चुका है.

फरीदाबाद: फरीदाबाद सिर्फ फैक्ट्रियों और मशीनों का शहर नहीं है. इसकी गलियों में इतिहास भी सांस लेता है. लोग इसे औद्योगिक नगरी कहकर आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन असल में ये जगह कई दौरों की गवाह रही है. महाभारत काल से लेकर मुगल सल्तनत और आज के मॉडर्न इंडिया तक फरीदाबाद का नाम हर जगह मिलता है. यही वजह है कि इसे सिर्फ इंडस्ट्रियल सिटी कहना थोड़ा गलत होगा. यहां कई ऐसे गांव और ऐतिहासिक जगहें हैं जिनकी जड़ें हजारों साल पुरानी हैं.

कैसे पड़ा फरीदाबाद नाम

Local18 से बात करते हुए इतिहास की प्रोफेसर डॉ. सुप्रिया ढांडा बताती हैं कि फरीदाबाद का नाम सूफी संत बाबा फरीद के नाम पर रखा गया. कहते हैं मुगल बादशाह जहांगीर के समय इस शहर की नींव पड़ी थी. उस समय जीटी रोड की सुरक्षा के लिए यहां बस्ती बसाई गई. ओल्ड फरीदाबाद में बाबा फरीद की दरगाह आज भी मौजूद है. सफेद संगमरमर से बनी ये दरगाह लोगों की आस्था का बड़ा केंद्र है. इतिहासकार मानते हैं मुगल काल में 1607 में फरीदाबाद की शुरुआत हुई थी.

क्या है फरीदाबाद का पुराना नाम

फरीदाबाद का रिश्ता महाभारत से भी जुड़ा है. माना जाता है कि पांडवों ने कौरवों से पांच गांव मांगे थे उन्हीं में एक था तिलप्रस्थ जो की फरीदाबाद में आता है और भी सूरजकुंड का इतिहास भी कम दिलचस्प नहीं है. कभी यहां तोमर राजाओं का राज था फिर सम्राट हर्षवर्धन के समय भी इस इलाके की अहमियत रही. सूरजकुंड आज भी अपने पुराने रंग और सालाना मेले के लिए फेमस है.

गुरुग्राम से हुआ अलग

समय के साथ फरीदाबाद ने खुद को भी बदला है. पहले ये गुरुग्राम जिले का हिस्सा था, लेकिन 15 अगस्त 1979 को इसे अलग जिला बना दिया गया. आज ये NCR यानी नेशनल कैपिटल रीजन का अहम हिस्सा है. 1947 के बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आए शरणार्थी यहां आकर बस गए खासतौर पर एनआईटी इलाके में. इसके बाद फरीदाबाद ने तेजी से तरक्की की और कई बड़ी कंपनियां जैसे एस्कॉर्ट, जेसीबी यहां आ गईं.

इतिहास और विकास का मिलाजुला चेहरा है फरीदाबाद

आज फरीदाबाद को लोग इंडस्ट्रीज के लिए जानते हैं, लेकिन इसके पीछे छुपा इतिहास भी कम नहीं है. महाभारत, तोमर वंश, हर्षवर्धन, मुगल काल और फिर आज का भारत हर दौर में फरीदाबाद की पहचान बनी रही है. इसी वजह से फरीदाबाद को इतिहास और विकास का मिलाजुला चेहरा कहा जा सकता है.

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Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें

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