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पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में झूठा हलफनामा दाखिल करने के मामले में चंडीगढ़ की अदालत ने वरिंदर कौर को दोषी करार दिया है। यह मामला हाईकोर्ट की ओर से उसके रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से दायर की गई शिकायत पर आधारित था। सुनवाई चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट, चंडीगढ़ में हुई, जहां सीजेएम सचिन यादव ने फैसला सुनाया। जानिए पूरा मामला क्या था सरकारी पक्ष के अनुसार, वरिंदर कौर ने साल 2016 में हाईकोर्ट में एक केस दायर किया था। सुनवाई के दौरान 10 दिसंबर 2018 को अदालत ने उनसे शपथपत्र देकर यह बताने को कहा था कि संबंधित मकान के अलावा उनके नाम कोई और संपत्ति है या नहीं। इसके बाद 13 दिसंबर 2018 को दाखिल हलफनामे में वरिंदर कौर ने कहा कि उसके पास केवल एक ही रिहायशी मकान है और कोई अन्य अचल संपत्ति नहीं है। हालांकि, दूसरी पक्ष की ओर से पेश जमाबंदी रिकॉर्ड में बताया गया कि गरशंकर, जिला होशियारपुर में उसके नाम जमीन में हिस्सा दर्ज है। इस पर हाईकोर्ट ने 20 मई 2019 को टिप्पणी करते हुए इसे तथ्यों को छिपाने और झूठा साक्ष्य देने का प्रयास माना और कार्रवाई के आदेश दिए। रिकॉर्ड में दूसरी जमीन संबधी नहीं बताया अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जब हाईकोर्ट ने आरोपी से शपथपत्र देने को कहा था, तो उसे पूरी जांच करके सही और सच्ची जानकारी देनी चाहिए थी। कोई भी व्यक्ति कोर्ट में हलफनामा देकर बाद में यह नहीं कह सकता कि उसे उसके अंदर लिखी बातों की जानकारी नहीं थी। अदालत ने माना कि आरोपी ने अपने हलफनामे में यह कहा था कि उसके पास सिर्फ एक ही मकान है और कोई अन्य संपत्ति नहीं है, जबकि रिकॉर्ड में दूसरी जमीन का उल्लेख मिला। कोर्ट ने यह भी कहा कि शपथ लेकर गलत जानकारी देना गंभीर अपराध है और इसे साधारण गलती नहीं माना जा सकता। बचाव पक्ष की यह दलील कि आरोपी की झूठ बोलने की मंशा नहीं थी, अदालत ने स्वीकार नहीं की, क्योंकि इसके समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया। अदालत ने माना कि हाईकोर्ट ने शिकायत दर्ज करने से पहले आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की थी। इन सभी तथ्यों को देखते हुए अदालत ने आरोपी को धारा 193 आईपीसी के तहत दोषी करार दिया।
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हाईकोर्ट में झूठा हलफनामा देने पर महिला दोषी करार: चंडीगढ़ CJM कोर्ट का फैसला, रिकॉर्ड में दूसरी जमीन संबधी नहीं बताया – Chandigarh News


