सिर्फ शराब ही नहीं, आपकी खराब लाइफस्टाइल भी बना रही है लिवर को बीमार; जानें कैसे बचें? Health Updates

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Why Fatty Liver Is Found During Routine Checkup: कई लोग बिल्कुल सामान्य महसूस करते हुए नियमित हेल्थ चेकअप के लिए जाते हैं और अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में चुपचाप लिखा मिलता है फैटी लिवर की दिक्कत. न तेज दर्द, न कोई गंभीर लक्षण. यही इस दिक्कत की सबसे बड़ी वजह है कि इसके लक्षण दिखाई नहीं देते हैं. इसे मेडिकल टर्म में मेटाबॉलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टियाटोटिक लिवर डिजीज कहा जाता है. जब लिवर के कुल वजन का 5 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा फैट बन जाए, तो इसे फैटी लिवर माना जाता है. शुरुआत शांत रहती है, लेकिन बढ़ने पर यह सिरोसिस तक पहुंच सकता है.

क्यों अक्सर इत्तफाक से पता चलता है?

लिवर बेहद सहनशील अंग है. शुरुआती चरण में यह सामान्य काम करता रहता है, डिटॉक्स, प्रोटीन बनाना, पाचन में मदद, सब चलता रहता है. थकान या दाहिने ऊपरी पेट में हल्की भारीपन जैसी शिकायतें अक्सर नजरअंदाज हो जाती हैं. ऑरो सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटना की विशेषज्ञ डॉ. अंजलि सौरभ बताती हैं कि फैटी लिवर अक्सर रूटीन अल्ट्रासाउंड या किसी और वजह से कराए गए स्कैन में सामने आता है. यहां तक कि शुरुआती दौर में लिवर फंक्शन टेस्ट भी सामान्य आ सकते हैं, क्योंकि लिवर में रीजनरेशन की क्षमता अधिक होती है.

शरीर के अंदर क्या हो रहा होता है?

अधिक कैलोरी खासकर रिफाइंड कार्ब्स और मीठे पेय लिवर में फैट के रूप में जमा होने लगती है. समय के साथ यह सूजन, फाइब्रोसिस और गंभीर मामलों में सिरोसिस का कारण बन सकता है. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, यह स्थिति मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और मेटाबॉलिक सिंड्रोम से जुड़ी है. यानी यह सिर्फ लिवर की बीमारी नहीं, बल्कि पूरे मेटाबॉलिज्म का संकेत है.

भारत में तेजी से बढ़ रहे हैं इसके मामले

शहरी लाइफस्टाइल, लंबे समय तक बैठना, प्रोसेस्ड फूड, कम नींद और तनाव इसके मुख्य कारण हैं. अनुमान है कि शहरी भारत में लगभग हर तीसरा एडल्ट फैटी लिवर से प्रभावित हो सकता है . वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने भी लाइफस्टाइल से जुड़ी नॉन कम्युनिकेबल डिजीज के बढ़ते बोझ को लेकर चेतावनी दी है.

क्या शराब इसके पीछे जिम्मेदार?

इसका सीधा सा जवाब है नहीं. बड़ी संख्या में मरीज ऐसे हैं जो शराब नहीं पीते, फिर भी इससे प्रभावित हैं. यह गलतफहमी कई बार लोगों को समय पर कदम उठाने से रोकती है. अच्छी खबर यह है कि शुरुआती चरण में फैटी लिवर रिवर्स हो सकता है. 5 से 10 प्रतिशत वजन कम करने से लिवर फैट घट सकता है. हफ्ते में कम से कम 150 मिनट व्यायाम, मीठे पेय कम करना, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल रखना, ये सभी कारगर कदम हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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