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सीएम नायब सैनी ने वित्त मंत्री के तौर पर सोमवार को दूसरी बार बजट पेश किया।
हरियाणा सरकार के बजट के आंकड़ों ने अगर आपका दिमाग चकरा दिया है और ये आंकड़े समझ से बाहर हो रहे हैं तो हम आपको इन्हें आसान भाषा में समझा देते हैं। सरकार कमाई कैसे करती है, खर्च कैसे करती है, बजट कैसे बनाती है, आपके लिए बजट में क्या है और पैसा जाता कहा
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वित्त मंत्री के रूप में CM नायब सैनी ने 2,23,658.17 करोड़ रुपए का नया बजट पेश किया है। पिछले साल के मुकाबले इस बार बजट में 10.28% की बढ़ोतरी की गई है। आइए समझते हैं कि सरकार की जेब में पैसा कहां से आ रहा है और वह आपके लिए उसे कहां खर्च कर रही है।
इसे ऐसे समझिए कि सरकार ने बजट में 1 रुपए रखा है तो उसमें से 28 पैसे वेतन, पेंशन और बयाज चुकाने में खर्च हो रहे हैं। 72 पैसे अन्य कामों और क्षेत्रों में खर्च हो रहे हैं। सरकार खर्च करने के लिए पैसे का भी इंतजाम करती है।
ये पैसा स्टेट जीएसटी (SGST), वैट, शुल्क और शराब बेचने से मिलने वाले टैक्स से आता है। सबसे ज्यादा पैसा स्टेट जीएसटी से मिलता है। अगर सरकार के पास कुल ₹100 आते हैं, तो उसमें से लगभग ₹47 राज्य अपने टैक्स से कमाता है, ₹34 उधारी से आता है, और करीब ₹14 केंद्र सरकार से मिलते हैं।
बजट की कॉपी पर साइन करते CM नायब सिंह सैनी।
आखिरकार सरकार कहां से लाती है एक रुपया
एक रुपए के आधार पर सरकार की सबसे ज्यादा कमाई 46.79 पैसे खुद के टैक्स से होती है। एसजीएसटी (SGST)से 23.41 पैसे, स्टांप और रजिस्ट्रेशन से 8.72 पैसे, शराब बेचकर 5.88 पैसे, वैट से 5.56 पैसे, वाहन कर 2.91 पैसे और अन्य टैक्स में 0.31 पैसे लाती है। वहीं अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए 34.09 पैसे सरकार को कर्ज भी लेना पड़ता है।
इसमें सबसे बड़ा हिस्सा राज्य विकास ऋण (25.04 पैसे) का है। खाद्यान्न खरीद के लिए 6.75 पैसे और नाबार्ड (NABARD) जैसे संस्थानों से 1.31 पैसे लिए जाते हैं। भारत सरकार से ऋण के रूप में 1.00 पैसा आता है। केंद्र सरकार से 13.71 पैसे मदद के रूप में मिलते हैं। गैर-कर राजस्व 4.86 पैसा अन्य सेवाओं से आता है।

सरकार 1 रुपया खर्च कहां करती है?
बजट का एक बड़ा हिस्सा सरकारी तंत्र को चलाने और पुराने कर्ज को चुकाने में चला जाता है। पुराने आंकड़ों की तरह ही, इस बार भी लगभग 31 पैसे (30-31%) केवल सरकारी कर्मचारियों के वेतन, सेवानिवृत्त लोगों की पेंशन और लिए गए कर्ज का ब्याज चुकाने में खर्च हो रहे हैं।
नए बुनियादी ढांचे (सड़क, पुल, अस्पताल) के निर्माण पर कुल बजट का 7.1% सीधा खर्च किया जा रहा है। यदि प्रभावी पूंजीगत व्यय को देखें तो यह 13.6% तक जाता है। बजट में 20 पैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे क्षेत्रों के लिए आरक्षित है। सरकार 11 पैसे शिक्षा और कौशल विकास पर खर्च कर रही है।

कैसा है सैनी सरकार का बजट?… एक्सपर्ट की 3 बातें…
- संतुलित विकास की दिशा : गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के मैनेजमेंट विभाग के प्रोफेसर डॉ. कर्मपाल नरवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के 12 सूत्रीय एजेंडा में हरियाणा के समग्र विकास की स्पष्ट झलक मिलती है। इसमें कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, अवसंरचना और सामाजिक सुरक्षा जैसे सभी प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है। यह एजेंडा राज्य को योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की सोच को दर्शाता है।
- किसान, युवा और महिलाओं पर खास फोकस : प्रो. नरवाल के अनुसार, बजट से पहले रखे गए एजेंडा में कृषि उत्थान के तहत फसल विविधीकरण, प्राकृतिक खेती और किसान उत्पादक संगठनों को मजबूत करने की बात है। साथ ही, सामाजिक सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण विकास और वित्तीय अनुशासन पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
- युवाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण की बात: प्रोफेसर नरवाल की मानें तो बजट से युवा सशक्तिकरण के लिए कौशल विकास, पारदर्शी भर्ती और स्टार्टअप को बढ़ावा दिया जाएगा। महिला सशक्तिकरण के लिए स्वयं सहायता समूहों और स्वरोज़गार योजनाओं पर जोर है। यह पहल राज्य की सामाजिक और आर्थिक मजबूती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

- 2047 विजन की ओर बढ़ता हरियाणा : उन्होंने बताया कि एजेंडा में सरकारी स्कूलों का आधुनिकीकरण, उच्च शिक्षा में नवाचार, अस्पतालों का उन्नयन, MSME को बढ़ावा, सड़क-जल-शहरी ढांचे को मजबूत करना और डिजिटल गवर्नेंस जैसी योजनाएं शामिल हैं।
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हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को विधानसभा में बतौर वित्त मंत्री ₹2,23,658.17 करोड़ का बजट पेश किया। यह पिछले बजट की तुलना में 10.28 प्रतिशत ज्यादा है। सैनी ने बजट भाषण की शुरुआत गुरु नानक देव जी के सिद्धांत, ‘किरत कर, नाम जप, वंड छक’ से की। केसरिया पगड़ी पहनकर आए CM सैनी ने 3 घंटे 10 मिनट तक बजट भाषण पढ़ा। (पूरी खबर पढ़ें)
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हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने वर्ष 2026-27 के लिए ₹2,23,658 करोड़ का बजट पेश किया है। यह पिछले वर्ष के ₹2,02,816 करोड़ के मुकाबले करीब ₹20,841 करोड़ ज्यादा है। बजट में मुख्यमंत्री ने अपने 12 विभागों को सबसे ज्यादा बजट दिया है। (पूरी खबर पढ़ें)
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