माइक के आगे फोम कवर क्यों लगा होता है? जानिये इसके काम और फायदे Today Tech News

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टीवी के रिपोर्टर का माइक हो या किसी पॉडकास्टर के स्टूडियो का माइक, इन सबके आगे एक फोम कवर लगा होता है. आमतौर पर नोटिस न किए जाने वाली यह चीज बहुत काम की है. अगर यह कवर यूज न किया जाए तो माइक के खराब होने का खतरा रहता है और ऑडियो की क्वालिटी भी खराब हो सकती है. आज हम आपको बताएंगे कि माइक के आगे कवर फोम क्यों लगाया जाता है और इसके फायदे क्या हैं.

क्यों पड़ती है फोम कवर की जरूरत?

फोम कवर को माइक के रिकॉर्डिंग वाले हिस्से पर लगाया जाता है. यह डिवाइस को हवा से बचाता है. खासकर जब आउटडोर स्पेस में रिकॉर्डिंग करनी हो तो हवा का जरा-सा झोंका ऑडियो क्वालिटी को खराब कर सकता है. यह फोम कवर हवा से माइक को बचाता है. इसके अलावा मूवमेंट और कई बार बोलते समय मुंह से आने वाली हवा भी माइक कैच कर सकता है, जिससे ऑडियो क्वालिटी खराब हो जाती है. इन सबसे बचने के लिए फोम कवर की जरूरत पड़ती है.

फोम कवर क्या काम करता है?

इस कवर का असली काम माइक्रोफोन के डायाफ्राम को हवा से बचाना होता है. डायाफ्राम एक पतली मेम्ब्रेन होती है, जिसे कान के पर्दे की तरह समझा जा सकता है, जो साउंड प्रैशर के रिस्पॉन्स में वाइब्रेट करता है और अकाउस्टिक एनर्जी को इलेक्ट्रिक सिग्नल में कन्वर्ट करता है. अगर कवर न लगा हो तो हवा के कारण ऑडियो सिग्नल में पॉप क्रिएट हो सकता है. इसी तरह अगर हवा ज्यादा तेज हो तो मेम्ब्रेन के खराब होने का डर रहता है. ऐसे में यह कवर हवा को मेम्ब्रेन तक पहुंचने से रोक लेता है.

अलग-अलग टाइप के होते हैं कवर

माइक्रोफोन के लिए फोम कवर के अलावा कई और टाइप के भी कवर होते हैं. फोम कवर 8 डेसिबल तक हवा को कम कर इसे अलग-अलग डायरेक्शन में डायवर्ड कर देते हैं. ये किफायती और हल्के होते हैं और इन्हें कम हवा वाली जगहों पर यूज किया जा सकता है. तेज हवा वाली जगहों पर सिथेंटिक फर वाले कवर यूज किए जाते हैं, जो हवा से 25-40 dB तक प्रोटेक्शन देते हैं. इसके अलावा स्टूडियो आदि में मेटल और फ्रैबिक कवर का भी यूज किया जाता है.

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