इजराइल में मोदी-नरसंहार में मारे गए यहूदियों को श्रद्धांजलि देंगे: इजराइली राष्ट्रपति और पीएम से मिलेंगे, दोनों देशों में डिफेंस डील संभव Today World News

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तेल अवीव6 मिनट पहले

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पीएम मोदी बुधवार को इजराइल के दौरे पर पहुंचे थे। आज यात्रा का दूसरा दिन है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजराइल दौरे का आज दूसरा दिन है। दिन की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी येरुशलम स्थित होलोकॉस्ट के स्मारक ‘याद वाशेम’ में मारे गए यहूदियों को श्रद्धांजलि देंगे।

इसके बाद वह इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से मुलाकात करेंगे, जहां द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा होगी। इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच बड़ी डिफेंस डील हो सकती है।

दोपहर से पहले प्रधानमंत्री मोदी इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। इस बैठक में रक्षा सहयोग, मिसाइल डिफेंस सिस्टम, साइबर सुरक्षा और एडवांस टेक्नीक के सेक्टर में साझेदारी पर फोकस रहने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को दो दिन के इजराइल दौरे पर पहुंचे थे। नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा नेतन्याहू ने एयरपोर्ट पर मोदी को रिसीव किया था। इसके बाद पीएम मोदी ने इजराइली संसद नेसेट को भी संबोधित किया। उन्हें संसद का सर्वोच्च सम्मान ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ दिया गया। मोदी नेसेट को संबोधित करने पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने।

PM मोदी के स्पीकर अमीर ओहाना ने इजराइली संसद का सर्वोच्च सम्मान ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ दिया।

PM मोदी के स्पीकर अमीर ओहाना ने इजराइली संसद का सर्वोच्च सम्मान ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ दिया।

हिटलर के शासन में मारे गए यहूदियों की याद में बना ‘यद वाशेम’ स्मारक

याद वाशेम होलोकॉस्ट के दौरान मारे गए लाखों यहूदियों की याद में बनाया गया है। यह स्मारक इजराइल की राजधानी येरुशलम में स्थित है और हर साल दुनिया भर से लोग यहां आकर इतिहास को समझते हैं और श्रद्धांजलि देते हैं।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी के तानाशाह एडॉल्फ हिटलर ने लगभग 60 लाख यहूदियों की हत्या कर दी थी। इस नरसंहार को होलोकॉस्ट कहा जाता है। इजराइल की संसद नेसेट ने साल 1953 में फैसला किया कि होलोकॉस्ट में मारे गए लोगों की याद में एक खास स्मारक बनाया जाए।

बाद में 2005 में यहां एक आधुनिक संग्रहालय खोला गया, ताकि आने वाली पीढियां इस त्रासदी को समझ सकें। याद वाशेम परिसर में होलोकॉस्ट संग्रहालय, हॉल ऑफ नेम्स, बच्चों का स्मारक और राइटियस अमंग द नेशंस गार्डन जैसी जगहें मौजूद हैं। यहां असली दस्तावेज, तस्वीरें और पीडितों की व्यक्तिगत कहानियां सुरक्षित रखी गई हैं।

याद वाशेम नाम का अर्थ है याद और नाम, यानी जिन लोगों को मिटाने की कोशिश की गई, उनकी याद हमेशा जिंदा रहे।

जर्मनी में 1941 से 1945 के बीच हिटलर के शासन को दौरान लाखों यहूदी मारे गए थे। इसे नरसंहार को होलोकॉस्ट कहा जाता है।

जर्मनी में 1941 से 1945 के बीच हिटलर के शासन को दौरान लाखों यहूदी मारे गए थे। इसे नरसंहार को होलोकॉस्ट कहा जाता है।

इजराइल के ‘यद वाशेम’ के म्यूजियम में होलोकॉस्ट में मारे गए लोगों से जुड़ी यादें मौजूद हैं। यहां उनके नाम और तस्वीरें लगाई गई हैं।

इजराइल के ‘यद वाशेम’ के म्यूजियम में होलोकॉस्ट में मारे गए लोगों से जुड़ी यादें मौजूद हैं। यहां उनके नाम और तस्वीरें लगाई गई हैं।

26 फरवरी को पीएम मोदी का शेड्यूल (स्थानीय समयानुसार)… सुबह करीब 9 बजे: पीएम मोदी याद वाशेम होलोकॉस्ट मेमोरियल जाकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। सुबह करीब 10:30 बजे: इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से औपचारिक मुलाकात और द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। सुबह 11:30 से दोपहर 12:30 बजे: प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की अहम बैठक होगी। दोपहर करीब 12:45 बजे: भारत-इजराइल के बीच समझौतों पर हस्ताक्षर और संयुक्त प्रेस बयान जारी किया जाएगा। दोपहर करीब 1:15 बजे: आधिकारिक कार्यक्रम समाप्त कर पीएम मोदी भारत के लिए रवाना होंगे।

किन मुद्दों पर चर्चा हो सकती है

बैठक के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कृषि तकनीक और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हो सकती है। व्यापार और इन्वेस्टमेंट को आगे बढ़ाने पर चर्चा भी होगी।

वार्ता के बाद कुछ अहम समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर और संयुक्त बयान जारी किया जा सकता है। रक्षा और टेक्नोलॉजी क्षेत्र में नए करार भारत की आत्मनिर्भरता और मेक इन इंडिया पहल को मजबूती दे सकते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी अपने कार्यक्रम के दौरान इजराइल में बसे भारतीय मूल के यहूदी समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात को सांस्कृतिक रिश्तों और लोगों के बीच जुडाव मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। दिनभर के कार्यक्रमों के बाद प्रधानमंत्री भारत के लिए रवाना हो जाएंगे।

भारत-इजराइल में FTA पर बातचीत जारी

मोदी का यह दौरा ऐसे वक्त पर हो रहा है जब भारत और इजराइल के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत का पहला दौर 23 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में शुरू हुआ है और यह 26 फरवरी 2026 तक चलेगा।

नवंबर 2025 में दोनों देशों ने टर्म्स ऑफ रेफरेंस पर साइन किए थे, जिससे यह तय हुआ कि किन मुद्दों पर बातचीत होगी और कैसे आगे बढ़ा जाएगा। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल सामान का व्यापार 3.62 अरब अमेरिकी डॉलर यानी करीब 31 हजार करोड़ रुपए रहा।

दोनों देश कई क्षेत्रों में एक-दूसरे के लिए फायदेमंद हैं। यह एफटीए दोनों के बीच व्यापार बढ़ाने में मदद करेगा और कारोबारियों, खासकर छोटे और मध्यम उद्योगों को ज्यादा भरोसा और स्थिरता देगा।

इस बातचीत के दौरान दोनों देशों के एक्सपर्ट्स अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। इनमें गुड्स एंड सर्विसेज का व्यापार, रूल्स ऑफ ओरिजन, हेल्थ और पौधों से जुड़े नियम, व्यापार में आने वाली तकनीकी रुकावटें, कस्टम प्रोसेस, व्यापार को आसान बनाने के उपाय और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स जैसे मुद्दे शामिल हैं।

भारत-इजराइल के बीच ड्रोन डील संभव

PM मोदी आज इजराइली प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान भारत और इजराइल के बीच ड्रोन की खरीद और जॉइंट मैन्युफैक्चरिंग समेत कई बड़े रक्षा समझौतों पर सहमति बन सकती है।

फोर्ब्स इंडिया के मुताबिक 2026 में दोनों देशों के बीच 8.6 अरब डॉलर का रक्षा समझौता संभव है। इसमें प्रिसीजन गाइडेड बम और मिसाइल सिस्टम के साथ एडवांस ड्रोन भी शामिल हो सकते हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार भारत हैरोन MK-2 MALE ड्रोन खरीदने की योजना बना रहा है। यह ड्रोन 45 घंटे तक लगातार उड़ान भर सकता है, 470 किलोग्राम भार उठा सकता है और 35 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है।

इसके अलावा आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC), व्यापार और निवेश, एडवांस टेक्नोलॉजी व इनोवेशन में जैसे मुद्दों पर भी बातचीत संभव हैं। हालांकि संभावित समझौतों को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

आयरन डोम डिफेंस सिस्टम पर भी बात हो सकती है

इजराइल भारत के साथ अपने एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम आयरन डोम की टेक्नोलॉजी शेयर कर सकता है। यह जानकारी मुंबई में IANS को दिए इंटरव्यू में इजराइल के कॉन्सुल जनरल यानिव रेवाच ने दी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच एजेंडे में आयरन डोम को लेकर बातचीत भी शामिल है।

उन्होंने कहा कि इजराइल इस टेक्नोलॉजी को भारत के साथ शेयर करने के लिए है। रेवाच ने कहा कि दोनों देशों के बीच पहले से मजबूत रक्षा संबंध है। अब इसे आगे बढ़ाते हुए भारत में सैन्य उपकरणों के निर्माण पर फोकस किया जाएगा।

दौरे के पहले दिन को जानिए…

एयरपोर्ट पर नेतन्याहू-मोदी ने प्राइवेट बातचीत की

मोदी को रिसीव करने के दौरान 25 फरवरी को एयरपोर्ट पर ही मोदी और नेतन्याहू ने राजधानी तेल अवीव में प्राइवेट बातचीत भी की। इसके बाद वे होटल पहुंचे जहां, प्रवासी भारतीयों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान कलाकारों ने परफॉर्मेंस भी दी। मोदी का यह 9 साल बाद दूसरा इजराइल दौरा है। इससे पहले वे जुलाई 2017 में तेल अवीव गए थे।

मोदी के संबोधन की 5 बड़ी बातें…

  1. 140 करोड़ भारतीयों का संदेश: 140 करोड़ भारतीयों की ओर से आपके लिए शुभकामनाएं, मित्रता, सम्मान और मजबूत साझेदारी का संदेश लेकर आया हूं।
  2. यहूदी सुरक्षा: गर्व से कह सकता हूं कि भारत में यहूदी समुदाय बिना किसी डर, भेदभाव या उत्पीड़न के साथ रहा है। उन्होंने अपनी आस्था को सुरक्षित रखा और समाज में पूरी भागीदारी की।
  3. 2 हजार साल पुराने रिश्ते: भारत और इजराइल का रिश्ता 2 हजार साल से भी पुराना है। बुक ऑफ एस्तेर में भारत का जिक्र मिलता है और तलमुद में हमारे व्यापारिक संबंधों का उल्लेख है।
  4. आतंकवाद: किसी भी कारण से आम नागरिकों की हत्या को सही नहीं ठहराया जा सकता। आतंकवाद कभी भी जायज नहीं है। भारत ने भी आतंकवाद का दर्द झेला है, इसलिए हमारी नीति स्पष्ट और सख्त है।
  5. गाजा समर्थन: UNSC समर्थित गाजा शांति पहल का समर्थन करता हूं। मुझे विश्वास है कि यह पहल क्षेत्र में न्यायपूर्ण और स्थायी शांति ला सकती है। भारत बातचीत, शांति और स्थिरता के लिए आपके साथ खड़ा है।

नेतन्याहू के संबोधन की 2 बड़ी बातें…

  1. भारत में यहूदियों: भारत एक ऐसी सभ्यता है, जहां यहूदियों को कभी सताया नहीं गया। भारत का धन्यवाद, वहां यहूदी समुदाय का हमेशा स्वागत और सम्मान किया गया।
  2. भारत-इजरायल रिश्ते: दोनों देशों के संबंध सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि दिल से जुड़े हुए हैं। भारत और इजराइल का गठबंधन दोनों देशों की ताकत को कई गुना बढ़ा देता है।

तस्वीरों में कल का दौरा…

प्रधानमंत्री मोदी इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ एक ही कार में होटल तक आए।

प्रधानमंत्री मोदी इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ एक ही कार में होटल तक आए।

बेन गुरियन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ही नेत्नयाहू और मोदी ने प्राइवेट बातचीत की।

बेन गुरियन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ही नेत्नयाहू और मोदी ने प्राइवेट बातचीत की।

इजराइली संसद ने स्पीकर अमीर ओहाना ने हिंदी में PM मोदी का नेसेट में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यरुशलम में आपका स्वागत है।

इजराइली संसद ने स्पीकर अमीर ओहाना ने हिंदी में PM मोदी का नेसेट में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यरुशलम में आपका स्वागत है।

इजराइली संसद नेसेट में पीएम मोदी, इजराइली पीएम नेतन्याहू उनकी पत्नी और केनेसट के स्पीकर अमीर ओहाना ने तस्वीर खिंचाई।

इजराइली संसद नेसेट में पीएम मोदी, इजराइली पीएम नेतन्याहू उनकी पत्नी और केनेसट के स्पीकर अमीर ओहाना ने तस्वीर खिंचाई।

मोदी के इजराइल दौरे की टाइमिंग पर सवाल उठे

मोदी के इजराइल दौरे की टाइमिंग को लेकर विदेश मामलों की स्थायी संसदीय समिति ने सवाल उठाए हैं। यह दौरा ऐसे वक्त हो रहा है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है। अमेरिका की सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं।

सोमवार को समिति की बैठक में कुछ सांसदों ने सवाल उठाया कि जब भारत ने अपने नागरिकों को संभावित अमेरिकी हमले के खतरे के कारण ईरान छोड़ने की सलाह दी है, तो ऐसे समय में प्रधानमंत्री का इजराइल जाना कितना उचित है।

इस पर विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि सभी प्रधानमंत्री स्तर की यात्राएं सुरक्षा को ध्यान में रखकर तय की जाती हैं, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि तनाव बढ़ने पर दौरा रद्द होगा या नहीं।

बैठक की अध्यक्षता समिति अध्यक्ष शशि थरूर ने की थी। कुछ सांसदों ने आरोप लगाया कि सरकार विदेश नीति में अमेरिका के प्रभाव को ज्यादा महत्व दे रही है और इससे भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।

मोदी इजराइल जाने वाले एकमात्र भारतीय PM

मोदी इजराइल का दौरा करने वाले अब तक एकमात्र भारतीय प्रधानमंत्री हैं। 70 साल तक किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इजराइल की यात्रा नहीं की थी। 2017 में मोदी ने यह ऐतिहासिक कदम उठाया और दोनों देशों के रिश्तों में नई शुरुआत की।

भारत ने 1950 में इजराइल को मान्यता दी, 1992 में कूटनीतिक संबंध स्थापित किए, लेकिन प्रधानमंत्री स्तर की यात्रा नहीं हुई। इसकी एक बड़ी वजह भारत की पारंपरिक फिलिस्तीन-समर्थक नीति रही।

जुलाई 2017 में मोदी की पहली यात्रा को ‘पाथ-ब्रेकिंग’ कहा गया। उस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन और टेक्नोलॉजी से जुड़े सेक्टर्स में समझौते हुए।

कभी इजराइल बनने के खिलाफ था भारत

भारत और इजराइल के संबंधों में भले ही आज गर्मजोशी देखी जाती है, लेकिन शुरुआत में भारत इजराइल बनने के ही खिलाफ था। भारत नहीं चाहता था कि फिलिस्तीन को बांटकर इजराइल बनाया जाए।

महात्मा गांधी ने 1938 में अपने साप्ताहिक पत्र हरिजन में लिखा कि फिलिस्तीन उतना ही अरबों का है जितना इंग्लैंड अंग्रेजों का और फ्रांस फ्रांसीसियों का। उन्होंने यहूदियों के साथ हो रहे जर्मन अत्याचारों पर सहानुभूति जताई, लेकिन साथ ही कहा कि किसी पीड़ित समुदाय की समस्या का समाधान दूसरे समुदाय की जमीन पर उन्हें बसाकर नहीं किया जा सकता।

1947 में जब संयुक्त राष्ट्र ने फिलिस्तीन को दो हिस्सों यहूदी राज्य (इजराइल) और अरब राज्य (फिलिस्तीन) में बांटने का प्रस्ताव रखा, तब भारत ने इसका विरोध किया। भारत का मानना था कि यह विभाजन बाहरी दबाव में किया जा रहा है और इससे स्थायी शांति नहीं आएगी।

स्वतंत्रता के बाद भी भारत अपने रुख पर कायम रहा। 1949 में जब इजराइल की संयुक्त राष्ट्र सदस्यता पर मतदान हुआ, तो भारत ने उसके खिलाफ वोट दिया।

इस दौर की नीति ने भारत की विदेश नीति की नींव रखी। यही कारण है कि शुरुआती दशकों में भारत ने खुद को फिलिस्तीनी अधिकारों का समर्थक और पश्चिम एशिया की राजनीति में संतुलन बनाने वाले देश के रूप में स्थापित किया।

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