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फरीदाबाद: हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने साफ-साफ कहा है कि 2025 की बाढ़ में जिन किसानों की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई उन्हें सरकार मुआवजा देगी. ये खबर सुनते ही कई गांवों में किसानों को फिर से उम्मीद जगी है खासकर वहां जहां बाढ़ ने खेती का नामोनिशान मिटा दिया था. फरीदाबाद के मंझावली गांव के किसान भी इसी कतार में हैं. वहां के ज्यादातर लोग खेती पर ही निर्भर हैं और बाढ़ के बाद उनकी हालत और भी खराब हो गई है.
किसानों ने सुनाया दर्द
Local18 से बात करते हुए किसानों ने अपना दर्द खुलकर बताया. उनके लिए 2025 की बाढ़ किसी कहर से कम नहीं थी. गांव के खेतों में 7 से 8 फीट तक पानी भर गया. धान की सारी फसल डूब गई सबकुछ तबाह हो गया. कई किसानों ने बताया कि किसी का 15 लाख का नुकसान हुआ किसी का 20 लाख तक लेकिन आज तक सरकार की तरफ से एक रुपया तक नहीं मिला.
कोई मुआवजा नहीं मिला
सुमित शर्मा जो खुद किसान हैं बताते हैं कि उनकी 5 एकड़ की धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई. अभी तक उन्हें कोई मुआवजा नहीं मिला. मीडिया के जरिए ही उन्हें पता चला कि मुख्यमंत्री ने मुआवजे का ऐलान किया है. सुमित मानते हैं कि अगर सरकार से मुआवजा मिल गया तो किसानों को बड़ी राहत मिलेगी क्योंकि नुकसान सच में बहुत बड़ा है.
खेती शुरू करने के लिए कर्ज लेना पड़ा
दयाचंद भाटी की कहानी भी कम दर्दनाक नहीं है. उन्होंने 15 से 16 एकड़ में धान बोया था, लेकिन बाढ़ ने सब चौपट कर दिया. बेचने के लिए एक दाना तक नहीं बचा ना धान बिक पाया ना बाजरा. हालात ऐसे बन गए कि फिर से खेती शुरू करने के लिए कर्ज लेना पड़ा. दयाचंद कहते हैं सरकार की तरफ से अब तक कोई मदद नहीं मिली. अब गेहूं की फसल से थोड़ी उम्मीद है, वो भी कर्ज पर बोई है. उन्हें भरोसा है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी किसानों की परेशानी समझेंगे और मुआवजा जरूर दिलवाएंगे.
किसान पहले से ही कर्ज में डूबे हैं
राम कुमार यादव ने बताया कि बाढ़ में उनका करीब 25 से 30 एकड़ का नुकसान हुआ. धान और बाजरा दोनों बोया था लेकिन सब डूब गया. सरकार से कुछ नहीं मिला लेकिन बजट में आई घोषणा के बाद उन्हें लगता है कि शायद अब मदद मिलेगी. राम कुमार कहते हैं किसान पहले से ही कर्ज में डूबे हैं मजबूरी में और कर्ज लेकर गेहूं बोई है. किसान दिन-रात मेहनत करते हैं लेकिन जब ऐसी आफत आती है तो सारी मेहनत मिट्टी हो जाती है.
नरेश कुमार ने भी अपना हाल सुनाया. उन्होंने 10 एकड़ में धान बोया था जिसमें से कुछ जमीन पट्टे पर ली थी. कुल 4 लाख रुपये की लागत आई लेकिन बाढ़ ने सब खत्म कर दिया. नरेश बताते हैं 2023 की बाढ़ में थोड़ी बहुत मदद मिली थी, लेकिन इस बार अब तक कुछ नहीं मिला.
किसानों की अब पूरी नजर सरकार की घोषणा पर टिकी है
गांव के सभी किसानों की अब पूरी नजर सरकार की घोषणा पर टिकी है. सबको उम्मीद है कि जल्द मुआवजा मिलेगा ताकि वे अपने नुकसान की भरपाई कर सकें और फिर से खेती पटरी पर ला सकें. बाढ़ ने वाकई उनकी कमर तोड़ दी है अब सरकार ही उनकी सबसे बड़ी उम्मीद है.
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