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सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) की चंडीगढ़ बेंच ने चंडीगढ़ पुलिस के तीन कांस्टेबलों के पक्ष में फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि आवेदकों को 2009 की भर्ती के अंतिम चयनित उम्मीदवार के बराबर ‘डिम्ड डेट ऑफ अपॉइंटमेंट’ (काल्पनिक नियुक्ति तिथि) का लाभ दिया जाए। वे चंडीगढ़ पुलिस में कांस्टेबल की उसी भर्ती में शामिल थे, जिसमें कुल 150 पद निकाले गए थे। मेरिट सूची जारी होने के बाद कुछ उम्मीदवारों ने जॉइन नहीं किया, जिसके कारण पद खाली रह गए। इसके बाद उन्हें वेटिंग लिस्ट से नियुक्ति दी गई। जानिए दायर याचिका में क्या बोला….. चंडीगढ़ पुलिस के कांस्टेबल अनिल कुमार, मनदीप और साबिन ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) की चंडीगढ़ बेंच में दायर अपनी याचिका में कहा कि वे वर्ष 2009 में 150 कांस्टेबलों की भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा थे। उनका चयन उसी प्रक्रिया के तहत हुआ था, हालांकि उनका नाम मुख्य चयन सूची की बजाय वेटिंग लिस्ट में था। बाद में मुख्य सूची के कुछ उम्मीदवारों के जॉइन न करने पर उन्हें उसी भर्ती के रिक्त पदों के खिलाफ नियुक्ति दी गई। उन्होंने 4 मई 2010 को जॉइन किया, जबकि मुख्य सूची के उम्मीदवारों ने 11 सितंबर 2009 को जॉइनिंग की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि चूंकि उनकी नियुक्ति उसी मूल विज्ञापन और चयन प्रक्रिया के तहत हुई थी, इसलिए उन्हें भी उसी बैच का हिस्सा माना जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि उन्हें 2009 की भर्ती में अंतिम चयनित उम्मीदवार के बराबर ‘डिम्ड डेट ऑफ अपॉइंटमेंट’ दी जाए। उनका तर्क था कि नियुक्ति में देरी उनकी गलती नहीं थी, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण हुई, इसलिए इसका नुकसान उन्हें नहीं उठाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि डिम्ड डेट न मिलने से उनकी वरिष्ठता प्रभावित हुई है और प्रमोशन के अवसरों में उन्हें पीछे कर दिया गया। कई ऐसे कर्मचारी, जो उनसे बाद में भर्ती हुए या अलग भर्ती प्रक्रिया से आए, उन्हें पदोन्नति का लाभ मिल गया, जबकि उनकी वरिष्ठता का मामला लंबित रखा गया। इससे उनके वेतन निर्धारण, वार्षिक वेतन वृद्धि, पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवा लाभों पर भी असर पड़ा। याचिका में उन्होंने यह भी दलील दी कि पहले भी इसी तरह के मामलों में अदालतों ने समान चयन प्रक्रिया के उम्मीदवारों को डिम्ड डेट और अन्य सेवा लाभ देने के आदेश दिए हैं। इसलिए उनके मामले में भी समानता के सिद्धांत को लागू किया जाए और संबंधित आदेशों को रद्द कर उन्हें उनके बैच के अन्य कांस्टेबलों के बराबर सभी सेवा लाभ प्रदान किए जाएं।कोर्ट ने अपने आदेश में क्या टिप्पणी की कोर्ट ने अपने आदेश में की टिप्पणी…. – सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) की चंडीगढ़ बेंच ने अपने फैसले में स्पष्ट टिप्पणी की कि यह विवाद इस बात पर केंद्रित है कि क्या वेटिंग लिस्ट में रहे और उसी 2009 की 150 कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया के तहत रिक्त पदों पर नियुक्त किए गए आवेदकों को अलग श्रेणी में रखा जा सकता है या नहीं। – ट्रिब्यूनल ने साफ कहा कि पूरी भर्ती प्रक्रिया एक ही थी। मेरिट लिस्ट और वेटिंग लिस्ट दोनों उसी भर्ती का हिस्सा थीं। जिन आवेदकों को बाद में नौकरी मिली, उनकी नियुक्ति किसी नई भर्ती से नहीं हुई थी। उन्हें उन्हीं 150 पदों पर रखा गया था, जो मुख्य सूची के कुछ उम्मीदवारों के जॉइन न करने की वजह से खाली रह गए थे। – कोर्ट ने कहा कि जब पद उसी पुराने विज्ञापन के थे और भर्ती भी उसी प्रक्रिया से हुई थी, तो सिर्फ इस वजह से कि उम्मीदवारों ने बाद में जॉइन किया, उन्हें डिम्ड डेट ऑफ अपॉइंटमेंट से वंचित नहीं किया जा सकता। अगर जॉइनिंग में देरी प्रशासन की वजह से हुई थी, तो इसका नुकसान उम्मीदवारों को नहीं होना चाहिए। – ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि पहले के अदालत के फैसलों में साफ किया जा चुका है कि जब भर्ती प्रक्रिया और पद एक ही हों, तो उसी मेरिट सूची से चुने गए सभी उम्मीदवारों को बराबर लाभ मिलना चाहिए। ऐसे मामलों में सबके साथ समान व्यवहार होना चाहिए और किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता। – कोर्ट ने कहा कि सिर्फ पंजाब पुलिस नियम 12.2 का हवाला देकर वरिष्ठता को केवल जॉइनिंग की तारीख से जोड़ना सही नहीं है, क्योंकि यह मामला उसी भर्ती और उन्हीं पदों से जुड़ा है। – अंत में ट्रिब्यूनल ने माना कि आवेदकों की मांग सही है और उन्हें अंतिम चयनित उम्मीदवार के बराबर डिम्ड डेट ऑफ अपॉइंटमेंट दी जानी चाहिए। हालांकि, उन्हें पिछली अवधि की बकाया सैलरी नहीं मिलेगी, लेकिन वरिष्ठता, प्रमोशन, वेतन तय करने, पेंशन और अन्य रिटायरमेंट लाभ कागजी आधार पर दिए जाएंगे।
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चंडीगढ़ पुलिस के 3 कांस्टेबलों को ‘डिम्ड डेट’ का लाभ: वरिष्ठता और प्रमोशन तय होंगे, मेरिट लिस्ट और वेटिंग लिस्ट उसी भर्ती का हिस्सा – Chandigarh News


