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क्या आप या आपके घर का कोई युवा बिना सोचे-समझे बड़ी प्लेट भरकर खाना खा लेता है। क्या बाय वन गेट वन या जंबो पैक का ऑफर देखकर खाने की मात्रा बढ़ जाती है। अगर हां तो यह खबर आपके लिए है। चंडीगढ़ के कॉलेज छात्रों पर किए गए शोध ने साबित किया है कि सिर्फ खाने की मात्रा पर नियंत्रण कर लेने से मोटापे पर प्रभावी काबू पाया जा सकता है।
पीजीआई के विशेषज्ञों की ओर से किया गया यह महत्वपूर्ण शोध जर्नल ऑफ हेल्थ, पोपुलेशन एंड न्यूट्रीशन में प्रकाशित हुआ है। शोध 2019–2020 के दौरान शहर के दो कॉलेजों में किया गया। शोध प्रोटोकॉल के तहत संस्थानों के नाम गोपनीय रखे गए हैं। शोध का नेतृत्व पीजीआई के डॉ. अतुल गुप्ता, डॉ. प्रीतम हलदर, डॉ. मधु गुप्ता, डॉ. पूनम खन्ना और डॉ. रचना श्रीवास्तव सहित विशेषज्ञों की टीम ने किया।
डॉ. रचना ने बताया कि भारत में गैर-संचारी रोग (एनसीडी) तेजी से बढ़ रहे हैं और इनकी जड़ में मोटापा एक बड़ा कारण है। युवावस्था में बढ़ा बीएमआई भविष्य में डायबिटीज, हृदय रोग और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा कई गुना बढ़ा देता है। कॉलेज जीवन वह दौर है जब खानपान की आदतें स्थायी रूप लेती हैं, मील स्किप करना, फास्ट फूड, बड़े पोर्शन और अनियमित दिनचर्या आम बात है। इसी को ध्यान में रखते हुए 18 से 21 वर्ष के 291 छात्रों को दो समूहों में बांटा गया। इंटरवेंशन ग्रुप (149 छात्र) को 6 महीने तक विशेष हेल्थ प्रमोशन कार्यक्रम दिया गया जबकि कंट्रोल ग्रुप (142 छात्र) को कोई हस्तक्षेप नहीं मिला।
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पीजीआई का शोध: थाली हुई छोटी तो कमर हुई पतली, चंडीगढ़ के युवाओं ने छह महीने में पाया मोटापे पर काबू

