डायने कॉयल का कॉलम: एआई की मदद से ‘वन-मैन- यूनिकॉर्न’ भी अब सम्भव है Politics & News

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कई लोगों को डर है कि एआई नौकरियों के लिए बड़ा संकट साबित हो सकता है। इस वर्ष वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की सालाना बैठक में भी रोजगार पर इस तकनीक के प्रभाव को लेकर चेतावनी दी गई। हाल के दिनों में व्हाइट-कॉलर जॉब्स में कटौती की घोषणाओं को व्यापक रूप से आने वाले समय के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन बिजनेस पर एआई के व्यापक प्रभावों पर अभी तक इतना ध्यान नहीं दिया गया है। अभी तक तो अधिकांश कम्पनियों ने एआई को नहीं अपनाया है, लेकिन जैसे-जैसे इसका उपयोग बढ़ेगा, कम्पनियों के भीतर भी बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिलेंगे। कारण- एआई सूचना-प्रौद्योगिकी है, जो निर्णय लेने की प्रक्रियाओं को गहराई से प्रभावित करती है। इससे पहले डिजिटल टेक्नोलॉजी ने भी व्यवसायों को कई तरह से बदल दिया था। कम्प्यूटेशन और कम्युनिकेशंस में हुई प्रगति ने इंटरनेट को जन्म दिया, जो स्मार्टफोन और वायरलेस नेटवर्क तकनीकों के आगमन के साथ मोबाइल हो गया। डिजिटलीकरण का एक और परिणाम प्लेटफॉर्म आधारित कारोबारी मॉडलों का उदय रहा है, जो एल्गोरिदम का उपयोग करके आपूर्तिकर्ताओं और ग्राहकों के बीच मध्यस्थता करते हैं और डिजिटल बुनियादी ढांचे पर व्यापक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क खड़े करते हैं। डेटा और एल्गोरिदम से संचालित ऐसे प्लेटफॉर्म कई क्षेत्रों में सक्रिय हैं और उन्होंने रोजगार तथा उपभोग दोनों के पैटर्न को बदल दिया है। लेकिन एआई कम्पनियों को किस तरह से बदलेगा। संगठनात्मक क्षमताएं ही किसी कम्पनी के टिकाऊ प्रतिस्पर्धात्मक मुनाफे का स्रोत होती हैं (जैसे कि डेल की प्रमुख अमूर्त सम्पत्ति उसकी आपूर्ति शृंखला है)। लेकिन एआई उन क्षमताओं को बदल रहा है, जो वास्तव में मायने रखती हैं- और उन्हें मापना भी कठिन बना रहा है। कुछ उद्योग विशेष रूप से एआई से उत्पन्न व्यवधान के प्रति संवेदनशील दिखाई देते हैं। कई विश्लेषकों ने पहले ही संकेत दिया है कि यह तकनीक कानून, अकाउंटिंग और फाइनेंस जैसे क्षेत्रों में शुरुआती स्तर की नौकरियों को ऑटोमेट कर सकती है। इसी तरह, टेक कम्पनियां अपने ही एआई मॉडलों का उपयोग सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में लगने वाले समय और लागत को घटाने के लिए कर रही हैं, जिससे संकेत मिलता है कि कम्प्यूटर प्रोग्रामरों की संख्या कम हो सकती है। लेकिन यदि कम्पनियों के निचले स्तर के पद घटा दिए जाते हैं, तो वे यह कैसे सुनिश्चित करेंगी कि भविष्य के कर्मचारी आवश्यक विशेषज्ञता हासिल कर सकें? ऐसे संकेत उभर रहे हैं कि कोड लिखने के लिए एआई का उपयोग मानव कर्मचारियों की स्किल्स ​विकसित करने की प्रक्रिया को कमजोर कर सकता है। ओपनएआई के सैम आल्टमैन ने तो यहां तक भविष्यवाणी की है कि एक व्यक्ति द्वारा संचालित यूनिकॉर्न (अरब-डॉलर का स्टार्टअप) भी सम्भव हो सकता है। एआई एजेंट विभिन्न संस्थाओं के बीच बातचीत में मौजूद जटिलताओं को कम कर सकते हैं और आपूर्ति शृंखलाओं की निगरानी भी कर सकते हैं। लेकिन कुछ अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि जनरेटिव एआई में मनुष्य की बुद्धिमत्ता में निहित उस ‘टैसिट नॉलेज’ को पकड़ने की भी क्षमता होगी, जिस पर हर बिजनेस निर्भर करता है। एक छोटा-सा उदाहरण देखें : लंदन अंडरग्राउंड के लिए काम करने वाले एक मेंटेनेंस इंजीनियर ने यह पता लगाया था कि विक्टोरिया लाइन पर चलने वाली गाड़ियों के पहियों में अतिरिक्त ग्रीज़ की आवश्यकता होती है, क्योंकि इस लाइन की पटरियां असामान्य रूप से घुमावदार हैं। जब वह कर्मचारी सेवानिवृत्त हुआ, तो यह व्यावहारिक जानकारी भी उसके साथ ही चली गई और विक्टोरिया लाइन की ट्रेनों में बार-बार खराबी आने लगी। इस तरह का ‘टैसिट नॉलेज’ औपचारिक रूप से सिखाया नहीं जाता। लेकिन यदि यह कर्मचारियों की बार-बार दोहराई जाने वाली क्रियाओं में दिखता है तो नए एआई एप्लिकेशंस ऐसे कौशलों को पकड़कर उन्हें कोडिफाई कर सकते हैं। कॉर्पोरेट लीडर्स को सोचना चाहिए कि जनरेटिव एआई को अपने संगठनों में किस तरह इंटीग्रेट करें। वह उनकी उत्पादन प्रक्रियाओं को कैसे बदल सकता है, किस प्रकार के ‘टैसिट नॉलेज’ का अधिक प्रभावी उपयोग कर सकता है और निर्णय लेने की जिम्मेदारी किसके पास होनी चाहिए। नई तकनीकी लहर के बीच बिजनेस समूहों को अपनी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनाए रखने के लिए स्पष्ट योजना तैयार करनी होगी। एआई हमारे कामकाज की प्रकृति के सा​थ ही बिजनेस के परिदृश्य को भी नए सिरे से बदलने वाला है। (@प्रोजेक्ट सिंडिकेट)

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