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नवादा गांव फरीदाबाद में टमाटर उगाने वाले किसान कृष्ण ने एक एकड़ में 80 से 85 हजार रुपये लगा दिए लेकिन बीमारी और गिरते दामों ने उम्मीद तोड़ दी. 27 से 28 किलो की एक कैरेट 400 से 500 रुपये बिके तभी गुजारा संभव है. मंडी और मौसम के भरोसे टिकी है उनकी मेहनत और बच्चों की पढ़ाई.
फरीदाबाद. जब किसान फसल बोता है तो उसके मन में बस एक ही आस होती है. इस बार पैदावार बढ़िया हुई तो घर का खर्चा निकल जाएगा. बच्चों की पढ़ाई घर का राशन, दवाइयां, बाकी सब कुछ खेती पर टिका रहता है. लेकिन खेती कोई सरकारी नौकरी नहीं है, यहां जितनी मेहनत है उतना ही रिस्क भी है. मौसम का क्या भरोसा कब बारिश ले डूबे या सूखा परेशान कर दे कोई नहीं जानता. बीमारियों का डर अलग और ऊपर से मंडी में दाम कब गिर जाएं किसी को नहीं पता.
दरअसल, फरीदाबाद के नवादा गांव में टमाटर की खेती करने वाले किसान कृष्ण की हालत भी इन दिनों कुछ ऐसी ही है. उनकी उम्मीदें इस बार टूटती दिख रही हैं. Local18 से बात करते हुए कृष्ण बताते हैं कि उन्होंने एक एकड़ में टमाटर लगाए हैं. कई साल से कंपनी की वैरायटी ले रहे थे अब तक फसल ठीक-ठाक मिलती रही. इस बार पूरा मामला उल्टा पड़ गया. कृष्ण कहते हैं इस बार कंपनी हाथ खड़े कर गई. पौधों में तायरन बीमारी लग गई है. फल एकदम कम आ रहा है जो आ भी रहा है वो कमजोर है. उन्होंने डॉक्टर को दिखाया डॉक्टर की बताई दवा डाली यहां तक कि वायर कंपनी की दवा भी ट्राई कर ली परन्तु कुछ खास फर्क नहीं पड़ा.
अब तक एक एकड़ में करीब 56,000 रुपये खर्च हो चुके हैं. चार-पांच बार खेत की जुताई करनी पड़ी. बीज से लेकर नर्सरी तक सब खुद तैयार किया. पौधे भी एक-एक फुट की दूरी पर लगाए. 15 दिन में एक बार सिंचाई करनी पड़ती है. 6 महीने की फसल है मतलब लगातार निगरानी चाहिए. इस बार उन्होंने जाल लगाकर भी देखा ताकि बीमारी कम फैले और फल सड़े नहीं लेकिन उसमें खर्च और बढ़ गया. एक एकड़ में कुल लागत जाल समेत लगाकर अब 80 से 85 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है.
पूरी जवानी खेत में निकल गई
कृष्ण खुद यूपी के कासगंज के रहने वाले हैं. वहां भी खेती करते थे, पर मंडी छोटी थी सही दाम नहीं मिलते थे. इसी आस में 2012 में फरीदाबाद आ गए यहां सोचा, मंडी बड़ी है तो दाम भी अच्छे मिलेंगे. नवादा गांव में एक एकड़ जमीन पट्टे पर ली है सालाना 50,000 किराया देते हैं. उम्र अब 36 हो गई है और पूरी जवानी खेत में निकल गई.
एक कैरेट में 27 से 28 किलो टमाटर आता है
कृष्ण बताते हैं कि घर की जिम्मेदारियां भी तो कम नहीं हैं. एक बेटा दूसरी क्लास में है दूसरा नर्सरी में. कृष्ण बताते हैं बच्चों की पढ़ाई का खर्चा निकालना मुश्किल हो गया है. ऊपर से कीड़े भी लग रहे हैं कल ही डॉक्टर बुलाया था. पिछले साल टमाटर 30 से 40 रुपये किलो बिका फिर भी खास बचत नहीं हुई. कृष्ण कहते हैं एक कैरेट टमाटर कम से कम 400 से 500 रुपये में बिकना चाहिए तभी कुछ बचता है. एक कैरेट में 27 से 28 किलो टमाटर आता है. वे अपनी फसल फरीदाबाद, डबुआ और कभी-कभी पलवल मंडी तक लेकर जाते हैं. कृष्ण की कहानी बस उनकी नहीं है बल्कि उन हजारों किसानों की है जो हर बार नई उम्मीद के साथ बीज बोते हैं. मेहनत तो पूरी करते हैं लेकिन मुनाफा किस्मत और मंडी के भरोसे छोड़ना पड़ता है.
About the Author
Vinod Kumar Katwal, a Season journalist with 14 years of experience across print and digital media. I have worked with some of India’s most respected news organizations, including Dainik Bhaskar, IANS, Punjab K…और पढ़ें
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