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चंडीगढ़। एचआईवी/एड्स के खिलाफ जंग को तेज करते हुए नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (नाको) ने आम लोगों के लिए एआई आधारित ब्रेक फ्री सेल्फ-असेसमेंट ऐप शुरू किया है।
अब कोई भी व्यक्ति नाको की वेबसाइट पर जाकर 5–6 आसान सवालों के जवाब देकर यह जान सकता है कि वह एचआईवी संक्रमण के खतरे के दायरे में है या नहीं। यह पूरी प्रक्रिया गोपनीय होगी और ऐप आपके जवाबों के आधार पर तुरंत जोखिम स्तर बता देगा। साथ ही जरूरत पड़ने पर जांच और परामर्श की सलाह भी देगा।
यह जानकारी स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी की परियोजना निदेशक डॉ. सद्भावना पंडित नाको के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन एड्सकॉन के समापन समारोह में शुक्रवार को दी। सम्मेलन में एचआईवी रोकथाम, जांच, उपचार, काउंसलिंग और जागरूकता पर 10 तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें देशभर से आए विशेषज्ञों ने करीब 50 शोधपत्र प्रस्तुत किए।
डॉ. सद्भावना पंडित ने बताया कि देश ने अब 95-95-95 (जांच, इलाज, संक्रमण पर नियंत्रम का प्रतिशत) लक्ष्य से आगे बढ़ते हुए दिसंबर 2026 तक एड्स-फ्री यानी 100% उन्मूलन का लक्ष्य तय किया है। समय पर जांच, उपचार और जागरूकता से यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है और ब्रेक फ्री ऐप उसी दिशा में बड़ा कदम है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एचआईवी का शुरुआती चरण अक्सर बिना लक्षण के होता है। ऐसे में लोग जांच कराने से कतराते हैं या जोखिम को नजरअंदाज कर देते हैं। ब्रेक फ्री ऐप का मकसद यही है कि व्यक्ति पहले खुद जोखिम समझे और जरूरत हो तो तुरंत जांच कराए। समय पर इलाज से एचआईवी संक्रमित व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है और दूसरों में संक्रमण फैलने का खतरा भी काफी कम हो जाता है।
मां से बच्चे में संक्रमण पर बड़ी उपलब्धि
डॉ. पंडित ने बताया कि चंडीगढ़ में पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों के अनुसार मां से नवजात में एचआईवी संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया है। यह उपलब्धि नियमित स्क्रीनिंग, समय पर एआरटी दवाओं और संस्थागत प्रसव के कारण संभव हुई है।
अब ट्रिपल एलिमिनेशन अप्रोच के तहत एचआईवी के साथ-साथ सिफलिस और हेपेटाइटिस-बी को भी शून्य पर लाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि मां और बच्चे दोनों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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Chandigarh News: ब्रेक फ्री ऐप से अब खुद करें एचआईवी का जोखिम आकलन- डॉ सद्भावना


